अमरगढ़ की वीरगाथा: शहीदों के खून से लाल हो गया था नदी का पानी, आज भी मौजूद है अंग्रेजों की कब्र
अमरगढ़ शहीद स्थल जहां 26 नवंबर 1858 को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम डुमरियागंज के पूर्वजों की ओर से लड़ा गया था। अंग्रेज सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस संग्राम में 80 भारतीयों को गोलियों से शहीद कर दिया गया था। सैकड़ों लोगों को राप्ती नदी में डुबो दिया गया था।
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डुमरियागंज तहसील के पास अमरगढ़ शहीद स्थल आजादी के संघर्षों को बयां कर रहा है। इतिहास गवाही देता है कि अमरगढ़ में आजादी का खूनी खेल हुआ था। आजादी के दीवानों ने नदी में छलांग लगाई तो अंग्रेजों ने तब तक गोलियां चलाई, जब तक पानी सिर के बाल दिखते रहे और नदी का पानी खून से लाल हो गया था। इस संघर्ष की कहानी जानने के लिए पढ़िए रिपोर्ट....
अमरगढ़ शहीद स्थल पर मौजूद अंग्रेजों के जमाने का बनाया गया प्राचीन गेट और अंग्रेजों की कब्र 26 नवंबर 1858 की स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में शहीद हुए लोगों की वीरता को प्रमाणित कर रहे हैं। साथ ही सामने बह रहा तालाब राप्ती नदी से सटा हुआ है तालाब जिसमें अंग्रेजों ने बेकसूर भारतीयों को गोली मारकर पानी में फेंक दिया गया था।
वह तालाब भी अपने इतिहास को बयां कर रहा है। साथ ही अंग्रेजों की बर्बरता को प्रमाणित कर रहा हैl शहीदों की याद में अमरगढ़ शहीद स्थल पर अमरगढ़ शहीद स्थल पर बनाया गया गेट और निर्मित हो रहे पार्क भी इस स्थल की ऐतिहासिकता को बयां कर रहे हैं।
अमरगढ़ का इतिहास
अमरगढ़ शहीद स्थल जहां 26 नवंबर 1858 को प्रथम स्वतंत्रता संग्राम डुमरियागंज के पूर्वजों की ओर से लड़ा गया था। अंग्रेज सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस संग्राम में 80 भारतीयों को गोलियों से शहीद कर दिया गया था। सैकड़ों लोगों को राप्ती नदी में डुबो दिया गया था। आक्रोशित लोगों ने अंग्रेज अधिकारी गिल्फोर्ड को मार डाला था। इसके प्रमाण कैलिफोर्निया और ब्रिटिश गजेटियर में भी अंकित हैं। मौके पर अंग्रेज अधिकारी की कब्र और शहीद गेट बना है। इस क्रांतिकारी घटना के मुख्य प्रेरणास्रोत नाना साहब के भाई बालाराव व मोहम्मद नवाज थे।
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अमरगढ़ के वीर सपूतों को उनकी शहादत का सिला आज तक नहीं मिल पाया है। हालांकि, अमरगढ़ के शहीदों को उनकी पहचान और सम्मान दिलाने के लिए पिछले 3 वर्षों से पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के प्रयास से शहीद स्मारक बनवाने के साथ ही अमरगढ़ शहीद स्थल पर तीन दिवसीय अमरगढ़ महोत्सव और शहीद सम्मान यात्रा निकालकर अमरगढ़ की वीर गाथा को लोगों को बताने के साथ ही इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया जा रहा हैlअमरगढ़ शहीद स्थल के निकट तालाब जहां पर निर्दोष भारतीयों को अंग्रेजों ने शहीद करके उनकी लाश पानी में फेंक दी थी।
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शहीद स्थल पर निर्मित होना है भव्य स्मारक
1858 के स्वतंत्रता संग्राम में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूतों की याद में पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह के प्रयास से डुमरियागंज परिवहन बस स्टैंड से माली मैंनहा को जोड़ने वाली दो लेन की सड़क बनेगी, जो शहीद स्थल से होकर गुजरेगी। शहीद स्थल पर सजीव पत्थरों पर चित्रकारी एवं प्रतिमाओं की शक्ल में उकेरा जाएगा।
एक प्लेनेटोरियम बनेगा, जहां नक्षत्रशाला होगी और शहीदों को नमन करने के साथ खगोल दृश्य दिखाए जाएंगे। 101 फीट ऊंचाई पर तिरंगा झंडा, मशाल तथा शहीदों की याद में विशाल स्मारक बनेगा। योग केंद्र, जिम, बच्चों के लिए पार्क, झूला आदि बनेगा। विभिन्न जगह पांच गेट बनेंगे जो शहीदों की याद दिलाएंगे। जिसमें कई जगह गेट का निर्माण भी हो चुका है।