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बेमौसम बारिश से मामौर झील ओवरफ्लो होकर टूटी
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कैराना की मामौर झील टूटने से मकानों और फसलों में भरा पानी।
- फोटो : SHAMLI
कैराना। बेमौसम हुई मुसलाधार बारिश होने के बाद मामोर झील ओवरफ्लो होकर टूट गई। जिस कारण कई किसानों की खेतों में कटने के बाद पड़ी हजारों बीघा धान की फसल व सब्जियां पानी में डूब कर नष्ट हो गई। घरों में भी पानी घुस गया। घरों के भी गिरने की आशंका भी बनी हुई हैं। बाद में प्रशासन ने पहुंचकर जेसीबी व पोर्कलेन मशीन से झील की आड़ की मरम्मत कराई।
रविवार की शाम कैराना क्षेत्र में बेमौसम हुई मूसलाधार बारिश किसानों के लिए आफत बन गई। पहले से गंदे पानी से लबालब मामौर झील मूसलाधार बारिश के पानी से एक बार फिर ओवरफ्लो होकर टूट गई। झील के किनारे पर पानी रोकने के लिए लगाई गई मिट्टी की आड़ रात के समय तेज बारिश के कारण टूट गई। झील का पानी किसान हनीफ की 40 बीघा, मंजीत की 30 बीघा, मुख्तियार की 40 बीघा, अय्यूब की 40 बीघा, करनेल की 20 बीघा, मामचंद की 20 बीघा, यशपाल की 35 बीघा फसल समेत करीब 2000 बीघा फसलों में पानी घुस गया। जिससे फसलें नष्ट हो गई। इसके अलावा झील व बारिश का पानी अय्यूब, लक्खा, कामिल, इलियास, नासिर, दल्ली, गय्यूर, जावेद , हैप्पी के मकानों में भर गया। सभी मकानो के गिरने की आशंका बनी हुई है। सुबह एसडीएम उद्भव त्रिपाठी प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने बताया कि एक जेसीबी व पोकलेन मशीन मंगाकर झील की आड़ की मरम्मत कराई तथा पानी को रोका गया।
-किसानों का कहना
1-मामौर निवासी किसान साबिर ने बताया कि उसकी 12 बीघा बैंगन की फसल थी। पानी भरने से सारी फसल बर्बाद हो गई। उसका करीब 5 लाख का नुकसान हुआ है।
2-किसान शराफत ने बताया कि उसकी 12 बीघा ज्वार व धान की फसल में झील का पानी भरने से करीब एक लाख का नुकसान हुआ है।
3-किसान लखविंदर ने बताया कि झील का पानी घर में भरने से एक दीवार टूट गई। 15 बीघा धान की फसल बर्बाद हो गई। करीब ढाई लाख का नुकसान हुआ है।
4-किसान हरप्रीत ने बताया कि झील टूटने के कारण उसकी 10 बीघा धान की फसल नष्ट हो गई है। फसलों में अभी भी गंदा पानी भरा है।
कई बार प्रशासनिक अधिकारी कर चुके हैं निरीक्षण
किसानों ने बताया कि मामौर झील की समस्या से प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि परिचित हैं। वह कई बार झील का निरीक्षण कर चुके हैं। पिछले दिनों भी सिंचाई विभाग की ओर से झील के गंदे पानी को साफ कर किसानों को सिंचाई के लिए साफ पानी उपलब्ध कराने तथा पास में मौजूद यमुना में पानी डालने के लिए वाटर ट्रीट प्लांट लगाने की बात कही गई थी। इस योजना पर कुछ नहीं हुआ।
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बार-बार होता है नुकसान
गांव मामौर व मवी निवासी किसानों ने बताया कि हर बार बारिश होने या कैराना नगर से आने वाले गंदे पानी के कारण झील ओवरफ्लो होकर टूट जाती है। इसके साथ ही गांव पंजीठ से आने वाले कच्चे नाला भी जगह-जगह से टूट जाता हैं। जिस कारण पंजीठ के किसान भी मामौर झील में जाने वाले कच्चे नाले से परेशान हैं। मामौर, मवी व पंजीठ के किसानों की फसलों में हर साल भारी नुकसान हो जाता हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कभी मुआवजा नहीं दिया गया।
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रविवार की शाम कैराना क्षेत्र में बेमौसम हुई मूसलाधार बारिश किसानों के लिए आफत बन गई। पहले से गंदे पानी से लबालब मामौर झील मूसलाधार बारिश के पानी से एक बार फिर ओवरफ्लो होकर टूट गई। झील के किनारे पर पानी रोकने के लिए लगाई गई मिट्टी की आड़ रात के समय तेज बारिश के कारण टूट गई। झील का पानी किसान हनीफ की 40 बीघा, मंजीत की 30 बीघा, मुख्तियार की 40 बीघा, अय्यूब की 40 बीघा, करनेल की 20 बीघा, मामचंद की 20 बीघा, यशपाल की 35 बीघा फसल समेत करीब 2000 बीघा फसलों में पानी घुस गया। जिससे फसलें नष्ट हो गई। इसके अलावा झील व बारिश का पानी अय्यूब, लक्खा, कामिल, इलियास, नासिर, दल्ली, गय्यूर, जावेद , हैप्पी के मकानों में भर गया। सभी मकानो के गिरने की आशंका बनी हुई है। सुबह एसडीएम उद्भव त्रिपाठी प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने बताया कि एक जेसीबी व पोकलेन मशीन मंगाकर झील की आड़ की मरम्मत कराई तथा पानी को रोका गया।
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-किसानों का कहना
1-मामौर निवासी किसान साबिर ने बताया कि उसकी 12 बीघा बैंगन की फसल थी। पानी भरने से सारी फसल बर्बाद हो गई। उसका करीब 5 लाख का नुकसान हुआ है।
2-किसान शराफत ने बताया कि उसकी 12 बीघा ज्वार व धान की फसल में झील का पानी भरने से करीब एक लाख का नुकसान हुआ है।
3-किसान लखविंदर ने बताया कि झील का पानी घर में भरने से एक दीवार टूट गई। 15 बीघा धान की फसल बर्बाद हो गई। करीब ढाई लाख का नुकसान हुआ है।
4-किसान हरप्रीत ने बताया कि झील टूटने के कारण उसकी 10 बीघा धान की फसल नष्ट हो गई है। फसलों में अभी भी गंदा पानी भरा है।
कई बार प्रशासनिक अधिकारी कर चुके हैं निरीक्षण
किसानों ने बताया कि मामौर झील की समस्या से प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि परिचित हैं। वह कई बार झील का निरीक्षण कर चुके हैं। पिछले दिनों भी सिंचाई विभाग की ओर से झील के गंदे पानी को साफ कर किसानों को सिंचाई के लिए साफ पानी उपलब्ध कराने तथा पास में मौजूद यमुना में पानी डालने के लिए वाटर ट्रीट प्लांट लगाने की बात कही गई थी। इस योजना पर कुछ नहीं हुआ।
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बार-बार होता है नुकसान
गांव मामौर व मवी निवासी किसानों ने बताया कि हर बार बारिश होने या कैराना नगर से आने वाले गंदे पानी के कारण झील ओवरफ्लो होकर टूट जाती है। इसके साथ ही गांव पंजीठ से आने वाले कच्चे नाला भी जगह-जगह से टूट जाता हैं। जिस कारण पंजीठ के किसान भी मामौर झील में जाने वाले कच्चे नाले से परेशान हैं। मामौर, मवी व पंजीठ के किसानों की फसलों में हर साल भारी नुकसान हो जाता हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कभी मुआवजा नहीं दिया गया।