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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   In case of a snakebite, do not resort to traditional rituals or faith healing; rush to the hospital immediately.

Siddharthnagar News: सांप डसने पर झाड़-फूंक नहीं, तुरंत अस्पताल पहुंचें

Sat, 11 Jul 2026 12:56 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 11 Jul 2026 12:56 AM IST
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In case of a snakebite, do not resort to traditional rituals or faith healing; rush to the hospital immediately.
सिद्धार्थनगर। अगर सांप काट रहा है तो झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने के बजाय तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं और एंटी वेनम इंजेक्शन लगवाएं। इसमें शिथिलता पर जान भी जा सकती है। इन दिनों सर्पदंश के मामले बढ़े हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी वार्ड में हर 24 घंटे में तीन-चार सर्पदंश के मामले में पहुंच रहे हैं, जिनकी स्थिति के हिसाब से डॉक्टर इंजेक्शन दिया जा रहा है। जिम्मेदारों के मुताबिक मेडिकल कॉलेज और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर इंजेक्शन उपलब्ध है। ऐसे में वहां जाने के बाद तत्काल इलाज होगा।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज की बात करें तो इमरजेंसी में सर्पदंश के मामले में बढ़ने लगे हैं। हर 24 घंटे में तीन से चार मामले सांप के डसने के आ रहे हैं। इसमें अधिकांश इलाज यहीं पर हो जाता है। वहीं, जिनकी स्थिति गंभीर होती है, उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया जाता है। इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों ने बताया कि आज भी गांव में सांप के काटने के मामले में पहले झाड़ फूंक करने में उलझ जाते हैं। जब हालात खराब होती है तो अस्पताल पहुंचते हैं। अधिकांश केस में पूछताछ में यह बात सामने आती है। यह लापरवाही जान पर भारी पड़ सकती है। इलाज में जितनी देरी होती है विष उतना ही तेज फैलता है। ऐसे में बिना देरी किए ही अस्पताल पहुंचाना चाहिए। वहीं, इंजेक्शन की बात करें तो मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर सीएचसी और मेडिकल कॉलेज पर इंजेक्शन की उपलब्धता बढ़ा दी गई है, जिससे बिना दौड़भाग के नजदीक के अस्पताल पर लोगों को लग सके।
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बारिश में क्यों बढ़ते हैं सर्पदंश के मामले
बारिश के मौसम में बिलों में पानी भरने से सांप सुरक्षित जगह की तलाश में घरों, खेतों और घास-फूस वाले स्थानों की ओर निकल आते हैं। धान की रोपाई, नर्सरी और खेतों में काम करने के दौरान किसानों के सर्पदंश की आशंका बढ़ जाती है। अंधेरे में बिना रोशनी चलना या नंगे पैर खेतों में जाना जोखिम भरा हो सकता है।
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बचाव के उपाय
खेतों में जाते समय जूते, गमबूट और हाथों में दस्ताने का इस्तेमाल करें।
रात में टॉर्च या मोबाइल की रोशनी के बिना बाहर न निकलें।
घर के आसपास घास-फूस, लकड़ी, कबाड़ और कूड़े के ढेर को साफ रखें।
सोने से पहले बिस्तर, कपड़े और जूतों की जांच कर लें।
सांप दिखने पर उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
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सर्पदंश होने पर तुरंत करें ये काम
पीड़ित को शांत रखें और कम से कम हिलाएं-डुलाएं, ताकि जहर तेजी से न फैले।
जिस अंग पर सांप ने डसा है तो उसे स्थिर रखें और जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।
काटे गए स्थान पर चीरा लगाना, जहर चूसना, रस्सी से कसकर बांधना या
झाड़-फूंक में समय गंवाना नुकसानदायक हो सकता है।
सांप की पहचान के लिए उसे पकड़ने का प्रयास न करें।
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अस्पताल ही है सही इलाज
सर्पदंश के गंभीर मामलों में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन ही
प्रभावी उपचार है। इसलिए सर्पदंश के बाद समय पर सामुदायिक स्वास्थ्य
केंद्र या जिला अस्पताल पहुंचना जीवन बचा सकता है।
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बोले जिम्मेदार
एंटी स्नेक वेनम मेडिकल कॉलेज के साथ ही हर सीएचसी पर उपलब्ध है। जरूरत के हिसाब से और डिमांड भिजवाई भी जाती है। इंजेक्शन की कोई कमी नहीं है। अगर सांप डसने की जानकारी होती है तो झाड़-फूंक करने के बजाय तत्काल नजदीक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे जहां तत्काल इलाज शुरू हो जाएगा।
- डॉ. प्रमोद कुमार, सीएमओ
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