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वक्त के साथ बदला माहौल, मिली घर वापसी की हिम्मत

Sat, 09 Mar 2019 10:36 PM IST
NAVEEN GUPTA amarujala
amarujala Published by: NAVEEN GUPTA Updated Sat, 09 Mar 2019 10:36 PM IST
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vakt ke saath badla maahol
file - फोटो : amarujala
पांच साल पहले चले रंगदारी के दौर में कैराना से पलायन करने वाले कुछ परिवार बाहर जाकर बस गए, लेकिन उनका दिल कैराना में ही बसा रहा। बच्चों की पढ़ाई से लेकर कारोबार तक में दिक्कतें आईं। हालांकि जैसे जैसे माहौल बदला, वैसे वैसे कुछ परिवार भी लौट आए। पहले और अब के हालातों के बारे में अमर उजाला टीम ने इन परिवारों से बातचीत कर हकीकत जानी।
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केस एक 
गऊशाला के पास कोल्डड्रिंक एजेंसी के मालिक ईश्वर चंद उर्फ बिल्लू को 14 अगस्त 2014 को रंगदारी की धमकी मिली थी। उसी दिन विनोद सिंघल की हत्या हो गई थी। 19 अगस्त को ईश्वर चंद दुकान और मकान बंद करके पानीपत चले गए। शनिवार शाम कैराना स्थित अपनी दुकान पर बैठे ईश्वर चंद के बेटे नितिन ने बताया कि पानीपत का माहौल ,भाषा और बोलचाल बिल्कुल अलग है। कारोबार भी वहां नहीं कर सके। जैसे तैसे तीन साल काटे, जमा पूंजी से काम चलाया, लेकिन धीरे धीरे कस्बे का माहौल बदला। सितंबर 2017 में योगी सरकार बनने के बाद कुछ सुरक्षा की भावना महसूस हुई, तो उन्होंने कैराना में आकर दुकान खोल ली और फिर से काम शुरू किया। हालांकि परिवार अभी भी पानीपत में रहता है। रोजाना पानीपत से आते जाते हैं।
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केस दो
कस्बे में मूला पंसारी के नाम से मशहूर किराना की दुकान है। 2014 में उनका पौत्र अभय चलाता था। रंगदारी का दौर चलने पर इस परिवार को धमकी मिली। पुलिस ने सुरक्षा भी दी, लेकिन मन से दहशत नहीं निकली और अभय सहित सूरत में जाकर बस गए और वहीं कारोबार कर लिया। उनकी रिश्तेदारी भी वहां है। अभय अभी तक वहां हैं,  लेकिन अभय के ताऊ जितेंद्र मित्तल जो कलकत्ता में प्राइवेट जॉब करते थे। वे रिटायर होने के बाद अप्रैल 2015 में ही कैराना में आकर बस गए  और अभय की दुकान खोलकर काम शुरू कर दिया। उनका कहना था कि वो समय था जब दहशत का माहौल था । परिवार को दिक्कत जरूर हुई लेकिन अब उन्हें कोई यहां कोई डर नहीं है।
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केस -तीन
मोहल्ला शंकर सौदियान निवासी नवीन भी अपनी एक बेटी, दो बेटों और पत्नी के साथ 2014 में कैराना छोड़कर दिल्ली के सुभाष नगर में जाकर बस गया था। दिल्ली में नवीन ने प्रापर्टी का काम किया था, लेकिन धीरे धीरे कस्बे का माहौल बदला। नवीन ने बताया कि 2017 में योगी सरकार आने के बाद कस्बे में सुरक्षा की भावना जगी तो उसने यहां लौटने की हिम्म्त दिखाई और मेढ़की दरवाजे की उनकी दुकान फिर से आबाद हो गई। नवीन के अनुसार अब यहां का माहौल अच्छा है।

सांसद ने उठाया था मुद्दा
शामली। कैराना से भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने 2016 में कस्बे से पलायन का मुद्दा भी जोर शोर से उठाया था। पूरे देश में इसकी गूंज रही। मई 2017 के लोकसभा चुनाव में ये मुद्दा गूंजा। भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया, लेकिन भाजपा फिर भी चुनाव हार गई।
कैराना कस्बे में रंगदारी का दौर तो सदियों पुराना है, लेकिन अगस्त 2014 में एक सप्ताह के अंदर तीन व्यापारियों को रंगदारी ना देने  पर मौत के घाट उतार दिया गया। इस वारदात के बाद कस्बे के व्यापारियों में दहशत का आलम इस कदर हावी हुआ कि कई परिवार कस्बे से पलायन कर गए। 2016 में कैराना सांसद रहे हुकुम सिंह ने 346 परिवारों की पलायन सूची जारी कर देश की राजनीति में हलचल मचा दी थी। लोकसभा उपचुनाव में भाजपा ने इस मुद्दे को हथियार बनाया, लेकिन विपक्षी दलों की एकजुटता के आगे ये मुद्दा काम नहीं कर सका और भाजपा चुनाव हार गई।


ये हुई थी बड़ी वारदात
दिसंबर 2013 में मुकीम गिरोह ने मुला पंसारी और राजू शंकर सहित चार व्यापारियों को रंगदारी की धमकी मिली थी। चारों को पुलिस सुरक्षा दी गई थी। 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान व्यापारियों की सुरक्षा वापस ले ली गई थी। जिसका नतीजा हुआ कि 16 अगस्त को व्यापार मंडल के कोषाध्यक्ष विनोद सिंघल और इसके ठीक 8 दिन बाद 24 अगस्त 2014 को आयरन स्टोर के मालिक व्यापारी भाईयों राजू और शकंर की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी थी। कस्बे ही नही पूरे जिले के बाजार कई दिन तक बंद रहे थे। इसके बाद कैराना में रंगदारी मांगने का ऐसा सिलसिला चला कि यहां से लोग पलायन करने को भी मजबूर हुए। 
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