फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   The night is spent in the hut amidst the harsh cold.

Siddharthnagar News: कड़ाके की ठंड के बीच झोपड़ी में कट रही रात

Fri, 24 Jan 2025 12:06 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jan 2025 12:06 AM IST
विज्ञापन
The night is spent in the hut amidst the harsh cold.
बांसी विकास क्षेत्र के गोनहा ताल पूर्वी गांव में अर्ध निर्मित मकान में जीवन व्यतीत करती ज्ञानमत
ब्रह्रानंद उपाध्याय
विज्ञापन

सकारपार। बांसी ब्लॉक क्षेत्र के गोनहा ताल गांव में कुछ ऐसे परिवार हैं, जिन्हें आजादी के 76 साल बीत जाने के बाद भी झोपड़ी में ही गुजर बसर करना पड़ रहा है।
केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार गरीबों को आवास के रूप में पक्का मकान मुहैया कराने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, फिर भी कुछ गरीब परिवार ऐसे हैं जिनको अभी तक पक्का मकान मयस्सर नहीं हुआ। बांसी ब्लॉक क्षेत्र के बांसी-धानी मार्ग स्थित गोनहा ताल गांव में कई ऐसे परिवार हैं, जो अभी भी झोपड़ी एवं टीना टप्पर में रहने को मजबूर हैं। जिम्मेदार आवास की आस तो देते हैं, लेकिन बाद में उनकी फाइले घूमती रहती हैं। यही कारण है कि गरीब परिवार को कड़ाके की ठंड में भी झोपड़ी में जिंदगी गुजारना पड़ रहा है। गोनहा ताल गांव निवासी सुनीता निषाद पत्नी सुग्रीव एक दशक से आवास की आस में है। सुनीता के पास रहने के लिए केवल फूस की झोपड़ी है। जिस पर वह तिरपाल डालकर पति सहित छह बच्चों के साथ इस कड़ाके की सर्द में रात काट रही हैं। आज तक इस परिवार को आवास मुहैया नहीं कराया गया।
विज्ञापन

सुनीता ने बताया कि हमारे पास चार बेटी दो बेटे है। बड़ी बेटी बीस वर्ष की है, जो दिव्यांग है। वह मुंह से ठीक से बोल नहीं पाती है। पैसों के अभाव में उसका इलाज ठीक से नहीं हो पा रहा है। चार बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी सिर पर है। पति घर परिवार चलाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

हम लोगों को बड़ी बेटी की इलाज के साथ परिवार के परवरिश एवं बच्चों के पठन पाठन की चिंता भी खाए जा रही है। हमारे पास कोई कृषि योग्य भूमि भी नहीं है। इस दशा में मकान बनवाना हमारे लिए संभव नहीं है। बरसात के मौसम में झोपड़ी के ऊपर तिरपाल डालकर किसी तरह समय कट गया, लेकिन अब ठंडक के मौसम में बड़ी मुश्किल हो रही है। आवास के लिए कई बार ब्लाॅक मुख्यालय पर चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन पक्का मकान नहीं मिला।
इसी गांव के राजेंद्र पुत्र मोल्हू के पास अर्धनिर्मित मकान है। मकान के ऊपर सीमेंट का पतरा डालकर लगभग पंद्रह वर्षों से जीवन बसर कर रहे है। राजेंद्र की पत्नी ज्ञानमती को गंभीर बीमारी है।

जिसके कारण मकान बनवाने की व्यवस्था नहीं बन पा रही है, सारा पैसा पत्नी के इलाज में ही खर्च हो जाता है।
इस संबंध में बीडीओ बांसी कार्तिकेय मिश्र ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। पता करवाया जाएगा अगर पात्रता की सूची में है तो ऐसे लोगों को आवास मुहैय्या कराया जाएगा।।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed