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Siddharthnagar News: समितियों में नहीं है खाद, भटक रहे किसान
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समितियों में नहीं है खाद, भटक रहे किसान
शोहरतगढ़। गेहूं की बुआई के समय मांग के हिसाब से डीएपी उपलब्ध न होने से किसान परेशान हैं। समितियों के चक्कर लगाकर किसान परेशान हैं। उन्हें हर दिन मायूस होकर घर लौटना पड़ रहा है। वहीं, अधिकारी बार-बार किसानों को यही भरोसा दिला रहे हैं कि जल्द ही खाद उपलब्ध हो जाएगी।
जिले में डीएपी की इस प्रकार किल्लत है कि भागदौड़ के बाद भी किसान को एक बोरी खाद बड़ी मुश्किल से निर्धारित रेट पर नसीब हो पा रही है। डीएपी पाने की लालसा में समितियों पर सुबह-शाम किसान पहुंच रहे हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा। इससे किसान परेशान होकर निजी दुकानों से डीएपी को महंगे दामों पर खरीद कर गेहूं की बुआई कर रहे हैं।
चिल्हिया क्षेत्र के कपिया चौराहे पर स्थित किसान सेवा केंद्र पर डीएपी के लिए प्रतिदिन सुबह-शाम चक्कर लगाकर लोग घर चले जा रहे हैं। साधन सहकारी समिति शोहरतगढ़, परसा, ढेबरुआ, बोहली में डीएपी वितरण के कुछ घंटे बाद ही स्टॉक खत्म हो जाने की सूचना से घंटों लाइन में लगे किसानों को मायूस होकर खाली हाथ लौटने को विवश होना पड़ा रहा है।
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साधन सहकारी समिति चिल्हिया में तो कई महीनों से ताला लगा है। क्षेत्र के किसान डीएपी लेने की आस से जाते हैं। समिति में ताला लटकता हुआ देखकर निजी दुकानों पर महंगे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं। क्षेत्र के दीपेंद्र सिंह निवासी जलापुरवा, अशोक पासवान निवासी तमकुहवा, रामटहल निवासी औदही, सुभाष तिवारी निवासी खरिकौरा, रामानंद चौहान निवासी जलापुरवा, विश्वनाथ यादव निवासी चरिहवा, राममूरत यादव निवासी मनिकौरा ने कहा समितियों पर डीएपी के संकट को देखते हुए निजी दुकानदार किसानों से इसके एवज में मनमानी वसूली कर रहे हैं।
प्रिंट रेट पर बिक्री के आदेश के बाद भी कई निजी दुकान संचालक दो सौ से तीन सौ रुपये अधिक दाम पर खाद बेच रहे हैं। इनका आरोप है कि सरकारी केंद्रों पर खाद न मिलने से मजबूरी के चलते खेती बचाने के लिए महंगी खाद खरीदनी पड़ रही है। अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि खाद की समस्या है। जैसे ही खाद आ रही है, वैसे ही समितियों में भेजी जा रही है।
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शोहरतगढ़। गेहूं की बुआई के समय मांग के हिसाब से डीएपी उपलब्ध न होने से किसान परेशान हैं। समितियों के चक्कर लगाकर किसान परेशान हैं। उन्हें हर दिन मायूस होकर घर लौटना पड़ रहा है। वहीं, अधिकारी बार-बार किसानों को यही भरोसा दिला रहे हैं कि जल्द ही खाद उपलब्ध हो जाएगी।
जिले में डीएपी की इस प्रकार किल्लत है कि भागदौड़ के बाद भी किसान को एक बोरी खाद बड़ी मुश्किल से निर्धारित रेट पर नसीब हो पा रही है। डीएपी पाने की लालसा में समितियों पर सुबह-शाम किसान पहुंच रहे हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा। इससे किसान परेशान होकर निजी दुकानों से डीएपी को महंगे दामों पर खरीद कर गेहूं की बुआई कर रहे हैं।
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चिल्हिया क्षेत्र के कपिया चौराहे पर स्थित किसान सेवा केंद्र पर डीएपी के लिए प्रतिदिन सुबह-शाम चक्कर लगाकर लोग घर चले जा रहे हैं। साधन सहकारी समिति शोहरतगढ़, परसा, ढेबरुआ, बोहली में डीएपी वितरण के कुछ घंटे बाद ही स्टॉक खत्म हो जाने की सूचना से घंटों लाइन में लगे किसानों को मायूस होकर खाली हाथ लौटने को विवश होना पड़ा रहा है।
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साधन सहकारी समिति चिल्हिया में तो कई महीनों से ताला लगा है। क्षेत्र के किसान डीएपी लेने की आस से जाते हैं। समिति में ताला लटकता हुआ देखकर निजी दुकानों पर महंगे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर हो रहे हैं। क्षेत्र के दीपेंद्र सिंह निवासी जलापुरवा, अशोक पासवान निवासी तमकुहवा, रामटहल निवासी औदही, सुभाष तिवारी निवासी खरिकौरा, रामानंद चौहान निवासी जलापुरवा, विश्वनाथ यादव निवासी चरिहवा, राममूरत यादव निवासी मनिकौरा ने कहा समितियों पर डीएपी के संकट को देखते हुए निजी दुकानदार किसानों से इसके एवज में मनमानी वसूली कर रहे हैं।
प्रिंट रेट पर बिक्री के आदेश के बाद भी कई निजी दुकान संचालक दो सौ से तीन सौ रुपये अधिक दाम पर खाद बेच रहे हैं। इनका आरोप है कि सरकारी केंद्रों पर खाद न मिलने से मजबूरी के चलते खेती बचाने के लिए महंगी खाद खरीदनी पड़ रही है। अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि खाद की समस्या है। जैसे ही खाद आ रही है, वैसे ही समितियों में भेजी जा रही है।