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Shahjahanpur News: रामगंगा फिर पहुंची खतरे के निशान से ऊपर, बाढ़ से घिरे तटीय गांव
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जलालाबाद के गांव कसारी में रामगंगा नदी का पानी खेतों व रास्तों में पहुंचा। संवाद
शाहजहांपुर। रामगंगा का जलस्तर सोमवार को सुबह फिर खतरे के निशान से 18 सेमी ऊपर पहुंच जाने से जलालाबाद से लेकर अल्हागंज तक करीब चार दर्जन तटीय गांव चौतरफा बाढ़ से घिरने लगे हैं। खेतों को जलमग्न कर गांवों की आबादी की ओर पानी बढ़ने से वहां का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कलान के भैंसार बांध पर गंगा खतरे के निशान से अभी काफी नीचे है, लेकिन मिर्जापुर क्षेत्र में उसके किनारे बसे कई गांवों के लोग बाढ़ के आसन्न खतरे से भयभीत हैं।
जलालाबाद। रामगंगा और उसकी सहायक नदी बहगुल में उफान बढ़ जाने से रविवार रात से कसारी, बलदेवपुर, तेरा, उइला, थाथरमई, शाहपुर, हथिनापुर गांवों तक पानी फिर पहुंच गया। तिकोला पुल के पास दोनों नदियों के बीच बसे करीब एक दर्जन गांवों तक जाने वाली सड़क पर 50 फुट के दायरे में पानी का तेज बहाव फिर शुरू हो गया है।
कसारी गांव का संपर्क मार्ग भी दोनों तरफ पानी से घिर गया है। संगहा गांव के गुड्डू, श्रीपाल, नन्हे, कसारी के कुनेंद्र पाल, अखिलेश, मौजीराम आदि ने बताया कि रात में ही उनके गांव पानी से घिर गए और ऊंचाई वाले खेत भी डूब गए। तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि बाढ़ चौकियों को दोबारा सक्रिय कर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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अल्हागंज। बारिश के बाद रामगंगा में बाढ़ के कहर से कई गांवों में धान, तिल और बाजरा की फसलें फिर डूब गई है। रामगंगा के तटीय गांव भरतौली के अमरपाल सिंह ने बताया कि बारिश में पहले से डूबी उनकी दो एकड़ धान और एक एकड़ बाजरा की फसल अब रामगंगा के निशाने पर आ गई है। फतेहपुर गांव के रामपाल सक्सेना के 12 बीघा धान डूब गए हैं। वजीरपुर के अजय सिंह उर्फ मिंटू का कहना है कि बाढ़ खेतों तक पहुंची तो पहले से डूबी 30 बीघा तिल और 30 बीघा धान की फसल बह जाएगी।
मिर्जापुर। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती गांव पैलानी उत्तरी, इस्लामनगर, आजादनगर आदि लगभग आधा दर्जन गांवों के लोगों में अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। हालांकि, सोमवार को सुबह तक भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 1.15 मीटर नीचे रहा, लेकिन जिस रफ्तार से पानी गांवों की आबादी की और बढ़ रहा है, उसे देखते हुए लोग सुरक्षित ठिकाने तलाशने लगे हैं। तहसीलदार अजहर अंसारी के अनुसार नदियों के जलस्तर और आसपास बसे गांवों की लगातार निगरानी कराई जा रही है।
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जलालाबाद। रामगंगा और उसकी सहायक नदी बहगुल में उफान बढ़ जाने से रविवार रात से कसारी, बलदेवपुर, तेरा, उइला, थाथरमई, शाहपुर, हथिनापुर गांवों तक पानी फिर पहुंच गया। तिकोला पुल के पास दोनों नदियों के बीच बसे करीब एक दर्जन गांवों तक जाने वाली सड़क पर 50 फुट के दायरे में पानी का तेज बहाव फिर शुरू हो गया है।
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कसारी गांव का संपर्क मार्ग भी दोनों तरफ पानी से घिर गया है। संगहा गांव के गुड्डू, श्रीपाल, नन्हे, कसारी के कुनेंद्र पाल, अखिलेश, मौजीराम आदि ने बताया कि रात में ही उनके गांव पानी से घिर गए और ऊंचाई वाले खेत भी डूब गए। तहसीलदार राघवेश मणि त्रिपाठी ने बताया कि बाढ़ चौकियों को दोबारा सक्रिय कर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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अल्हागंज। बारिश के बाद रामगंगा में बाढ़ के कहर से कई गांवों में धान, तिल और बाजरा की फसलें फिर डूब गई है। रामगंगा के तटीय गांव भरतौली के अमरपाल सिंह ने बताया कि बारिश में पहले से डूबी उनकी दो एकड़ धान और एक एकड़ बाजरा की फसल अब रामगंगा के निशाने पर आ गई है। फतेहपुर गांव के रामपाल सक्सेना के 12 बीघा धान डूब गए हैं। वजीरपुर के अजय सिंह उर्फ मिंटू का कहना है कि बाढ़ खेतों तक पहुंची तो पहले से डूबी 30 बीघा तिल और 30 बीघा धान की फसल बह जाएगी।
मिर्जापुर। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से तटवर्ती गांव पैलानी उत्तरी, इस्लामनगर, आजादनगर आदि लगभग आधा दर्जन गांवों के लोगों में अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। हालांकि, सोमवार को सुबह तक भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 1.15 मीटर नीचे रहा, लेकिन जिस रफ्तार से पानी गांवों की आबादी की और बढ़ रहा है, उसे देखते हुए लोग सुरक्षित ठिकाने तलाशने लगे हैं। तहसीलदार अजहर अंसारी के अनुसार नदियों के जलस्तर और आसपास बसे गांवों की लगातार निगरानी कराई जा रही है।