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अब एफआईआर कराने वालों से लिया जाएगा फीडबैक
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अब एफआईआर कराने वालों से लिया जाएगा फीडबैक
पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए एडीजी ने शुरू की कवायद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पुलिसकर्मी अब एफआईआर के बाद कार्रवाई में गड़बड़ी नहीं करेंगे। क्योंकि केस दर्ज कराने वालों से फीडबैक लिया जाएगा। पूछा जाएगा कार्रवाई से संतुष्ट हैं या नहीं। यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हुआ तो पुलिस को दोबारा कार्रवाई करनी पड़ेगी। एडीजी गोरखपुर ने इस संबंध में दिशानिर्देश दिए हैं।
जनता में पुलिस की छवि बेहतर बनाने के प्रयास चल रहे हैं। थानों पर आने वालों मामलों में सही कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जा रही है। अक्सर फरियादियों की शिकायत रहती है कि तहरीर के मुताबिक पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया है। धारा में बदलाव कर केस को कमजोर कर दिया गया। यह फिर काम चलाऊ कार्रवाई कर कोरम पूरा कर दिया।
अब ऐसी शिकायतों पर विराम लगने वाला है। क्योंकि एफआईआर और एनसीआर दर्ज कराने वालों से अधिकारी सीधे बात करेंगे। उनसे फीडबैक लेंगे। यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं है तो संबंधित थानेदार से वार्ता की जाएगी। साथ ही कार्रवाई करशिकायतकर्ता को संतुष्ट किया जाएगा। एडीजी जोन गोरखपुर अखिल कुमार का मानना है कि इस प्रयोग से पुलिस के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ेगा। फीडबैक लेने से जवाबदेही के डर से थानों पर कार्रवाई में गड़बड़ी और लापरवाही नहीं होगी। इस संबंध में एएसपी सुरेश चंद रावत ने बताया कि शिकायतकर्ता से फीडबैक लेने का आदेश हुआ है। इस संबंध में थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं।
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इन मामलों में की जाएगी तहकीकात
आईजीआरएस, एफआईआर, एनसीआर, डायल-112 में पीड़ित की शिकायत पर पुलिस टीम पहुंची, कार्रवाई कैसी रही, कार्रवाई से संतुष्ट हैं अथवा नहीं के संबंध में फीडबैक लिया जाएगा।
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पुलिस की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए एडीजी ने शुरू की कवायद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पुलिसकर्मी अब एफआईआर के बाद कार्रवाई में गड़बड़ी नहीं करेंगे। क्योंकि केस दर्ज कराने वालों से फीडबैक लिया जाएगा। पूछा जाएगा कार्रवाई से संतुष्ट हैं या नहीं। यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हुआ तो पुलिस को दोबारा कार्रवाई करनी पड़ेगी। एडीजी गोरखपुर ने इस संबंध में दिशानिर्देश दिए हैं।
जनता में पुलिस की छवि बेहतर बनाने के प्रयास चल रहे हैं। थानों पर आने वालों मामलों में सही कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जा रही है। अक्सर फरियादियों की शिकायत रहती है कि तहरीर के मुताबिक पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया है। धारा में बदलाव कर केस को कमजोर कर दिया गया। यह फिर काम चलाऊ कार्रवाई कर कोरम पूरा कर दिया।
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अब ऐसी शिकायतों पर विराम लगने वाला है। क्योंकि एफआईआर और एनसीआर दर्ज कराने वालों से अधिकारी सीधे बात करेंगे। उनसे फीडबैक लेंगे। यदि शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं है तो संबंधित थानेदार से वार्ता की जाएगी। साथ ही कार्रवाई करशिकायतकर्ता को संतुष्ट किया जाएगा। एडीजी जोन गोरखपुर अखिल कुमार का मानना है कि इस प्रयोग से पुलिस के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ेगा। फीडबैक लेने से जवाबदेही के डर से थानों पर कार्रवाई में गड़बड़ी और लापरवाही नहीं होगी। इस संबंध में एएसपी सुरेश चंद रावत ने बताया कि शिकायतकर्ता से फीडबैक लेने का आदेश हुआ है। इस संबंध में थानेदारों को निर्देश दिए गए हैं।
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इन मामलों में की जाएगी तहकीकात
आईजीआरएस, एफआईआर, एनसीआर, डायल-112 में पीड़ित की शिकायत पर पुलिस टीम पहुंची, कार्रवाई कैसी रही, कार्रवाई से संतुष्ट हैं अथवा नहीं के संबंध में फीडबैक लिया जाएगा।