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शिक्षा मित्रों के समर्थन में आया प्रधान संघ
Updated Fri, 28 Jul 2017 10:42 PM IST
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सिद्धार्थनगर। सेवा नियमावली में संशोधन कर सहायक शिक्षक के रूप में समायोजन की मांग कर रहे शिक्षा मित्रों का आंदोलन तीसरे दिन भी जारी रहा। पूरे जिले के शिक्षामित्र शुक्रवार को बीएसए कार्यालय पर डटे रहे। धरना देकर मांगों के समर्थन में नारे लगाए। शुक्रवार को प्रधान संघ ने भी शिक्षा मित्रों के आंदोलन को समर्थन का ऐलान किया। सदर विधायक ने धरनास्थल पहुंचकर उनकी आवाज को शासन तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
धरने में वक्ताओं ने कहा कि वर्षों तक प्राथमिक स्कूलों में अध्यापन के बाद शिक्षामित्रों को बाहर किया जाना न्यायोचित नहीं है। प्रदेश के 1.72 लाख परिवारों के भविष्य को देखते हुए सरकार जल्द फैसला करे। अभी शिक्षा मित्र शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर शिक्षामित्रों का समायोजन दोबारा नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश के शिक्षामित्र उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे। धरनास्थल पर पहुंचे विधायक श्यामधनी राही ने शिक्षा मित्रों से सहानुभूति जताते हुए कहा प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में शिक्षा मित्रों ने अहम भूमिका निभाई है। इनका समायोजन रद्द होना चिंताजनक है। शिक्षामित्रों की मांग को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। नायब तहसीलदार अश्वनी कुमार भी मौके पर पहुंचे और शिक्षामित्रों का ज्ञापन लिया। इसे शासन तक भेजने की बात कही। धरना-प्रदर्शन में ग्राम प्रधान संगठन के मंडल अध्यक्ष ताकिब रिजवी, जिलाध्यक्ष डॉ. पवन मिश्र, श्यामनारायण मौर्य, जयंत पांडेय, जितेंद्र कुमार, ओंकारनाथ यादव, गणेश शंकर गौड़, हेमंत शुक्ला, श्यामबिहारी चौधरी, इंद्रजीत यादव, यशवंत सिंह, अरुण कुमार, हरीश आर्य, अशोक मिश्र, प्रदीप शर्मा, सत्यभामा मिश्र, श्यामलली सिंह, मो.अकरम, अरुण चतुर्वेदी, दीपनारायण, विंध्यवासिनी, मधुबाला, प्रेमशीला, विमला देवी, अर्चना पांडेय, पूनम यादव, साधना श्रीवास्तव, सरिता, अन्नपूर्णा और अभिषेक श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
बोले शिक्षा मित्र, फैसले से बिखर जाएगा परिवार
समायोजन रद्द होने से शिक्षा मित्र व्यथित हैं। उनका कहना है कि नौकरी ही उनके भरण-पोषण का जरिया है। फैसले से रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पूरा परिवार बिखर जाएगा। माया यादव ने कहा कि 16 वर्षों से प्राथमिक विद्यालय में पढ़ा रही हूं। फैसले के बाद स्थिति विकट हो गई है। हम सब इस उम्र में अब कहां जाएंगे। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, शादी विवाह की जिम्मेदारी हम पर ही निर्भर थी, अब कैसे चलेगा। कृष्णावती गुप्ता ने कहा कि भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में शिक्षामित्रों की लड़ाई मजबूती से लड़ने का वादा किया था। अब वह वादे से दूर भाग रही है। फैसले के चार दिनों बाद भी कोई प्रतिक्रिया न आना चिंताजनक है। यशवंत सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षामित्रों के हित को देखते हुए उचित न्याय करे, जिससे शिक्षामित्रों की रोजी-रोटी चल सके। अनीता पांडेय ने कहा कि कोर्ट के फैसले से आहत हैं। सरकार ने प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शिक्षामित्रों की नियुक्ति की थी। सरकार शिक्षामित्रों के परिवार के लिए समस्या बन गई हैं।
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सांसद ने संसद में उठाया मुद्दा
सिद्धार्थनगर। सांसद जगदंबिका पाल ने शिक्षा मित्रों का मुद्दा सदन में उठाया है। शून्य प्रहर में चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश के 1.72 लाख समायोजन रद्द कर दिया है। इसके बाद से पूरे प्रदेश में शिक्षा मित्र आंदोलनरत हैं। संतकबीरनगर में बीएसए दफ्तर में आगजनी, बस्ती में तालाबंदी सहित हिंसक आंदोलन हो रहे हैं। मथुरा, बदायूं में एक-एक शिक्षा मित्र ने जान दे दी। सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर सहित अन्य जिलों में भी लगातार आंदोलन हो रहा ै। कोर्ट के फैसले से शिक्षा मित्रों के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल किया जाना न्याय संगत होगा।
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धरने में वक्ताओं ने कहा कि वर्षों तक प्राथमिक स्कूलों में अध्यापन के बाद शिक्षामित्रों को बाहर किया जाना न्यायोचित नहीं है। प्रदेश के 1.72 लाख परिवारों के भविष्य को देखते हुए सरकार जल्द फैसला करे। अभी शिक्षा मित्र शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे हैं। अगर शिक्षामित्रों का समायोजन दोबारा नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश के शिक्षामित्र उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे। धरनास्थल पर पहुंचे विधायक श्यामधनी राही ने शिक्षा मित्रों से सहानुभूति जताते हुए कहा प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में शिक्षा मित्रों ने अहम भूमिका निभाई है। इनका समायोजन रद्द होना चिंताजनक है। शिक्षामित्रों की मांग को सरकार तक पहुंचाया जाएगा। नायब तहसीलदार अश्वनी कुमार भी मौके पर पहुंचे और शिक्षामित्रों का ज्ञापन लिया। इसे शासन तक भेजने की बात कही। धरना-प्रदर्शन में ग्राम प्रधान संगठन के मंडल अध्यक्ष ताकिब रिजवी, जिलाध्यक्ष डॉ. पवन मिश्र, श्यामनारायण मौर्य, जयंत पांडेय, जितेंद्र कुमार, ओंकारनाथ यादव, गणेश शंकर गौड़, हेमंत शुक्ला, श्यामबिहारी चौधरी, इंद्रजीत यादव, यशवंत सिंह, अरुण कुमार, हरीश आर्य, अशोक मिश्र, प्रदीप शर्मा, सत्यभामा मिश्र, श्यामलली सिंह, मो.अकरम, अरुण चतुर्वेदी, दीपनारायण, विंध्यवासिनी, मधुबाला, प्रेमशीला, विमला देवी, अर्चना पांडेय, पूनम यादव, साधना श्रीवास्तव, सरिता, अन्नपूर्णा और अभिषेक श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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बोले शिक्षा मित्र, फैसले से बिखर जाएगा परिवार
समायोजन रद्द होने से शिक्षा मित्र व्यथित हैं। उनका कहना है कि नौकरी ही उनके भरण-पोषण का जरिया है। फैसले से रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पूरा परिवार बिखर जाएगा। माया यादव ने कहा कि 16 वर्षों से प्राथमिक विद्यालय में पढ़ा रही हूं। फैसले के बाद स्थिति विकट हो गई है। हम सब इस उम्र में अब कहां जाएंगे। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, शादी विवाह की जिम्मेदारी हम पर ही निर्भर थी, अब कैसे चलेगा। कृष्णावती गुप्ता ने कहा कि भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में शिक्षामित्रों की लड़ाई मजबूती से लड़ने का वादा किया था। अब वह वादे से दूर भाग रही है। फैसले के चार दिनों बाद भी कोई प्रतिक्रिया न आना चिंताजनक है। यशवंत सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षामित्रों के हित को देखते हुए उचित न्याय करे, जिससे शिक्षामित्रों की रोजी-रोटी चल सके। अनीता पांडेय ने कहा कि कोर्ट के फैसले से आहत हैं। सरकार ने प्राथमिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शिक्षामित्रों की नियुक्ति की थी। सरकार शिक्षामित्रों के परिवार के लिए समस्या बन गई हैं।
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सांसद ने संसद में उठाया मुद्दा
सिद्धार्थनगर। सांसद जगदंबिका पाल ने शिक्षा मित्रों का मुद्दा सदन में उठाया है। शून्य प्रहर में चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश के 1.72 लाख समायोजन रद्द कर दिया है। इसके बाद से पूरे प्रदेश में शिक्षा मित्र आंदोलनरत हैं। संतकबीरनगर में बीएसए दफ्तर में आगजनी, बस्ती में तालाबंदी सहित हिंसक आंदोलन हो रहे हैं। मथुरा, बदायूं में एक-एक शिक्षा मित्र ने जान दे दी। सिद्धार्थनगर, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर सहित अन्य जिलों में भी लगातार आंदोलन हो रहा ै। कोर्ट के फैसले से शिक्षा मित्रों के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। ऐसे में कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल किया जाना न्याय संगत होगा।