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दलाल चला रहे अस्पताल, मरीज बेहाल
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 24 May 2017 10:39 PM IST
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पुनमासी।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल में दलालों की सक्रियता पर अंकुश लगाना आसान नहीं है। सरकारी तंत्र के पंगु होने से हावी हुए दलालों ने अस्पताल को पूरी तरह चंगुल में ले रखा है। अस्पताल में दाखिल से लेकर डिस्चार्ज तक मरीज के साथ साए के रूप में रहने वाले दलाल बेहतर दवा-उपचार के नाम पर शोषण कर रहे हैं। बाहर की दवाएं उपलब्ध कराते हैं तो जांच के लिए भी मरीज को बाहरी व्यवस्था के हवाले करा देते हैं। लंबे समय से यह खेल सरेआम होता आ रहा है, मगर जिम्मेदार मौन हैं। लिहाजा उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होना लाजिमी है।
सौ बेड वाले जिला अस्पताल में कहने के लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन जरूरी संसाधनों के अभाव में उसका लाभ बहुतेरे को नहीं मिल पा रहा। अस्पताल में अक्सर इंट्राकैथ, इंजेक्शन, मलहम सहित जरूरी दवाएं नदारद रहती हैं। जांच की सुविधा भी सीमित अवधि तक ही मिलती है। दलालों को इसी का लाभ मिल रहा है। मेडिकल स्टोर व निजी पैथॉलाजी संचालकों से मिलीभगत के चलते दलाल मरीज को चंगुल में फंसाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। दवाओं के तय मूल्य से कई गुना अधिक दाम वसूला जा रहा है। अस्पताल में सक्रिय दलालों के चेहरे नए नहीं हैं। इन्हें अक्सर डॉक्टर कक्ष व पर्ची काउंटर के इर्द-गिर्द घूमते देखा जा सकता है।
पर्ची की झीना-झपटी में नोक-झोंक व मारपीट आम बात है। अस्पताल प्रशासन भी भली-भांति इसे जान रहा है। कई बार लिखित शिकायत तक प्रशासन को भेज चुका है, लेकिन पकड़े जाने पर केस दर्ज कराने से कतरा रहा है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि दलालों के जरिए कहीं न कहीं अस्पताल प्रबंधन के भी हित पूरे हो रहे हैं। बहरहाल, इन सवालों पर सीएमएस डॉ.रोचस्मति पांडेय का कहना था कि अस्पताल में दलालों पर पूरी तरह अंकुश है। पुलिस को लगातार कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजा जा रहा है। सुई-दवा के नाम पर वसूली की शिकायत गलत है। अस्पताल में सारी दवाएं उपलब्ध हैं, ऐसे में बाहर से दवा का सवाल ही नहीं है।
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सौ बेड वाले जिला अस्पताल में कहने के लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन जरूरी संसाधनों के अभाव में उसका लाभ बहुतेरे को नहीं मिल पा रहा। अस्पताल में अक्सर इंट्राकैथ, इंजेक्शन, मलहम सहित जरूरी दवाएं नदारद रहती हैं। जांच की सुविधा भी सीमित अवधि तक ही मिलती है। दलालों को इसी का लाभ मिल रहा है। मेडिकल स्टोर व निजी पैथॉलाजी संचालकों से मिलीभगत के चलते दलाल मरीज को चंगुल में फंसाकर मोटी कमाई कर रहे हैं। दवाओं के तय मूल्य से कई गुना अधिक दाम वसूला जा रहा है। अस्पताल में सक्रिय दलालों के चेहरे नए नहीं हैं। इन्हें अक्सर डॉक्टर कक्ष व पर्ची काउंटर के इर्द-गिर्द घूमते देखा जा सकता है।
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पर्ची की झीना-झपटी में नोक-झोंक व मारपीट आम बात है। अस्पताल प्रशासन भी भली-भांति इसे जान रहा है। कई बार लिखित शिकायत तक प्रशासन को भेज चुका है, लेकिन पकड़े जाने पर केस दर्ज कराने से कतरा रहा है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि दलालों के जरिए कहीं न कहीं अस्पताल प्रबंधन के भी हित पूरे हो रहे हैं। बहरहाल, इन सवालों पर सीएमएस डॉ.रोचस्मति पांडेय का कहना था कि अस्पताल में दलालों पर पूरी तरह अंकुश है। पुलिस को लगातार कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजा जा रहा है। सुई-दवा के नाम पर वसूली की शिकायत गलत है। अस्पताल में सारी दवाएं उपलब्ध हैं, ऐसे में बाहर से दवा का सवाल ही नहीं है।
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