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विपक्षियों की घेराबंदी पर भारी पडे़ वीरेंद्र
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Mon, 02 Nov 2015 01:35 AM IST
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शामली। जिला पंचायत सदस्य पद के चुनाव में विपक्षियों की मजबूत घेराबंदी के बावजूद जिस तरह एमएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे मनीष चौहान और पुत्रवधू शैफाली ने बढ़त बनाई उससे एक बार फिर साबित हो गया कि राजनीतिक अखाडे़ में वीरेंद्र सिंह के दांवपेंच का काई तोड़ नहीं है। चुनाव परिणाम के बाद मुलायम सिंह के खास माने जाने वाले वीरेंद्र सिंह का कद सपा की सियासत और सत्ता दोनों में बढ़ गया है।
दरअसल, सपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे और वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान जिला पंचायत के वार्ड 14 और उनकी पुत्रवधू शैफाली वार्ड 16 से जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ी। यह दोनों ही वार्ड कांधला क्षेत्र में पड़ते हैं और इस क्षेत्र में वीरेंद्र सिंह का खासा रुतबा है लेकिन इन दोनों वार्ड से सपा विधायक नाहिद हसन के परिवार के लोग चुनाव मैदान में होने से इन दोनों ही वार्डों के चुनाव परिणाम वीरेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा का सवाल बने थे।
वार्ड 14 पर मनीष चौहान के सामने सपा विधायक नाहिद हसन ने अपनी बहन इकरा हसन को चुनाव मैदान में उतारा था, उनकी मंशा थी कि मुस्लिम और वीरेंद्र सिंह विरोधी मतों के सहारे वह इकरा को जीत दिला देंगे। वीरेंद्र सिंह के विरोधी माने जाने वाले पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक और उनके बेटे पंकज मलिक भी इकरा के पक्ष में आ गए थे ,यही नहीं इकरा के समर्थन में उनके परिवार के सदस्य भी एकजुट हो गए थे, लेकिन वीरेंद्र सिंह के राजनीतिक दांवपेंच के आगे यह सब आंकडे़ फेल रहे।
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तमाम लामबंदी के बावजूद वीरेंद्र सिंह के बेटे मनीष चौहान ने मतगणना के शुरुआती दौर से लेकर अंतिम चरण तक बढ़त बनाकर रखी। यह इस बात का उदाहरण है कि मनीष चौहान को वीरेंद्र सिंह के नाम पर हर जात बिरादरी के गांव में वोट मिले। यही स्थिति वार्ड 16 के चुनाव को लेकर भी रही। मनीष चौहान की पत्नी शैफाली को हराने के लिए विरोधियों ने पूरी ताकत लगाई।
जाट बहुल गांवों में शैफाली के खिलाफ जमकर वोट डाले गए, वहीं कई मुसलिम गांवों में भी शैफाली के विरोधी को पूरा सपोर्ट किया गया, लेकिन शैफाली की बढ़त को कम नहीं किया जा सका। माना जा रहा है कि चुनाव परिणामों के दूरगामी परिणाम होंगे और जिले की सियासत में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
सबसे बड़े अंतर की जीत होगी
रविवार रात 9 बजे तक की मतगणना पर में जिला पंचायत वार्ड 14 से मनीष चौहान ने करीब 8 हजार वोटों की बढ़त बना ली थी। जिले में अन्य किसी भी वार्ड पर प्रत्याशियों में इतना अंतर नहीं था। दावा किया जा रहा है कि मनीष की जिले में सबसे बडे़ अंतर से जीत होगी।
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दरअसल, सपा एमएलसी वीरेंद्र सिंह के बेटे और वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष मनीष चौहान जिला पंचायत के वार्ड 14 और उनकी पुत्रवधू शैफाली वार्ड 16 से जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव लड़ी। यह दोनों ही वार्ड कांधला क्षेत्र में पड़ते हैं और इस क्षेत्र में वीरेंद्र सिंह का खासा रुतबा है लेकिन इन दोनों वार्ड से सपा विधायक नाहिद हसन के परिवार के लोग चुनाव मैदान में होने से इन दोनों ही वार्डों के चुनाव परिणाम वीरेंद्र सिंह की प्रतिष्ठा का सवाल बने थे।
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वार्ड 14 पर मनीष चौहान के सामने सपा विधायक नाहिद हसन ने अपनी बहन इकरा हसन को चुनाव मैदान में उतारा था, उनकी मंशा थी कि मुस्लिम और वीरेंद्र सिंह विरोधी मतों के सहारे वह इकरा को जीत दिला देंगे। वीरेंद्र सिंह के विरोधी माने जाने वाले पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक और उनके बेटे पंकज मलिक भी इकरा के पक्ष में आ गए थे ,यही नहीं इकरा के समर्थन में उनके परिवार के सदस्य भी एकजुट हो गए थे, लेकिन वीरेंद्र सिंह के राजनीतिक दांवपेंच के आगे यह सब आंकडे़ फेल रहे।
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तमाम लामबंदी के बावजूद वीरेंद्र सिंह के बेटे मनीष चौहान ने मतगणना के शुरुआती दौर से लेकर अंतिम चरण तक बढ़त बनाकर रखी। यह इस बात का उदाहरण है कि मनीष चौहान को वीरेंद्र सिंह के नाम पर हर जात बिरादरी के गांव में वोट मिले। यही स्थिति वार्ड 16 के चुनाव को लेकर भी रही। मनीष चौहान की पत्नी शैफाली को हराने के लिए विरोधियों ने पूरी ताकत लगाई।
जाट बहुल गांवों में शैफाली के खिलाफ जमकर वोट डाले गए, वहीं कई मुसलिम गांवों में भी शैफाली के विरोधी को पूरा सपोर्ट किया गया, लेकिन शैफाली की बढ़त को कम नहीं किया जा सका। माना जा रहा है कि चुनाव परिणामों के दूरगामी परिणाम होंगे और जिले की सियासत में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
सबसे बड़े अंतर की जीत होगी
रविवार रात 9 बजे तक की मतगणना पर में जिला पंचायत वार्ड 14 से मनीष चौहान ने करीब 8 हजार वोटों की बढ़त बना ली थी। जिले में अन्य किसी भी वार्ड पर प्रत्याशियों में इतना अंतर नहीं था। दावा किया जा रहा है कि मनीष की जिले में सबसे बडे़ अंतर से जीत होगी।