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शासन की सख्ती पर प्लांट सील
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Wed, 11 Oct 2017 12:37 AM IST
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Gas in school
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। गैस रिसाव से बच्चों की हालत बिगड़ने के बाद मामला शासन तक पहुंच गया। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारी से बातचीत कर घटना के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम ने बायोगैस प्लांट पर पहुंचकर जांच शुरू की और फिर सील लगा दी। सील लगाने के दौरान डिस्टलरी यूनिट के अधिकारियों ने विरोध भी किया, लेकिन टीम ने स्पष्ट कर दिया कि जांच पूरी होने तक सील लगी रहेगी।
मंगलवार की सुबह जब गैस रिसाव से बच्चों की हालत बिगड़ी, तो मामला सुर्खियों में आ गया। मामले की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई थी। इसी के चलते मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव ने भी प्रकरण के संबंध में गंभीरता जताते हुए जानकारी ली। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने प्रकरण में गंभीरता से जांच कराने की बात कही, जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग के सहायक वैज्ञानिक डीसी पांडेय अपनी टीम के साथ शुगर मिल के बायोगैस प्लांट में पहुंचे।
वहां उन्होंने करीब आधा घंटे तक जांच की। इसके बाद उन्होंने प्लांट पर सील लगा दी। सहायक वैज्ञानिक डीसी पांडेय ने बताया कि डिस्टलरी यूनिट की क्षमता 45 किलोवाट की है। उन्होंने बताया कि प्लांट में कार्बनडाई ऑक्साइड और मीथेन का उत्पादन हो रहा है, जो मानव शरीर के लिए हानिकारक होती है।
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इसी दौरान डिस्टलरी यूनिट के महाप्रबंधक प्रवीण कुमार श्रीवास्तव भी वहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्लांट से बनने वाली गैस का प्रयोग मिल में ईंधन के रूप में किया जाता है। उनका दावा था कि गैस का रिसाव नहीं हुआ, इसलिए सील नहीं लगाई जानी चाहिए। हालांकि सहायक वैज्ञानिक ने उनकी बात मानने से इंकार कर दिया और सील लगा दी।
वहीं, बायोगैस प्लांट के पास से सफेद पाउडर वाले दो पैकेट भी मिले, जिन्हें जांच के लिए टीम ने अपने पास सुरक्षित रख लिया। इसके अलावा बायोगैस प्लांट से खेड़ीकरमू वाले मार्ग पर सड़क पर ही जहां केमिकल बिखरा पड़ा था, उसे भी जांच के लिए लिया गया है। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम जांच करने में लगी हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
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मंगलवार की सुबह जब गैस रिसाव से बच्चों की हालत बिगड़ी, तो मामला सुर्खियों में आ गया। मामले की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई थी। इसी के चलते मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्य सचिव ने भी प्रकरण के संबंध में गंभीरता जताते हुए जानकारी ली। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने प्रकरण में गंभीरता से जांच कराने की बात कही, जिसके बाद प्रदूषण नियंत्रण विभाग के सहायक वैज्ञानिक डीसी पांडेय अपनी टीम के साथ शुगर मिल के बायोगैस प्लांट में पहुंचे।
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वहां उन्होंने करीब आधा घंटे तक जांच की। इसके बाद उन्होंने प्लांट पर सील लगा दी। सहायक वैज्ञानिक डीसी पांडेय ने बताया कि डिस्टलरी यूनिट की क्षमता 45 किलोवाट की है। उन्होंने बताया कि प्लांट में कार्बनडाई ऑक्साइड और मीथेन का उत्पादन हो रहा है, जो मानव शरीर के लिए हानिकारक होती है।
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इसी दौरान डिस्टलरी यूनिट के महाप्रबंधक प्रवीण कुमार श्रीवास्तव भी वहां पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्लांट से बनने वाली गैस का प्रयोग मिल में ईंधन के रूप में किया जाता है। उनका दावा था कि गैस का रिसाव नहीं हुआ, इसलिए सील नहीं लगाई जानी चाहिए। हालांकि सहायक वैज्ञानिक ने उनकी बात मानने से इंकार कर दिया और सील लगा दी।
वहीं, बायोगैस प्लांट के पास से सफेद पाउडर वाले दो पैकेट भी मिले, जिन्हें जांच के लिए टीम ने अपने पास सुरक्षित रख लिया। इसके अलावा बायोगैस प्लांट से खेड़ीकरमू वाले मार्ग पर सड़क पर ही जहां केमिकल बिखरा पड़ा था, उसे भी जांच के लिए लिया गया है। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग की टीम जांच करने में लगी हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।