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Siddharthnagar News: विश्व शांति मंच पर सुरक्षा की पैनी नजर, तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु की मौजूदगी से बढ़ी सतर्कता
Tue, 22 Sep 2026 11:33 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 22 Sep 2026 11:33 PM IST
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लुंबिनी में शुरू हुए 17वें विश्व शांति मंच कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिनिधि। स्रोत सोशल मीडिया
- नेपाल के लुंबिनी में शुरू हुआ है 17वें विश्व शांति मंच कार्यक्रम, गेसे सोनाम और मंगोलियाई राजदूत की मौजूदगी पर नजर
खुनुवां। नेपाल के लुंबिनी में सोमवार से तीन दिवसीय 17वें विश्व शांति मंच का आयोजन शुरू हो गया। तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु गेसे सोनाम और भारत-नेपाल के लिए मंगोलिया के राजदूत डॉ. उल्जित लुभसानजाव समेत कई विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां कार्यक्रम की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। नेपाल की एक चीन नीति के संदर्भ में किसी संवेदनशील गतिविधि की आशंका को देखते हुए प्रतिनिधियों की पृष्ठभूमि और गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। हालांकि, कार्यक्रम में किसी राजनीतिक गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है।
काठमांडो के धुम्बाराही स्थित लुंबिनी विश्व शांति मंच और लक्जमबर्ग की शेंगन पीस फाउंडेशन के संयुक्त आयोजन में हो रहे कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘21वीं सदी में शांति की पुनर्कल्पना’ है। बुधवार तक चलने वाले सम्मेलन में जलवायु न्याय, सतत विकास, पर्यटन और विश्व शांति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। कार्यक्रम में इंटरनेशनल शेंगन पीस फाउंडेशन, लक्जमबर्ग के अध्यक्ष विक्की हानसेन, इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस, ऑस्ट्रेलिया के संस्थापक एवं कार्यकारी अध्यक्ष स्टीफ केली, गेसे सोनाम, भूटान के रिग्जिन रिगल और मंगोलियाई राजदूत डॉ. उल्जित लुभसानजाव समेत कई विदेशी प्रतिनिधि शामिल हैं।
लंबे अध्ययन के बाद मिलती है गेसे उपाधि
तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु गेसे सोनाम की मौजूदगी को सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तिब्बती बौद्ध धर्म की गेलुग परंपरा में लंबे अध्ययन के बाद ‘गेसे’ की उपाधि दी जाती है। यह परंपरा ल्हासा के गान्देन, ड्रेपुंग और सेरा मठों से जुड़ी रही है। भारत स्थित तिब्बती धार्मिक केंद्रों के साथ भी इसके संबंध बताए जाते हैं। नेपाल में तिब्बती धार्मिक गतिविधियों को चीन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के संदर्भ में पहले भी देखा जाता रहा है। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों और उनकी गतिविधियों पर विशेष नजर रख रही हैं।
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मंगोलियाई राजदूत की मौजूदगी भी चर्चा में
मंगलवार के सत्र में डॉ. उल्जित लुभसानजाव मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने मंगोलिया में तिब्बती बौद्ध धर्म की गेलुग परंपरा और दलाई लामा के प्रभाव से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। वर्ष 2023 में दलाई लामा द्वारा आठ वर्षीय मंगोलियाई बालक को 10वें जेब्त्सुन्दाम्बा खुतुक्तु के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था।
लुंबिनी में पहले भी सामने आई संवेदनशीलता
नेपाल में तिब्बती गतिविधियों से जुड़े आयोजनों को लेकर चीन की चिंता पहले भी सामने आती रही है। वर्ष 2024 में लुंबिनी में प्रस्तावित नौवें नानहाई बौद्ध सम्मेलन के दौरान चीन समर्थित 11वें पंचेन लामा ग्याल्त्सेन नोर्बू की प्रस्तावित यात्रा चर्चा में रही थी। बाद में यात्रा नहीं हो सकी। 6 जुलाई 2026 को काठमांडो के नागार्जुन स्थित नाम्ग्याल गुम्बा में दलाई लामा का 91वां जन्मदिन मनाए जाने के दौरान कई देशों के राजनयिकों की मौजूदगी भी चर्चा में रही थी। इसके बाद चीनी पक्ष द्वारा नेपाल के विदेश मंत्रालय से जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई थी।
आयोजक बोले- शांति और विकास पर केंद्रित है कार्यक्रम
आयोजक वासुदेव गौतम ने कार्यक्रम को तिब्बती गतिविधियों से जोड़ने से इन्कार किया है। उनका कहना है कि सम्मेलन शांति, जलवायु न्याय, सतत विकास और पर्यटन जैसे विषयों पर केंद्रित है। आयोजकों के अनुसार, लुंबिनी में यह कार्यक्रम दक्षिण एशिया में पहली बार हो रहा है। इससे पहले इसका आयोजन दक्षिण अफ्रीका और स्पेन के बार्सिलोना में किया गया था।
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खुनुवां। नेपाल के लुंबिनी में सोमवार से तीन दिवसीय 17वें विश्व शांति मंच का आयोजन शुरू हो गया। तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु गेसे सोनाम और भारत-नेपाल के लिए मंगोलिया के राजदूत डॉ. उल्जित लुभसानजाव समेत कई विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां कार्यक्रम की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं। नेपाल की एक चीन नीति के संदर्भ में किसी संवेदनशील गतिविधि की आशंका को देखते हुए प्रतिनिधियों की पृष्ठभूमि और गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। हालांकि, कार्यक्रम में किसी राजनीतिक गतिविधि की पुष्टि नहीं हुई है।
काठमांडो के धुम्बाराही स्थित लुंबिनी विश्व शांति मंच और लक्जमबर्ग की शेंगन पीस फाउंडेशन के संयुक्त आयोजन में हो रहे कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘21वीं सदी में शांति की पुनर्कल्पना’ है। बुधवार तक चलने वाले सम्मेलन में जलवायु न्याय, सतत विकास, पर्यटन और विश्व शांति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। कार्यक्रम में इंटरनेशनल शेंगन पीस फाउंडेशन, लक्जमबर्ग के अध्यक्ष विक्की हानसेन, इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस, ऑस्ट्रेलिया के संस्थापक एवं कार्यकारी अध्यक्ष स्टीफ केली, गेसे सोनाम, भूटान के रिग्जिन रिगल और मंगोलियाई राजदूत डॉ. उल्जित लुभसानजाव समेत कई विदेशी प्रतिनिधि शामिल हैं।
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लंबे अध्ययन के बाद मिलती है गेसे उपाधि
तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु गेसे सोनाम की मौजूदगी को सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तिब्बती बौद्ध धर्म की गेलुग परंपरा में लंबे अध्ययन के बाद ‘गेसे’ की उपाधि दी जाती है। यह परंपरा ल्हासा के गान्देन, ड्रेपुंग और सेरा मठों से जुड़ी रही है। भारत स्थित तिब्बती धार्मिक केंद्रों के साथ भी इसके संबंध बताए जाते हैं। नेपाल में तिब्बती धार्मिक गतिविधियों को चीन से जुड़े संवेदनशील मुद्दों के संदर्भ में पहले भी देखा जाता रहा है। इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां सम्मेलन में शामिल प्रतिनिधियों और उनकी गतिविधियों पर विशेष नजर रख रही हैं।
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मंगोलियाई राजदूत की मौजूदगी भी चर्चा में
मंगलवार के सत्र में डॉ. उल्जित लुभसानजाव मुख्य वक्ता रहे। उन्होंने मंगोलिया में तिब्बती बौद्ध धर्म की गेलुग परंपरा और दलाई लामा के प्रभाव से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया। वर्ष 2023 में दलाई लामा द्वारा आठ वर्षीय मंगोलियाई बालक को 10वें जेब्त्सुन्दाम्बा खुतुक्तु के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था।
लुंबिनी में पहले भी सामने आई संवेदनशीलता
नेपाल में तिब्बती गतिविधियों से जुड़े आयोजनों को लेकर चीन की चिंता पहले भी सामने आती रही है। वर्ष 2024 में लुंबिनी में प्रस्तावित नौवें नानहाई बौद्ध सम्मेलन के दौरान चीन समर्थित 11वें पंचेन लामा ग्याल्त्सेन नोर्बू की प्रस्तावित यात्रा चर्चा में रही थी। बाद में यात्रा नहीं हो सकी। 6 जुलाई 2026 को काठमांडो के नागार्जुन स्थित नाम्ग्याल गुम्बा में दलाई लामा का 91वां जन्मदिन मनाए जाने के दौरान कई देशों के राजनयिकों की मौजूदगी भी चर्चा में रही थी। इसके बाद चीनी पक्ष द्वारा नेपाल के विदेश मंत्रालय से जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई थी।
आयोजक बोले- शांति और विकास पर केंद्रित है कार्यक्रम
आयोजक वासुदेव गौतम ने कार्यक्रम को तिब्बती गतिविधियों से जोड़ने से इन्कार किया है। उनका कहना है कि सम्मेलन शांति, जलवायु न्याय, सतत विकास और पर्यटन जैसे विषयों पर केंद्रित है। आयोजकों के अनुसार, लुंबिनी में यह कार्यक्रम दक्षिण एशिया में पहली बार हो रहा है। इससे पहले इसका आयोजन दक्षिण अफ्रीका और स्पेन के बार्सिलोना में किया गया था।