एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू इन दिनों देश के कई राज्यों में स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ाता देखा जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग सर्दी-खांसी, तेज बुखार और सांस की समस्याओं के साथ अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो ज्यादातर लोगों में संक्रमण के मामले काफी हल्के लक्षणों वाले होते हैं, पर कुछ लोगों जैसे बच्चे-बुजुर्गों और पहले से क्रॉनिक बीमारियों के शिकार लोगों में ये गंभीर रोग का कारण भी बन सकता है। कई स्थानों से स्वाइन फ्लू से संक्रमित लोगों में मौत भी रिपोर्ट की जा रही है।
स्वाइन फ्लू: कहीं आपका बच्चा भी तो नहीं है खतरे में, कौन से लक्षण हो सकते हैं चेतावनी का संकेत?
एच1एन1 सहित इन्फ्लुएंजा बच्चों में तेजी से फैल सकता है, खासकर स्कूल जैसी भीड़ वाली जगहों पर इसका खतरा अधिक होता है। बच्चों में सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक सुस्ती या ठीक होने के बाद लक्षण लौटना खतरे का संकेत हो सकता है।
बच्चों में स्वाइन फ्लू का खतरा
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि ये बीमारी किस तरह से गर्भवती महिलाओं के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में भी स्वाइन फ्लू के खतरे को लेकर सावधानी बहुत जरूरी है। स्कूल जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर बच्चे लंबे समय तक एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं। स्कूल बस, खेल का मैदान और क्लासरूम की गतिविधियां संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकती हैं।
संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बोलने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के जरिए एच1एन1 फैलने का खतरा अधिक होता है, यही वजह है कि बच्चे को हुआ संक्रमण घर के दूसरे सदस्यों तक भी पहुंच सकता है।
बच्चों के मामले में एक और बात महत्वपूर्ण है। बच्चे खुद अपनी परेशानी ठीक से बता भी नहीं पाते, इसलिए माता-पिता को उनकी सेहत में आए बदलाव और उन्हें संक्रमण के खतरे से बचाने के लिए लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।
स्कूल जाने वाले बच्चे को लेकर डॉक्टरों ने किया अलर्ट
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, एच1एन1 सहित इन्फ्लुएंजा वायरस आसानी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं। डॉक्टर कहते हैं, चूंकि स्कूल में बच्चे कई घंटों तक आस-पास रहते हैं और इनमें से अगर कोई एक भी बच्चा संक्रमित है तो उसके खांसने-छींकने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों के कारण दूसरे बच्चे भी संक्रमित हो सकते हैं।
- इसके अलावा बच्चे अक्सर आंख, नाक और मुंह को हाथ लगाते हैं, जिससे भी संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
- बच्चे संक्रमण से बचाव को लेकर भी ज्यादा अलर्ट नहीं होते हैं ऐसे में कक्षा में एक बच्चा भी कई बच्चों में संक्रमण फैलाने वाल हो सकता है।
डॉक्टर कहते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि स्कूल जाना बंद कर देना चाहिए। हालांकि इस दिनों में बच्चे को हाथ साफ रखने, खांसते-छींकते समय मुंह ढकने संक्रमण से बचाव की आदतें जरूर सिखाई जानी चाहिए।
कौन से लक्षण हो सकते हैं खतरे की घंटी?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फ्लू वायरस के कारण बुखार और खांसी होना आम है, लेकिन कुछ संकेत बताते हैं कि बच्चे को तुरंत डॉक्टरी मदद की जरूरत हो सकती है।
- अगर बच्चा तेजी से सांस ले रहा है, सांस लेने में परेशानी हो रही है, पानी कम पी रहा है या पेशाब बहुत कम हो गया है, तो इसे गंभीर संकेत माना जाना चाहिए।
- गंभीर संक्रमण की स्थिति में शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है जिसके कारण बच्चा असामान्य रूप से सुस्त महसूस कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चे को अगर तेज बुखार के साथ सांस लेने में दिक्कत हो रही है या सेहत में कुछ भी असामान्य लग रहा है तो बिना देर किए डॉक्टर के पास ले जाएं। बच्चों को खुद से कोई दवा या घरेलू उपचार न दें।
माता-पिता क्या सावधानियां बरतें?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन दिनों बच्चों को फ्लू से बचाए रखने के लिए सभी माता-पिता को अलर्ट रहना चाहिए।
- अगर बच्चे को बुखार, खांसी या दूसरे फ्लू जैसे लक्षण हैं, तो उसे स्कूल भेजना ठीक नहीं है। बच्चे को पूरा आराम करने दें, इससे दूसरे बच्चों में संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है।
- घर पर बच्चे को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ दें, आराम कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा दें।
- खुद से एंटीबायोटिक शुरू न करें, क्योंकि फ्लू वायरस से होने वाला संक्रमण है और एंटीबायोटिक वायरस पर काम नहीं करते।
बच्चे को नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोने की आदत डालें। उसे आंख, नाक और मुंह को गंदे हाथों से छूने से बचने के लिए भी समझाएं। खांसते-छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकने की जानकारी दें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) मौसमी फ्लू और उसकी गंभीर जटिलताओं से बचाने के लिए सभी लोगों को सालाना फ्लू की वैक्सीन लगवाने की सलाह देता है। डॉक्टर की सलाह पर बच्चे को फ्लू का टीका लगवाएं। ये उसे गंभीर बीमारी की चपेट में आने से बचाने में मददगार हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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