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मजबूत इरादों से आगे बढ़ी मादलपुर की महिलाएं
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थानाभवन। गांव मादलपुर की महिलाओं ने खुद के पैरों पर खड़े होने की सोची तो पहले परिवार का विरोध झेलना पड़ा लेकिन इसे दरकिनार कर महिलाओं ने इरादे मजबूत किए और आगे बढ़ती गईं। आज गांव की खुशी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 12 महिलाएं सेनेटरी नैपकिन बनाकर अपनी आजीविका चलाती हैं।
गांव मादलपुर में संचालित खुशी स्वयं सहायता समूह की संचालक रूपा बताती हैं कि वह कांधला के पास एलम से सामान खरीदकर लाती हैं। इसके बाद वह सभी 12 महिलाएं सेनेट्री नेपकिन बनाकर आसपास के गांवों में दुकानों में सप्लाई करती हैं। इस समूह में पिंकी, सोनिया, बीरमती, बबीता, मेहराज, कुसुम आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस काम से समूह की प्रत्येक महिला की तकरीबन चार से पांच हजार रुपये महीना की आमदनी हो जाती है, जिससे उनके परिवार का खर्च आसानी से निकल जाता है। उन्होंने बताया कि अब उनकी आमदनी से पूरा परिवार खुश हैं, साथ ही अपने पैरों पर खड़े होने से उन्हें भी अच्छा महसूस होता है।
लेकिन जब उन्होंने समूह की शुरुआत की तो काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। शुरू में परिवार से साथ पूरा समाज उनके खिलाफ था। बताया कि उनके परिवार में आज तक किसी महिला ने काम नहीं किया था, इसलिए परिवार को भी यह मंजूर नहीं था। लेकिन इस दौरान उनके पति कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े रहे। इसके बाद धीरे धीरे सब सही होता चला गया और बाद सब लोगों को उनका काम करना पसंद आने लगा। आज हम सब मेहनत करती हैं और अपने पैसों पर खड़े होकर बहुत खुश हैं।
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बेटियों के सपनों को उड़ान दे रहीं कविता
गढ़ीपुख्ता। क्षेत्र के गांव गढ़ी अब्दुल्ला खां निवासी कुमारी कविता वशिष्ठ जरूरतमंद बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रहीं हैं। खुशी सामाजिक संस्था के माध्यम से क्षेत्र एवं जनपद के अलग-अलग गांव में महिलाओं व लड़कियों के लिए सिलाई एवं कंप्यूटर सेंटर की निशुल्क कक्षाओं का आयोजन करके उन्हें आत्मनिर्भर बना रहीं हैं। कविता वशिष्ठ बताती हैं करीब 11 वर्षों से वह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रहीं हैं। इन्हीं संस्था के द्वारा किए गए कार्यों की समय-समय पर उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा सराहना की गई है। कोरोना महामारी में संस्था द्वारा क्षेत्र एवं अन्य ग्रामीणों को मास्क एवं सैनिटाइजर मुफ्त वितरण किए गए। अब तक सैकड़ों महिलाओं एवं लड़कियों को प्रशिक्षण प्रदान कर चुकी हैं। इन्होंने महिला सशक्तिकरण की इस मुहिम को पूरा करने के लिए आजीवन अविवाहित रहने का प्रण लिया है।
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गांव मादलपुर में संचालित खुशी स्वयं सहायता समूह की संचालक रूपा बताती हैं कि वह कांधला के पास एलम से सामान खरीदकर लाती हैं। इसके बाद वह सभी 12 महिलाएं सेनेट्री नेपकिन बनाकर आसपास के गांवों में दुकानों में सप्लाई करती हैं। इस समूह में पिंकी, सोनिया, बीरमती, बबीता, मेहराज, कुसुम आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस काम से समूह की प्रत्येक महिला की तकरीबन चार से पांच हजार रुपये महीना की आमदनी हो जाती है, जिससे उनके परिवार का खर्च आसानी से निकल जाता है। उन्होंने बताया कि अब उनकी आमदनी से पूरा परिवार खुश हैं, साथ ही अपने पैरों पर खड़े होने से उन्हें भी अच्छा महसूस होता है।
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लेकिन जब उन्होंने समूह की शुरुआत की तो काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। शुरू में परिवार से साथ पूरा समाज उनके खिलाफ था। बताया कि उनके परिवार में आज तक किसी महिला ने काम नहीं किया था, इसलिए परिवार को भी यह मंजूर नहीं था। लेकिन इस दौरान उनके पति कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े रहे। इसके बाद धीरे धीरे सब सही होता चला गया और बाद सब लोगों को उनका काम करना पसंद आने लगा। आज हम सब मेहनत करती हैं और अपने पैसों पर खड़े होकर बहुत खुश हैं।
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बेटियों के सपनों को उड़ान दे रहीं कविता
गढ़ीपुख्ता। क्षेत्र के गांव गढ़ी अब्दुल्ला खां निवासी कुमारी कविता वशिष्ठ जरूरतमंद बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रहीं हैं। खुशी सामाजिक संस्था के माध्यम से क्षेत्र एवं जनपद के अलग-अलग गांव में महिलाओं व लड़कियों के लिए सिलाई एवं कंप्यूटर सेंटर की निशुल्क कक्षाओं का आयोजन करके उन्हें आत्मनिर्भर बना रहीं हैं। कविता वशिष्ठ बताती हैं करीब 11 वर्षों से वह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए काम कर रहीं हैं। इन्हीं संस्था के द्वारा किए गए कार्यों की समय-समय पर उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा सराहना की गई है। कोरोना महामारी में संस्था द्वारा क्षेत्र एवं अन्य ग्रामीणों को मास्क एवं सैनिटाइजर मुफ्त वितरण किए गए। अब तक सैकड़ों महिलाओं एवं लड़कियों को प्रशिक्षण प्रदान कर चुकी हैं। इन्होंने महिला सशक्तिकरण की इस मुहिम को पूरा करने के लिए आजीवन अविवाहित रहने का प्रण लिया है।