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Shahjahanpur News: शौचालय के दरवाजे टूटे...गंदे स्थान में जाने से बीमारियों का खतरा
Tue, 08 Apr 2025 12:58 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Tue, 08 Apr 2025 12:58 AM IST
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तिलहर के उच्च प्राथमिक विद्यालय इमली के शौचालय का टूटा दरवाजा। संवाद
शाहजहांपुर। बेसिक विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं और पढ़ाने वाली शिक्षिकाओं को स्कूल के शौचालयों का उपयोग करने के लिए गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। नियमित सफाई न होने के चलते गंदे शौचालय का उपयोग करने से बीमारी होने का खतरा रहता है।
जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के करीब 2716 स्कूलों का संचालन होता है। कागजों में सभी विद्यालयों में शौचालय बने हुए हैं, लेकिन उनकी स्थिति काफी ज्यादा खराब है। शौचालय के दरवाजे व सीटें तक टूटी पड़ी हैं। गंदगी के चलते दरवाजे के गेट पर ताला डाल दिया है। शिक्षक से लेकर बच्चे तक गंदे शौचालय में जाने से कतराते हैं।
तिलहर के मोहल्ला इमली के जूनियर और प्राइमरी स्कूल में शौचालय के गेट और सीट टूटी है। शौचालय में साफ-सफाई न होने पर गंदगी से लोग छात्र-छात्राएं और शिक्षक परेशान हैं। प्रधानाध्यापक विशाल गुप्ता ने बताया कि स्कूल की चहारदीवारी की ऊंचाई कम होने पर लोग शौचालय के ताले तोड़ देते हैं। मोहल्ला कुंवरगंज जूनियर और प्राइमरी स्कूल के गेट टूटे हैं। मोहल्ला बिरियागंज जूनियर और प्राइमरी स्कूल का शौचालय जर्जर है। शौचालय में साफ-सफाई ना होने पर बच्चे जाने से कतराते हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि शौचालय की मरम्मत होना है।
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शौचालयों में सफाई के इंतजाम नहीं
-शहर से लेकर देहात तक के स्कूलों में सफाई के इंतजाम नहीं है। ग्रामीण स्कूलों के शौचालयों की सफाई का जिम्मा सफाईकर्मियों पर है। वे भी आते नहीं हैं। गंदे शौचालय होने से अधिकतर में ताला डाल दिया गया। अधिकारी के आने की सूचना पर ही ताला खोला जाता है।
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मानक के विपरीत बने शौचालय
-वर्ष 2022 में नगरीय क्षेत्र में शौचालयों के निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये का बजट आया था। इसमें दिव्यांग शौचालय, बालक-बालिका शौचालय व मूत्रालय को बनाना था। कार्य के दौरान मानक के विपरीत शौचालयों का निर्माण करा दिया गया। जहां पहले से बने थे, वहां मात्र टायल्स लगा दिए गए थे। किराये के भवन में शौचालय भी नहीं बन सके हैं।
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-नगरीय क्षेत्र में पार्षद व ग्रामीण स्तर पर जिला पंचायत राज अधिकारी को सफाई कराने के लिए जिम्मेदारी दी गई है। जहां शौचालय के गेट टूटे हैं, वहां कंपोजिट ग्रांट की धनराशि से कार्य कराने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की है।
दिव्या गुप्ता, बीएसए
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जिले में बेसिक शिक्षा परिषद के करीब 2716 स्कूलों का संचालन होता है। कागजों में सभी विद्यालयों में शौचालय बने हुए हैं, लेकिन उनकी स्थिति काफी ज्यादा खराब है। शौचालय के दरवाजे व सीटें तक टूटी पड़ी हैं। गंदगी के चलते दरवाजे के गेट पर ताला डाल दिया है। शिक्षक से लेकर बच्चे तक गंदे शौचालय में जाने से कतराते हैं।
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तिलहर के मोहल्ला इमली के जूनियर और प्राइमरी स्कूल में शौचालय के गेट और सीट टूटी है। शौचालय में साफ-सफाई न होने पर गंदगी से लोग छात्र-छात्राएं और शिक्षक परेशान हैं। प्रधानाध्यापक विशाल गुप्ता ने बताया कि स्कूल की चहारदीवारी की ऊंचाई कम होने पर लोग शौचालय के ताले तोड़ देते हैं। मोहल्ला कुंवरगंज जूनियर और प्राइमरी स्कूल के गेट टूटे हैं। मोहल्ला बिरियागंज जूनियर और प्राइमरी स्कूल का शौचालय जर्जर है। शौचालय में साफ-सफाई ना होने पर बच्चे जाने से कतराते हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि शौचालय की मरम्मत होना है।
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शौचालयों में सफाई के इंतजाम नहीं
-शहर से लेकर देहात तक के स्कूलों में सफाई के इंतजाम नहीं है। ग्रामीण स्कूलों के शौचालयों की सफाई का जिम्मा सफाईकर्मियों पर है। वे भी आते नहीं हैं। गंदे शौचालय होने से अधिकतर में ताला डाल दिया गया। अधिकारी के आने की सूचना पर ही ताला खोला जाता है।
मानक के विपरीत बने शौचालय
-वर्ष 2022 में नगरीय क्षेत्र में शौचालयों के निर्माण के लिए दो करोड़ रुपये का बजट आया था। इसमें दिव्यांग शौचालय, बालक-बालिका शौचालय व मूत्रालय को बनाना था। कार्य के दौरान मानक के विपरीत शौचालयों का निर्माण करा दिया गया। जहां पहले से बने थे, वहां मात्र टायल्स लगा दिए गए थे। किराये के भवन में शौचालय भी नहीं बन सके हैं।
-नगरीय क्षेत्र में पार्षद व ग्रामीण स्तर पर जिला पंचायत राज अधिकारी को सफाई कराने के लिए जिम्मेदारी दी गई है। जहां शौचालय के गेट टूटे हैं, वहां कंपोजिट ग्रांट की धनराशि से कार्य कराने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की है।
दिव्या गुप्ता, बीएसए

तिलहर के उच्च प्राथमिक विद्यालय इमली के शौचालय का टूटा दरवाजा। संवाद