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सुंदर कांड के साथ नारद मोह लीला का मंचन

Wed, 14 Oct 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2020 11:54 PM IST
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Narada Moh Leela staged with beautiful scandal
गढ़ीपुख्ता में रामलीला का मंचन करते कलाकार। - फोटो : SHAMLI
सुंदर कांड के साथ नारद मोह लीला का मंचन
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जलालाबाद। पंचायती रामलीला कृष्ण लीला समिति द्वारा गांधी चौक मैदान में आयोजित रामलीला में सुंदर कांड का पाठ व नारद मोह लीला का मंचन किया गया। रामलीला के डायरेक्टर देवराज जुनेजा ने बच्चों से नाराज विष्णु भगवान श्रीनिधि इंद्र की भूमिका बड़े ही सुंदर ढंग से कराई। कार्यक्रम का शुभारंभ समिति के प्रधान लाल सिंह भटनागर ने किया व विधि विधान से पूजा अर्चना पंडित राधेश्याम शर्मा ने कराई। दूसरी तरफ रामलीला ट्रस्ट द्वारा कराई जा रही रामलीला में डायरेक्टर महेश कुमार गलहती ने श्रवण कुमार का नाटक, राम जन्म आदि की लीला कराई। रामलीला रात्रि 12 बजे तक हुई। आने वाले दर्शकों के लिए सैनिटाइजर व मास्क आदि की व्यवस्था की गई थी।
श्रवण कुमार लीला का मंचन देख भावविभोर हुए दर्शक
गढ़ीपुख्ता। गढ़ी अब्दुल्ला खां में चल रही रामलीला में श्रवण कुमार की लीला का मंचन किया गया। श्रवण के नेत्रहीन माता-पिता तीर्थ यात्रा की इच्छा जताते हैं। वृद्ध माता-पिता की इच्छा को पूरी करने के लिए श्रवण कुमार अपने कंधे पर यात्रा कराने के लिए ले जाते हैं। रास्ते में प्यास लगने पर श्रवण को जल लाने के लिए कहते हैं। जैसे ही श्रवण जल का लोटा भरते हैं, उसी समय अयोध्या के महाराजा दशरथ का बाण श्रवण कुमार को लग जाता है। जिससे श्रवण कुमार की मृत्यु हो जाती है। पानी लेकर महाराज दशरथ श्रवण के माता-पिता के पास पहुंचते हैं और उनसे श्रवण के स्वर्ग सिधारने की पूरी कहानी बयां करते हैं। पुत्र के वियोग में श्रवण के माता-पिता महाराज दशरथ को श्राप देकर अपने प्राण त्याग देते हैं। श्रवण की भूमिका मांगेराम ने निभाई। इसके अलावा सनी, चतुर, जगपाल सैनी आदि ने अभिनय को भी खूब सराहा गया।
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श्रीमद्भागवत कथा का समापन
जलालाबाद। राधा कृष्ण मंदिर के प्रांगण में मास परायण पुरुषोत्तम मास में श्री राम चरित मानस व भागवत कथा का समापन हुआ। कथ वाचन पंडित प्रणव भारद्वाज ने किया। कथा का समापन पर हवन किया गया। सामूहिक रूप से भगवान की आरती उतारी की गई तथा प्रसाद का वितरण किया गया। कथा में राजेंद्र भगत, पंडित राधेश्याम शर्मा, पंडित राजेंद्र प्रसाद, लाला प्रमोद कुमार, सत्यपाल सिंह, शोभाराम, राम, देवेंद्र शर्मा, श्यामसुंदर नारंग, लाला मांगेराम आदि का पूर्ण सहयोग रहा।
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