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300 उपासकों ने बौद्ध तपोस्थली में की पूजा
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आनंद बोधि पर वर्षावास पूजा करते अनुयायी।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। श्रावस्ती में चल रही विशेष वर्षावास पूजा में शामिल होने के लिए गुरुवार को श्रीलंका से तीन सौ सदस्यीय दल बौद्ध तपोस्थली पहुंचा। इसमें शामिल सदस्यों ने आनंद बोधि पर बुद्ध प्रतिमा रख कर पूजा अर्चना की। इसके बाद दल के सदस्यों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण कर उसकी एतिहासिक जानकारी भी ली।
श्रीलंका से तपोस्थली पहुंचे तीन सौ बौद्ध अनुयायियों ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा लेकर जेतवन परिसर में भ्रमण कर वर्षावास पूजा की। इसके बाद उन्होंने प्रतिमा को आनंद बोधि पर रख कर श्रीलंकाई रीति रिवाज से विशेष पूजा की।
इस दौरान बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहा कि जो लोग श्रावस्ती में वर्षावास पूजा करते हैं, उनकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। भगवान बुद्ध की ओर से बौद्ध धर्म के प्रचार के बाद बड़े-बड़े राजा महाराजा भी उनके शिष्य बनने लगे। भिक्षुओं की संख्या बहुत बढ़ने पर बौद्ध संघ की स्थापना की गई। भगवान बुद्ध ने बहुजन हिताय व लोककल्याण के लिए धर्म का देश विदेश में प्रचार करने के लिए भिक्षुओं को भेजा।
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सम्राट अशोक ने भी विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार में अपनी अहम भूमिका निभाई। मौर्यकाल तक आते आते भारत से निकलकर बौद्ध धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, बर्मा, थाईलैंड, हिंद चीन, श्रीलंका आदि देशों में फैल चुका था। इन देशों में बौद्ध धर्म के उपासक बहुसंख्यक है। इस मौके पर माता विद्यावती, कीर्ति सागर, सुख सागर, आनंद सागर, धर्मपाल, नाग लोक, नाग सागर, नाग ज्योति आदि उपासक मौजूद रहे।
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श्रीलंका से तपोस्थली पहुंचे तीन सौ बौद्ध अनुयायियों ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा लेकर जेतवन परिसर में भ्रमण कर वर्षावास पूजा की। इसके बाद उन्होंने प्रतिमा को आनंद बोधि पर रख कर श्रीलंकाई रीति रिवाज से विशेष पूजा की।
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इस दौरान बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहा कि जो लोग श्रावस्ती में वर्षावास पूजा करते हैं, उनकी सभी मनोकामना पूर्ण होती है। भगवान बुद्ध की ओर से बौद्ध धर्म के प्रचार के बाद बड़े-बड़े राजा महाराजा भी उनके शिष्य बनने लगे। भिक्षुओं की संख्या बहुत बढ़ने पर बौद्ध संघ की स्थापना की गई। भगवान बुद्ध ने बहुजन हिताय व लोककल्याण के लिए धर्म का देश विदेश में प्रचार करने के लिए भिक्षुओं को भेजा।
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सम्राट अशोक ने भी विदेशों में बौद्ध धर्म के प्रचार में अपनी अहम भूमिका निभाई। मौर्यकाल तक आते आते भारत से निकलकर बौद्ध धर्म चीन, जापान, कोरिया, मंगोलिया, बर्मा, थाईलैंड, हिंद चीन, श्रीलंका आदि देशों में फैल चुका था। इन देशों में बौद्ध धर्म के उपासक बहुसंख्यक है। इस मौके पर माता विद्यावती, कीर्ति सागर, सुख सागर, आनंद सागर, धर्मपाल, नाग लोक, नाग सागर, नाग ज्योति आदि उपासक मौजूद रहे।