{"_id":"5f46a40c8ebc3e3d065c4335","slug":"uproar-over-breaking-the-house-without-being-compensated-shamli-news-mrt498152830","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना मुआवजा दिए मकान तोड़ने पर हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना मुआवजा दिए मकान तोड़ने पर हंगामा
विज्ञापन
कैराना के गांव मवी अहतमाल तमाली में फोरलेन की जद में आने पर तोड़ा गया मकान।
- फोटो : SHAMLI
बगैर मुआवजा दिए मकान तोड़ने पर हंगामा
कैराना। बिना मुआवजा दिए हाईवे की जद में आए मकानों को तोड़ने की कार्रवाई पर ग्रामीण विरोध में उतर आए। उन्होंने हंगामा करते हुए पहले मुआवजा देने की मांग की। ंआरोप है कि मकान तोड़ने से पहले उन्हें सूचना भी नहीं दी गई। ग्रामीणों ने इसे लेकर काफी देर तक हंगामा किया। फिलहाल मकान तोड़ने का काम रोक दिया गया है।
पानीपत से वाया शामली, मुजफ्फरनगर होते हुए बिजनौर के नगीना तक राष्ट्रीय राजमार्ग 709 एडी फोरलेन बनाया जा रहा है। सड़क के दोनों ओर जेसीबी से चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। वहीं, फोरलेन की जद में आने वाले स्ट्रक्चर को तोड़ने का कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। बुधवार को भी गांव मवी अहतमाल माली में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीम जेसीबी से फोरलेन की जद में आने वाले मकानों को तोड़ने का कार्य कर रही थी। ग्रामीणों ने मौके पर हंगामा कर दिया तथा प्रशासन से अपने मकानों का मुआवजा देने की मांग की। सूचना पर एसडीएम उद्भव त्रिपाठी व एनएचएआई के अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों को समझाबुझाकर शांत किया। एसडीएम ने ग्रामीणों को फोरलेन की जद में आने वाले मकानों को शाम तक खाली करने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण इस्लाम, हरपाल, सलीम, मीन्ना, अनीस, नौशाद ने बताया कि प्रशासन द्वारा उनके मकानों का मुआवजा नहीं दिया गया और न ही उन्हें मकान खाली करने का समय दिया गया। एनएचएआई की ओर से जबरदस्ती उनके मकान तोड़ दिए गए। सभी ग्रामीणों ने पहले प्रशासन से अपने मकानों का मुआवजा दिलवाने की मांग की है। उधर, मामले में एसडीएम उद्भव त्रिपाठी का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग की जद में आने वाले मकान मालिकों को एक सप्ताह पहले बता दिया गया था। इसके बाद भी 48 घंटे का समय मकान खाली करने के लिए दिया गया था। वहीं, ग्रामीणों द्वारा मुआवजा मांगने की बात पर एसडीएम ने बताया कि जिन लोगों को मुआवजा नहीं मिला हैं। वे एनएचएआई कार्यालय में अपने कागज लेकर जाए तुरंत मुआवजे का रुपया उनके खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इसके अलावा जिन मकानों में बच्चे व महिलाएं हैं, उनको कुछ समय दिया गया है, ताकि वे मकान खाली कर अन्य जगहों पर शिफ्ट हो सकें।
विज्ञापन
कैराना। बिना मुआवजा दिए हाईवे की जद में आए मकानों को तोड़ने की कार्रवाई पर ग्रामीण विरोध में उतर आए। उन्होंने हंगामा करते हुए पहले मुआवजा देने की मांग की। ंआरोप है कि मकान तोड़ने से पहले उन्हें सूचना भी नहीं दी गई। ग्रामीणों ने इसे लेकर काफी देर तक हंगामा किया। फिलहाल मकान तोड़ने का काम रोक दिया गया है।
पानीपत से वाया शामली, मुजफ्फरनगर होते हुए बिजनौर के नगीना तक राष्ट्रीय राजमार्ग 709 एडी फोरलेन बनाया जा रहा है। सड़क के दोनों ओर जेसीबी से चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है। वहीं, फोरलेन की जद में आने वाले स्ट्रक्चर को तोड़ने का कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है। बुधवार को भी गांव मवी अहतमाल माली में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की टीम जेसीबी से फोरलेन की जद में आने वाले मकानों को तोड़ने का कार्य कर रही थी। ग्रामीणों ने मौके पर हंगामा कर दिया तथा प्रशासन से अपने मकानों का मुआवजा देने की मांग की। सूचना पर एसडीएम उद्भव त्रिपाठी व एनएचएआई के अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों को समझाबुझाकर शांत किया। एसडीएम ने ग्रामीणों को फोरलेन की जद में आने वाले मकानों को शाम तक खाली करने के निर्देश दिए हैं। ग्रामीण इस्लाम, हरपाल, सलीम, मीन्ना, अनीस, नौशाद ने बताया कि प्रशासन द्वारा उनके मकानों का मुआवजा नहीं दिया गया और न ही उन्हें मकान खाली करने का समय दिया गया। एनएचएआई की ओर से जबरदस्ती उनके मकान तोड़ दिए गए। सभी ग्रामीणों ने पहले प्रशासन से अपने मकानों का मुआवजा दिलवाने की मांग की है। उधर, मामले में एसडीएम उद्भव त्रिपाठी का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग की जद में आने वाले मकान मालिकों को एक सप्ताह पहले बता दिया गया था। इसके बाद भी 48 घंटे का समय मकान खाली करने के लिए दिया गया था। वहीं, ग्रामीणों द्वारा मुआवजा मांगने की बात पर एसडीएम ने बताया कि जिन लोगों को मुआवजा नहीं मिला हैं। वे एनएचएआई कार्यालय में अपने कागज लेकर जाए तुरंत मुआवजे का रुपया उनके खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। इसके अलावा जिन मकानों में बच्चे व महिलाएं हैं, उनको कुछ समय दिया गया है, ताकि वे मकान खाली कर अन्य जगहों पर शिफ्ट हो सकें।
विज्ञापन