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Siddharthnagar News: कड़ाके की ठंड के बीच झोपड़ी में कट रही रात
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बांसी विकास क्षेत्र के गोनहा ताल पूर्वी गांव में अर्ध निर्मित मकान में जीवन व्यतीत करती ज्ञानमत
ब्रह्रानंद उपाध्याय
सकारपार। बांसी ब्लॉक क्षेत्र के गोनहा ताल गांव में कुछ ऐसे परिवार हैं, जिन्हें आजादी के 76 साल बीत जाने के बाद भी झोपड़ी में ही गुजर बसर करना पड़ रहा है।
केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार गरीबों को आवास के रूप में पक्का मकान मुहैया कराने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, फिर भी कुछ गरीब परिवार ऐसे हैं जिनको अभी तक पक्का मकान मयस्सर नहीं हुआ। बांसी ब्लॉक क्षेत्र के बांसी-धानी मार्ग स्थित गोनहा ताल गांव में कई ऐसे परिवार हैं, जो अभी भी झोपड़ी एवं टीना टप्पर में रहने को मजबूर हैं। जिम्मेदार आवास की आस तो देते हैं, लेकिन बाद में उनकी फाइले घूमती रहती हैं। यही कारण है कि गरीब परिवार को कड़ाके की ठंड में भी झोपड़ी में जिंदगी गुजारना पड़ रहा है। गोनहा ताल गांव निवासी सुनीता निषाद पत्नी सुग्रीव एक दशक से आवास की आस में है। सुनीता के पास रहने के लिए केवल फूस की झोपड़ी है। जिस पर वह तिरपाल डालकर पति सहित छह बच्चों के साथ इस कड़ाके की सर्द में रात काट रही हैं। आज तक इस परिवार को आवास मुहैया नहीं कराया गया।
सुनीता ने बताया कि हमारे पास चार बेटी दो बेटे है। बड़ी बेटी बीस वर्ष की है, जो दिव्यांग है। वह मुंह से ठीक से बोल नहीं पाती है। पैसों के अभाव में उसका इलाज ठीक से नहीं हो पा रहा है। चार बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी सिर पर है। पति घर परिवार चलाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।
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हम लोगों को बड़ी बेटी की इलाज के साथ परिवार के परवरिश एवं बच्चों के पठन पाठन की चिंता भी खाए जा रही है। हमारे पास कोई कृषि योग्य भूमि भी नहीं है। इस दशा में मकान बनवाना हमारे लिए संभव नहीं है। बरसात के मौसम में झोपड़ी के ऊपर तिरपाल डालकर किसी तरह समय कट गया, लेकिन अब ठंडक के मौसम में बड़ी मुश्किल हो रही है। आवास के लिए कई बार ब्लाॅक मुख्यालय पर चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन पक्का मकान नहीं मिला।
इसी गांव के राजेंद्र पुत्र मोल्हू के पास अर्धनिर्मित मकान है। मकान के ऊपर सीमेंट का पतरा डालकर लगभग पंद्रह वर्षों से जीवन बसर कर रहे है। राजेंद्र की पत्नी ज्ञानमती को गंभीर बीमारी है।
जिसके कारण मकान बनवाने की व्यवस्था नहीं बन पा रही है, सारा पैसा पत्नी के इलाज में ही खर्च हो जाता है।
इस संबंध में बीडीओ बांसी कार्तिकेय मिश्र ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। पता करवाया जाएगा अगर पात्रता की सूची में है तो ऐसे लोगों को आवास मुहैय्या कराया जाएगा।।
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सकारपार। बांसी ब्लॉक क्षेत्र के गोनहा ताल गांव में कुछ ऐसे परिवार हैं, जिन्हें आजादी के 76 साल बीत जाने के बाद भी झोपड़ी में ही गुजर बसर करना पड़ रहा है।
केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार गरीबों को आवास के रूप में पक्का मकान मुहैया कराने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है, फिर भी कुछ गरीब परिवार ऐसे हैं जिनको अभी तक पक्का मकान मयस्सर नहीं हुआ। बांसी ब्लॉक क्षेत्र के बांसी-धानी मार्ग स्थित गोनहा ताल गांव में कई ऐसे परिवार हैं, जो अभी भी झोपड़ी एवं टीना टप्पर में रहने को मजबूर हैं। जिम्मेदार आवास की आस तो देते हैं, लेकिन बाद में उनकी फाइले घूमती रहती हैं। यही कारण है कि गरीब परिवार को कड़ाके की ठंड में भी झोपड़ी में जिंदगी गुजारना पड़ रहा है। गोनहा ताल गांव निवासी सुनीता निषाद पत्नी सुग्रीव एक दशक से आवास की आस में है। सुनीता के पास रहने के लिए केवल फूस की झोपड़ी है। जिस पर वह तिरपाल डालकर पति सहित छह बच्चों के साथ इस कड़ाके की सर्द में रात काट रही हैं। आज तक इस परिवार को आवास मुहैया नहीं कराया गया।
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सुनीता ने बताया कि हमारे पास चार बेटी दो बेटे है। बड़ी बेटी बीस वर्ष की है, जो दिव्यांग है। वह मुंह से ठीक से बोल नहीं पाती है। पैसों के अभाव में उसका इलाज ठीक से नहीं हो पा रहा है। चार बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी सिर पर है। पति घर परिवार चलाने के लिए दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।
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हम लोगों को बड़ी बेटी की इलाज के साथ परिवार के परवरिश एवं बच्चों के पठन पाठन की चिंता भी खाए जा रही है। हमारे पास कोई कृषि योग्य भूमि भी नहीं है। इस दशा में मकान बनवाना हमारे लिए संभव नहीं है। बरसात के मौसम में झोपड़ी के ऊपर तिरपाल डालकर किसी तरह समय कट गया, लेकिन अब ठंडक के मौसम में बड़ी मुश्किल हो रही है। आवास के लिए कई बार ब्लाॅक मुख्यालय पर चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन पक्का मकान नहीं मिला।
इसी गांव के राजेंद्र पुत्र मोल्हू के पास अर्धनिर्मित मकान है। मकान के ऊपर सीमेंट का पतरा डालकर लगभग पंद्रह वर्षों से जीवन बसर कर रहे है। राजेंद्र की पत्नी ज्ञानमती को गंभीर बीमारी है।
जिसके कारण मकान बनवाने की व्यवस्था नहीं बन पा रही है, सारा पैसा पत्नी के इलाज में ही खर्च हो जाता है।
इस संबंध में बीडीओ बांसी कार्तिकेय मिश्र ने बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। पता करवाया जाएगा अगर पात्रता की सूची में है तो ऐसे लोगों को आवास मुहैय्या कराया जाएगा।।