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मिनी सचिवालय बन गए ‘पशुशाला’
अमर उजाला/सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 10 Jan 2016 11:45 PM IST
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गांव-गांव में मिनी सचिवालय बनवाए थे। लेकिन लापरवाही के चलते ये भवन
निष्प्रयोज्य साबित हो रहे हैं। इनका प्रयोग लोग भैंस बांधने, उपले, गोबर व
भूसा रखने के लिए हो रहा है। ब्लॉक के कई गांवों में यही हाल है।
विकास खंड खेसरहा के ग्राम पंचायत विशुनपुरवा, कोहडी व बेलवालगनुहि में बने मिनी सचिवालय इसकी नजीर हैं। क्षेत्र के रामकुमार, दिलीप, रमेश, अब्दुल्ला, ऊजागिर, महेश कुमार का कहना है कि उनकी ग्राम पंचायतों में जब मिनी सचिवालय का निर्माण हुआ तब उन्हें सरकारी योजनाओं को गांव में मिलने की सहूलियत की आस जगी थी।
उम्मीद थी कि अब उन्हें परिवार रजिस्टर की नकल सहित ग्राम पंचायत सचिव स्तर के काम के लिए ब्लाक व सचिव का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, लेकिन मिनी सचिवालय के निर्माण के बाद एक दिन भी ग्राम पंचायत सचिव उसमें नहीं बैठे और न ही कभी ग्राम पंचायत की बैठक हुई।
देखते ही देखते यह भवन खंडहर में तब्दील हो गए हैं। कई जगह इनमें पशुशाला खुल गई है। इस संबंध में एडीओ पंचायत खेसरहा सच्चितानंद शुक्ला का कहना था कि जो भी मिनी सचिवालय जर्जर हैं, उनकी मरम्मत कराकर उपयोग में लिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शीघ्र आरंभ होगी।
विकास खंड खेसरहा के ग्राम पंचायत विशुनपुरवा, कोहडी व बेलवालगनुहि में बने मिनी सचिवालय इसकी नजीर हैं। क्षेत्र के रामकुमार, दिलीप, रमेश, अब्दुल्ला, ऊजागिर, महेश कुमार का कहना है कि उनकी ग्राम पंचायतों में जब मिनी सचिवालय का निर्माण हुआ तब उन्हें सरकारी योजनाओं को गांव में मिलने की सहूलियत की आस जगी थी।
उम्मीद थी कि अब उन्हें परिवार रजिस्टर की नकल सहित ग्राम पंचायत सचिव स्तर के काम के लिए ब्लाक व सचिव का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, लेकिन मिनी सचिवालय के निर्माण के बाद एक दिन भी ग्राम पंचायत सचिव उसमें नहीं बैठे और न ही कभी ग्राम पंचायत की बैठक हुई।
देखते ही देखते यह भवन खंडहर में तब्दील हो गए हैं। कई जगह इनमें पशुशाला खुल गई है। इस संबंध में एडीओ पंचायत खेसरहा सच्चितानंद शुक्ला का कहना था कि जो भी मिनी सचिवालय जर्जर हैं, उनकी मरम्मत कराकर उपयोग में लिया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शीघ्र आरंभ होगी।