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Shamli News: धुंधली होती नजर... मायोपिया की चपेट में बचपन

Wed, 22 Jul 2026 01:05 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली Updated Wed, 22 Jul 2026 01:05 AM IST
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Fading vision... Childhood in the grip of myopia.
जिला अस्पताल की नेत्र रोग ओपीडी में बच्चे की जांच करते विशेषज्ञ। संवाद
शामली। मोबाइल फोन, टीवी और टैबलेट का बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों की आंखों की रोशनी पर भारी पड़ रहा है। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार अब ओपीडी में आने वाले हर पांच में से दो बच्चे किसी न किसी स्तर पर मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) से प्रभावित मिल रहे हैं।
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विशेषज्ञों की सलाह है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम आधे से एक घंटे तक ही सीमित रखें और उन्हें रोजाना खुले वातावरण में खेलने के लिए प्रेरित करें। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखना, खुले में कम समय बिताना और शरीर में विटामिन-डी की कमी मायोपिया के प्रमुख कारण बन रहे हैं। पिछले कुछ समय से जिला अस्पताल की नेत्र ओपीडी में भी ऐसे बच्चों की संख्या बढ़ी है।
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विशेषज्ञों के अनुसार मायोपिया होने पर बच्चों को दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं। स्कूल में ब्लैक बोर्ड पढ़ने में परेशानी होती है समय पर जांच और उपचार नहीं होने पर चश्मे का नंबर तेजी से बढ़ सकता है। कई मामलों में यह माइनस 12 से 13 तक पहुंच जाता है, जिससे आगे चलकर रेटिना की बीमारी, ग्लूकोमा और मोतियाबिंद जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
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छह-सात घंटे मोबाइल देखने की पड़ी भारी
शहर के धीमानपुरा रोड निवासी कक्षा 10 के छात्र सचिन कुमार को रोजाना छह से सात घंटे मोबाइल फोन चलाने की आदत थी। कुछ समय बाद उसे दूर की वस्तुएं धुंधली दिखाई देने लगीं। परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच में मायोपिया की पुष्टि हुई। वर्तमान में उसका उपचार चल रहा है।
गेम की लत से कमजोर हुई नजर
लिलौन निवासी कक्षा 10 का एक छात्र प्रतिदिन पांच से छह घंटे मोबाइल पर गेम खेलता था। धीरे-धीरे उसे ब्लैक बोर्ड पढ़ने और दूर की चीजें देखने में परेशानी होने लगी। जिला अस्पताल की नेत्र ओपीडी में जांच के दौरान उसमें मायोपिया पाया गया। चिकित्सकों ने स्क्रीन टाइम कम करने और नियमित उपचार की सलाह दी।

इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
यदि बच्चा मोबाइल या टीवी बहुत पास से देखता है, आंखें मिचमिचाकर देखने की कोशिश करता है, बार-बार सिरदर्द की शिकायत करता है, पलकें अधिक झपकाता है या दूर की चीजें साफ नहीं देख पाता तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।


स्क्रीन टाइम सीमित रखें, आंखों को दें आराम
जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि बच्चों का स्क्रीन टाइम आधे से एक घंटे तक ही रखना चाहिए। स्क्रीन पर एंटी-ग्लेयर (स्क्रीन गार्ड) लगाया जा सकता है। लगातार स्क्रीन देखने के बजाय हर 15 से 20 मिनट में आंखों को आराम देना और बार-बार पलकें झपकाने की आदत डालनी चाहिए।
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