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मेडिकल कॉलेज है या फर्जी रिपोर्ट बनाने की फैक्टरी

Sun, 08 May 2022 12:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 08 May 2022 12:00 AM IST
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बहराइच। मारपीट से लेकर गोलीकांड तक के मामलों में गुनहगार को सजा दिलाने के लिए पीड़ितों का सबसे बड़ा आधार मेडिकल रिपोर्ट होती है। मगर, बहराइच मेडिकल कॉलेज (पूर्व में जिला अस्पताल) का रेडियोलॉजी विभाग ऐसी रिपोर्ट तैयार करता है, जो बेगुनाहों को गुनहगार साबित कर देती है और आरोपी खुले घूमते हैं। यह विभाग फर्जी एक्सरे रिपोर्ट तैयार करने की एक ऐसी फैक्ट्री बन गया है जो किसी को भी फंसाने के लिए काफी है।
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इस विभाग के कारनामों के चलते सैकड़ों बेगुनाहों को जेल की सजा काटनी पड़ी। कई तो बुढ़ापे में भी मुकदमा झेल रहे हैं। आलम यह है कि कट्टे की गोली से घायल हो या मारपीट में हाथ-पैर टूट गया हो, इस विभाग की फर्जी रिपोर्ट से पीड़ितों को ही जेल जाना पड़ा। घटना को अंजाम देने वाले आज भी मौज में हैं। न्याय पाने के लिए कई पीड़ित हाईकोर्ट तक पहुंच गए। कई मामलों में पुलिस की जांच भी चल रही है। इन सबसे इतर स्वास्थ्य विभाग के हुक्मरानों पर इस विभाग के कारनामों से कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्जी रिपोर्ट तैयार करने वाले कई डॉॅक्टर व कर्मचारी रिटायर होकर चले गए, मगर कई दोषी कर्मचारी आज भी तैनात हैं।
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विशेश्वरगंज थाना क्षेत्र के पहुंचकट्टा के रामबदल पांडेय 15 साल से न्याय मांग रहे हैं। आरोप है कि वर्ष 2007 में पड़ोसी दीपनारायण एवं अन्य के साथ मारपीट हुई। इसमें रामबदल के एक हाथ में तीन फ्रैक्चर हुए थे। वहीं, सिर पर चोट लगने से उन्हें 18 टांके लगे थे। फिर भी रामबदल को ही जेल जाना पड़ा। कारण था वह एक्सरे रिपोर्ट जिसे विरोधी पक्ष ने रेडियोलॉजी विभाग से सांठगांठ कर बदलवा दिया। जब उन्हें एक्सरे रिपोर्ट बदलने की शंका हुई तो आरटीआई लगाकर असली रिपोर्ट हासिल की। पहले वे सीजेएम कोर्ट गए। अब हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे हैं।
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रामगांव थाना क्षेत्र के सोहरवां गांव के सुंदरलाल पर जमीन विवाद में कट्टे से फायर किया गया। उसने स्थानीय निवासी राममूरत यादव एवं अन्य पर हत्या की कोशिश, धमकाने, उकसाने की धाराओं में केस दर्ज कराया। तब विरोधी राममूरत ने भी पेशबंदी कर सुंदरलाल, गामा और अशोक कुमार के खिलाफ धमकाने, उकसाने जैसी धाराओं में एफआईआर करा दी। राममूरत ने सिर, दाहिने पंजे एवं दाहिने बांह का एक्सरे कराया। मौके पर तैनात रेडियोलाजिस्ट डॉ. अरुण कुमार द्वारा जारी एक्सरे रिपोर्ट में कोई टूट-फूट नहीं पाई गई। मगर, आर्थोपैडिक डॉक्टर ऐसी एक्सरे रिपोर्ट तैयार करता है जिसकेआधार पर विवेचक ने सुंदरलाल के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की कोशिश की धारा बढ़ा दी।
पीड़ितों को ही जेल भेज दिया जाता है। जमानत मिलने पर सुंदरलाल को जाली एक्सरे रिपोर्ट का पता चला तो उसने ऑर्थोपैडिक व एक्सरे टेकभनीशियन के खिलाफ सदर कोतवाली में गंभीर धाराओं में केस दर्ज करा दिया। अब मामले की जांच आईजी रेंज गोरखपुर के निर्देश पर बस्ती क्राइम ब्रांच कर रही है। उसकी याचिका पर 16 जुलाई 2021 को हाईकोर्ट ने प्रकरण की जांच दो माह में पूरा करने का आदेश दिया। आरोपी एक्सरे टेकभनीशियन की अरेस्ट स्टे की याचिका 21.10.2021 को हाईकोर्ट खारिज भी कर चुका है। अब इन्होंने जमानत के लिए बहराइच जिला अदालत में अर्जी दी थी, जिसे शुक्रवार को खारिज कर दिया गया।
पयागपुर थाना क्षेत्र के ककरहा गांव के त्रिवेणी सिंह एवं अन्य का रमजान एवं अन्य के साथ मारपीट हुई। 22 सितंबर 2007 के इस मामले में रमजान की पत्नी मदीना के बाएं पैर के पंजे का एक्सरे हुआ। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अरुण कुमार ने रिपोर्ट में नो बोन इंजरी लिखा। बाद में इस रिपोर्ट को फाड़कर डॉक्टर ने दूसरी रिपोर्ट बनवाकर चस्पा कर दिया। इसमें मदीना के फ्रैक्चर होने की पुष्टि की गई। इस जाली रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन इकौना पुलिस ने त्रिवेणी सिंह के खिलाफ गंभीर चोट पहुंचाने के इरादे से हमले की धारा बढ़ा दी। इसी प्रकरण में ककरहा के शिवशंकर सिंह के दाहिने पैर की एड़ी में चोट आई थी। रेडियोलाजिस्ट ने फ्रैक्चर रिपोर्ट भी लगाई, मगर बाद में जाली रिपोर्ट तैयार कर पीड़ित शिवशंकर को भी अभियुक्त बना दिया गया।
थाना विश्वेश्वरगंज के गोधना बेलभेरिया निवासी कुश कुमार तिवारी एवं अन्य पर कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जमीन विवाद में विरोधियों द्वारा धारदार हथियार से हमला करने का आरोप है। घटना में घायल कुश का कोरोना के कारण जिले में इलाज नहीं हो सका। गरीबी के कारण परिजनों को जमीन बेचकर लखनऊ के एक निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ा। अस्पताल ने सिर पर काफी घाव होने की रिपोर्ट दी। ठीक होने के बाद जब कुश विरोधियों पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए थाने पहुंचा तो पुलिस ने निजी अस्पताल की रिपोर्ट स्वीकार न कर सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट मांगी।

जब कुश मेडिकल कॉलेज पहुंचे तो तत्कालीन रेडियोलॉजिस्ट पर निल रिपोर्ट देने का आरोप लगा। वे किसी तरह डीआईजी के पास पहुंचे तो एक मेडिकल बोर्ड का गठन हुआ। इसमें उनके सिर पर गंभीर चोटें पाई गईं। इससे आहत कुश ने अदालत की शरण लेकर रेडियोलॉजिस्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की गुहार लगाई है। उसका आरोप है कि रेडियोलॉजिस्ट ने विरोधियों से रिश्वत लेकर फर्जी रिपोर्ट बनाई थी। इसके चलते उनका पूरा परिवार बर्बाद हो गया।
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