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कारण स्पष्ट किए बगैर ही खारिज कर दिए आवेदन
Updated Sat, 07 Apr 2018 12:17 AM IST
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शामली। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि फसली ऋण मोचन योजना से एक भी पात्र किसान वंचित नहीं रहना चाहिए। यदि कोई बैंक या तहसील अधिकारी ऋण मोचन से संबंधित आवेदन को बिना संतोषजनक कारण बताए खारिज करेगा, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शुक्रवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में लघु एवं सीमांत किसानों के फसली ऋण माफी योजना की समीक्षा बैठक हुई। जिलाधिंकारी इंद्र विक्रम सिंह ने बैंक अधिकारियों, राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि फसल ऋण मोचन योजना में पात्र किसानों को हर हाल में लाभ मिलना चाहिए। अगर कोई किसान इस योजना से बैंक, तहसील व कृषि अधिकारियों की लापरवाही के कारण वंचित रहता है, तो 15 अप्रैल तक अपनी शिकायत ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकता है। इसके बाद पांच दिन के अंदर अधिकारी को शिकायत का निस्तारण हर हाल में करना होगा। 20 अप्रैल तक शिकायतों का निस्तारण न करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि ऋण मोचन योजना के लिए चार हजार शिकायतें ऑनलाइन प्राप्त हुई हैं। जिनमें से 1068 शिकायतें ऐसी पाई गई हैं, जिनका तहसील, बैंक ने स्पष्ट जवाब न देकर आवेदन खारिज कर दिए गए है। इस दौरान उन्होंने संबंधित बैंक अधिकारी और तहसीलदारों से डाटा पर प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पर जवाब तलब किया। संतोषजनक जवाब न देने पर उन्होंने कैराना तहसीलदार राकेश त्यागी, तहसीलदार ऊन, बैंक ऑफ इंडिया, कार्पोरेशन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक तथा इलाहाबाद बैंक के शाखा प्रबंधकों के संतोषजनक जवाब न होने पर कड़ी नाराजगी जताई।
वहीं, बैठक में इलाहाबाद बैंक शाखा प्रबंधक के नहीं पहुंचने पर गहरी नाराजगी जाहिर की। तहसीलदार अभयराज पांडेय को सुरक्षा बल के साथ बैंक शाखा में पहुंचकर प्रबंधक को लाने के लिए कहा। इससे पहले कि तहसीलदार बैंक शाखा में पहुंच पाते, तब तक शाखा प्रबंधक बैठक में पहुंच गए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रेनू तिवारी, अपर जिलाधिकारी केबी सिंह, जिला कृषि अधिकारी हरिशंकर, उपजिलाधिकारी कैराना दुष्यंत कुमार मौर्य, लीड बैंक मैनेजर हरपाल पंवार आदि मौजूद रहे।
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शुक्रवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में लघु एवं सीमांत किसानों के फसली ऋण माफी योजना की समीक्षा बैठक हुई। जिलाधिंकारी इंद्र विक्रम सिंह ने बैंक अधिकारियों, राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि फसल ऋण मोचन योजना में पात्र किसानों को हर हाल में लाभ मिलना चाहिए। अगर कोई किसान इस योजना से बैंक, तहसील व कृषि अधिकारियों की लापरवाही के कारण वंचित रहता है, तो 15 अप्रैल तक अपनी शिकायत ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकता है। इसके बाद पांच दिन के अंदर अधिकारी को शिकायत का निस्तारण हर हाल में करना होगा। 20 अप्रैल तक शिकायतों का निस्तारण न करने वाले अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि ऋण मोचन योजना के लिए चार हजार शिकायतें ऑनलाइन प्राप्त हुई हैं। जिनमें से 1068 शिकायतें ऐसी पाई गई हैं, जिनका तहसील, बैंक ने स्पष्ट जवाब न देकर आवेदन खारिज कर दिए गए है। इस दौरान उन्होंने संबंधित बैंक अधिकारी और तहसीलदारों से डाटा पर प्रस्तुत की गई रिपोर्ट पर जवाब तलब किया। संतोषजनक जवाब न देने पर उन्होंने कैराना तहसीलदार राकेश त्यागी, तहसीलदार ऊन, बैंक ऑफ इंडिया, कार्पोरेशन बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक तथा इलाहाबाद बैंक के शाखा प्रबंधकों के संतोषजनक जवाब न होने पर कड़ी नाराजगी जताई।
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वहीं, बैठक में इलाहाबाद बैंक शाखा प्रबंधक के नहीं पहुंचने पर गहरी नाराजगी जाहिर की। तहसीलदार अभयराज पांडेय को सुरक्षा बल के साथ बैंक शाखा में पहुंचकर प्रबंधक को लाने के लिए कहा। इससे पहले कि तहसीलदार बैंक शाखा में पहुंच पाते, तब तक शाखा प्रबंधक बैठक में पहुंच गए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी रेनू तिवारी, अपर जिलाधिकारी केबी सिंह, जिला कृषि अधिकारी हरिशंकर, उपजिलाधिकारी कैराना दुष्यंत कुमार मौर्य, लीड बैंक मैनेजर हरपाल पंवार आदि मौजूद रहे।
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