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Shamli News: मेडिक्लेम नहीं देने पर इंश्योरेंस कंपनी समेत दो पर लगाया डेढ़ लाख का अर्थदंड

Tue, 13 Feb 2024 03:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 13 Feb 2024 03:03 AM IST
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Fine of Rs 1.5 lakh imposed on two including insurance company for not paying mediclaim
शामली। मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना के व्यक्ति को मेडिकलेम के रुपये नहीं देने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने दि ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी और मैसर्स रक्षा टीपीए प्राइवेट लिमिटेड को दोषी मानते हुए 60 हजार का जुर्माना लगाया। इसके अलावा क्लेम की राशि देने और डेढ़ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
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मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना निवासी विकास कुमार गर्ग ने आयोग में वाद दायर करते हुए कहा कि उसने वर्ष 2009 में एक मेडिक्लेम पाॅलिसी ली थी। इसका नवनीकरण 5780 रुपये अदा करके कराया था, जो वर्ष 2016 तक प्रभावी थी। पाॅलिसी के अंतर्गत परिवादी के अलावा उसकी पत्नी दीप शिखा, उसके पुत्र समृद्ध गर्ग, ध्रूव गर्ग बीमित थे। यदि इनमें से कोई बीमार हो जाए तो विपक्षी दि ओरियंटल इंश्योरेंस लिमिटेड को तीन लाख रुपये अदा करने थे। बताया कि उसका पुत्र ध्रुव गर्ग बुखार की चपेट में आ गया, जिसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। ससुर ने कंपनी से पूछा तो अधिकारियों ने कहा कि किसी भी अस्पताल में इलाज करा लो, कंपनी इलाज का खर्च वहन करेगी। पुत्र को डा. मुकेश त्यागी के यहां पर भर्ती कराया। इलाज के सभी कागज कंपनी में जमा करा दिए।
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आरोप है कि इसके बाद में कंपनी अधिकारियों ने कहा कि वह रुपये देने में असमर्थ हैं, क्योंकि उन्होंने अस्पताल का रजिस्ट्रेशन जमा नहीं कराया। वादी का दावा है कि इलाज के पर्चे पर अस्पताल का पंजीकरण स्पष्ट रूप से अंकित था। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कंपनी के अधिकारियों को शिकायत की तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। उसे क्लेम का कोई भुगतान नहीं किया गया, जबकि मेडिक्लेम राशि 17 हजार रुपये बैठती थी। रुपये दिलाए जाने की मांग पीड़ित ने आयोग से की। आयोग के चेयरमैन हेमंत कुमार गुप्ता, सदस्य अभिनव अग्रवाल आदि ने मामले में सुनवाई करते हुए दि ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी और मैसर्स रक्षा टीपीए प्राइवेट लिमिटेड को दोषी माना। दोषियों को 45 दिन के अंदर मेडिक्लेम राशि 12 प्रतिशत ब्याज के साथ देने के आदेश दिए। इसके अलावा शारीरिक और मानसिक क्षति के रूप में 50 हजार, परिवाद व्यय दस हजार, अर्थदंड की राशि डेढ़ लाख रुपये देने के आदेश जारी किए। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को देय नहीं होगी। आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने पर विपक्षीगण के विरुद्ध उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 71 व 72 के तहत कार्रवाई करने को कहा है।
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