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औषधीय वृक्षों के अस्तित्व पर संकट

Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
Siddhartha nagar
Siddhartha nagar Updated Wed, 01 Aug 2012 12:00 PM IST
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सिकरी। किसी समय में औषधीय गुणों से भरपूर पौधों की संख्या क्षेत्र में काफी अधिक थी। वृक्षों की अंधाधुंध कटान के कारण ऐसे वृक्षों की संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है।
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क्षेत्र में पहले नीम के वृक्ष काफी तादाद में थे। पुराने लोगों का मानना है कि नीम का पूरा पेड़ औषधियों से भरा पड़ा है। नीम की पत्ती, बीज और छाल सभी का प्रयोग औषधियों के रूप में होता था। लोग अपने घर के आस-पास इसका पौधा अवश्य लगाते थे। अंधाधुंध कटान से इनकी संख्या लगातार कम हो रही है। क्षेत्र में गिने-चुने घरों के सामने ही अब नीम का पौधा दिखता है। इसी प्रकार आंवले का वृक्ष भी अब कम होता जा रहा है। आंवला फल तथा चूर्ण दोनों ही पेट की बीमारियों के लिए औषधि माना गया है। बेल का वृक्ष आस्था से भी जुड़ा रहा है। बेल के पत्तों से आराधना करने पर भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, ऐसी मान्यता लंबे समय से चली आ रही है। अब बेल के वृक्ष भी नहीं दिखाई देते। बेल पेट के लिए काफी लाभकारी माना गया है। इसी तरह पीपल का वृक्ष भी महत्वपूर्ण रहा है। पीपल के वृक्षों की कमी भी अब क्षेत्र में स्पष्ट दिखने लगी है। क्षेत्र के रामनरायण यादव, उग्रसेन प्रसाद, दीनानाथ आदि का कहना है कि पुराने लोगों को इन औषधीय वृक्षों के गुणों की जानकारी है, लेकिन नई पीढ़ी इससे अनजान है। इन औषधीय वृक्षों को बचाने के लिए जागरूकता की जरूरत है।
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