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दूषित पानी पीने को मजबूर हैं बाढ़ पीड़ित
Updated Thu, 31 Aug 2017 10:20 PM IST
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सिद्धार्थनगर। बाढ़ के पानी से किसी तरह से जिंदगी बची तो अब हैंडपंपों से निकल रहा जहरीला पानी बाढ़ग़्रस्त इलाके में लोगों के जान के लिए खतरा बन गया है। बाढ़ प्रभावित लोग जहरीले पानी का सेवन करने को विवश हैं। इससे वह तेजी से बीमार पड़ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सवा चार लाख हैंडपंप देशी हैं, जिसका पानी पहले ही न पीने की सलाह दी जा चुकी है। प्यास बुझाने का कोई दूसरा इंतजाम न होने से बाढ़ग्रस्त गांवों के लोग अब उसी हैंडपंप का पानी विवश होकर पी रहे हैं। नतीजा जलजनित बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। उधर, प्रशासन हैंडपंपों में क्लोरीन की गोली व ब्लीचिंग पाउडर डालने का निर्देश देकर अपनी पीठ थपथपा रहा है।
बाढ़ की तबाही से जिले के 671 गांव के लगभग 85 हजार परिवार प्रभावित हुए। 421 गांव पानी से चौतरफा घिर गए थे। सब कुछ पानी में डूब चुका है। अब बाढ़ का खतरा हटा तो पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। पानी में डूबने के कारण हैंडपंप दूषित जल उगलने लगे हैं। हैंडपंप से निकलने के थोड़ी देर बाद पानी पीला पड़ जा रहा है। मगर बेबसी इस कदर है कि लोग उसी जहरीले पानी का सेवन कर रहे हैं, जिसके कारण जलजनित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पानी हर तरफ से लोगों को मार रहा है। कभी बाढ़ की तबाही बनकर सबकुछ छीन लिया और अब पानी पीने पर लोग रोगग्रस्त हो रहे हैं। दूषित पानी का सेवन करने से लोग तेजी से बीमार हो रहे हैं। बावजूद इससे निपटने के लिए प्रशासन कोई ठोक कदम नहीं उठा रहा है। हैंडपंप में क्लोरीन व ब्लीचिंग पाउडर डालने का फरमान तो जारी कर दिया गया है। मगर अभी भी बाढ़ग्रस्त इलाकों में स्थिति जस -की -तस बनी हुई।
421 गांवों के 6958 हैंडपंपों में क्लोरीन की गोली डालने का लक्ष्य
सिद्धार्थनगर। प्रशासन ने 421 गांव को जलमग्न माना है और इनके हैंडपंपों का पानी दूषित बताया गया है। विभाग के सर्वे के मुताबिक 6958 हैंडपंपों में क्लोरीन की गोली व ब्लीचिंग पाउडर डालना है। इसकी जिम्मेदारी जलनिगम को दी गई है। तीन दिनों के भीतर जलनिगम ने 912 हैंडपंप को खोलकर उसमें क्लोरीन की गोली व ब्लीचिंग पाउडर डाला है। शेष प्रक्रिया अभी चल रही है। हैंडपंपों में दवा डालने का विभाग का जो औसत है, इस हिसाब से लक्ष्य को पूरा करने में लगभग 25 दिन लग जाएंगे। तब तक दूषित पानी पीकर कितने लोग बीमार होंगे, कोई अंदाजा भी नहीं।
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बोले जिम्मेदार---
बाढग़्रस्त 421 गांव के 6958 हैंडपंप में क्लोरीन की गोली आदि डालने और उसके ठीक से संचालन की जिम्मेदारी है। तीन दिन में 912 हैंडपंपों में दवा डाली जा चुकी है। रही बात देशी हैंडपंप की तो उसका पानी पहले से दूषित घोषित किया जा चुका है। लोगों को ऐसे हैंडपंपों के पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। -पवन कुमार यादव, एक्सईएन जलनिगम।
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बाढ़ की तबाही से जिले के 671 गांव के लगभग 85 हजार परिवार प्रभावित हुए। 421 गांव पानी से चौतरफा घिर गए थे। सब कुछ पानी में डूब चुका है। अब बाढ़ का खतरा हटा तो पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। पानी में डूबने के कारण हैंडपंप दूषित जल उगलने लगे हैं। हैंडपंप से निकलने के थोड़ी देर बाद पानी पीला पड़ जा रहा है। मगर बेबसी इस कदर है कि लोग उसी जहरीले पानी का सेवन कर रहे हैं, जिसके कारण जलजनित बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पानी हर तरफ से लोगों को मार रहा है। कभी बाढ़ की तबाही बनकर सबकुछ छीन लिया और अब पानी पीने पर लोग रोगग्रस्त हो रहे हैं। दूषित पानी का सेवन करने से लोग तेजी से बीमार हो रहे हैं। बावजूद इससे निपटने के लिए प्रशासन कोई ठोक कदम नहीं उठा रहा है। हैंडपंप में क्लोरीन व ब्लीचिंग पाउडर डालने का फरमान तो जारी कर दिया गया है। मगर अभी भी बाढ़ग्रस्त इलाकों में स्थिति जस -की -तस बनी हुई।
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421 गांवों के 6958 हैंडपंपों में क्लोरीन की गोली डालने का लक्ष्य
सिद्धार्थनगर। प्रशासन ने 421 गांव को जलमग्न माना है और इनके हैंडपंपों का पानी दूषित बताया गया है। विभाग के सर्वे के मुताबिक 6958 हैंडपंपों में क्लोरीन की गोली व ब्लीचिंग पाउडर डालना है। इसकी जिम्मेदारी जलनिगम को दी गई है। तीन दिनों के भीतर जलनिगम ने 912 हैंडपंप को खोलकर उसमें क्लोरीन की गोली व ब्लीचिंग पाउडर डाला है। शेष प्रक्रिया अभी चल रही है। हैंडपंपों में दवा डालने का विभाग का जो औसत है, इस हिसाब से लक्ष्य को पूरा करने में लगभग 25 दिन लग जाएंगे। तब तक दूषित पानी पीकर कितने लोग बीमार होंगे, कोई अंदाजा भी नहीं।
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बोले जिम्मेदार---
बाढग़्रस्त 421 गांव के 6958 हैंडपंप में क्लोरीन की गोली आदि डालने और उसके ठीक से संचालन की जिम्मेदारी है। तीन दिन में 912 हैंडपंपों में दवा डाली जा चुकी है। रही बात देशी हैंडपंप की तो उसका पानी पहले से दूषित घोषित किया जा चुका है। लोगों को ऐसे हैंडपंपों के पानी का सेवन नहीं करना चाहिए। -पवन कुमार यादव, एक्सईएन जलनिगम।