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Shahjahanpur News: छुट्टा पशुओं का ठिकाना बना करोड़ों की लागत से बना घाट
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जलालाबाद में परशुराम जन्मस्थली स्थित रामताल के घाट पर बैठे छुट्टा पशु। संवाद
जलालाबाद। भगवान परशुराम की जन्मस्थली स्थित रामताल पर 2.19 करोड़ रुपये की लागत से बने घाट व सीढि़यां छुट्टा जानवरों के विचरण और बैठने का ठिकाना बन गए हैं। वहां इधर-उधर फैली गंदगी भी श्रद्धालुओं को आहत कर रही है। इस कारण मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं व बच्चों के लिए राम ताल को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की सरकार की मंशा पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की पहली सरकार बनने के दौरान भारत दर्शन योजना के तहत परशुराम मंदिर के सामने करीब 14 एकड़ के रकबे वाले रामताल के किनारे घाट व सीढियां और मंदिर परिसर में सुंदरीकरण से जुड़े अन्य कार्यों के लिए दो करोड़ 19 लाख रुपये की धनराशि दी गई थी।
इस धनराशि से मंदिर प्रांगण में अन्य कार्यों के अलावा सबसे अधिक व्यय रामताल को संवारने पर किया गया। सरकार की मंशा के अनुरूप मंदिर के सामने रामताल के जिस हिस्से में बस्ती होने से वहां गंदगी व कीचड़ बना रहता था, वहां करीब 200 मीटर लंबाई में घाट और सीढि़यां बनाकर उसे दर्शनीय स्थल का रूप दिया गया।
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यही नहीं, घाट तक जानवरों अथवा बाइक सवारों की पहुंच रोकने के लिए घाट के प्रवेश स्थल पर पिलर बनाकर जंजीर आदि लगाई गईं। साफ सुथरा स्थल और सामने विशाल तालाब होने के कारण मंदिर आने वाले लोग वहां पहुंचने लगे। शाम के समय काफी संख्या में लोग आते जाते थे, लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में प्रवेश स्थल पर लगे अवरोध टूट गए।
रास्ता खुल जाने से वहां कुत्ते ओर अन्य छुट्टा जानवर डेरा डालने लगे। घाटों की सफाई नहीं होने से वहां गंदगी भी बढ़ रही है। इसलिए वहां पहुंचने वालों की संख्या भी काफी कम हो गई है।
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यह मामला मेरे संज्ञान में लाया जा चुका है। जल्द ही इसे लेकर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। घाटों की साफ सफाई का काम शीघ्र कराया जाएगा। वहां पशुओं की घुसपैठ रोकने को भी कारगर प्रबंध कराए जाएंगे।
-उत्सव आनंद, एसडीएम, जलालाबाद
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केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की पहली सरकार बनने के दौरान भारत दर्शन योजना के तहत परशुराम मंदिर के सामने करीब 14 एकड़ के रकबे वाले रामताल के किनारे घाट व सीढियां और मंदिर परिसर में सुंदरीकरण से जुड़े अन्य कार्यों के लिए दो करोड़ 19 लाख रुपये की धनराशि दी गई थी।
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इस धनराशि से मंदिर प्रांगण में अन्य कार्यों के अलावा सबसे अधिक व्यय रामताल को संवारने पर किया गया। सरकार की मंशा के अनुरूप मंदिर के सामने रामताल के जिस हिस्से में बस्ती होने से वहां गंदगी व कीचड़ बना रहता था, वहां करीब 200 मीटर लंबाई में घाट और सीढि़यां बनाकर उसे दर्शनीय स्थल का रूप दिया गया।
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यही नहीं, घाट तक जानवरों अथवा बाइक सवारों की पहुंच रोकने के लिए घाट के प्रवेश स्थल पर पिलर बनाकर जंजीर आदि लगाई गईं। साफ सुथरा स्थल और सामने विशाल तालाब होने के कारण मंदिर आने वाले लोग वहां पहुंचने लगे। शाम के समय काफी संख्या में लोग आते जाते थे, लेकिन नियमित देखरेख के अभाव में प्रवेश स्थल पर लगे अवरोध टूट गए।
रास्ता खुल जाने से वहां कुत्ते ओर अन्य छुट्टा जानवर डेरा डालने लगे। घाटों की सफाई नहीं होने से वहां गंदगी भी बढ़ रही है। इसलिए वहां पहुंचने वालों की संख्या भी काफी कम हो गई है।
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यह मामला मेरे संज्ञान में लाया जा चुका है। जल्द ही इसे लेकर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। घाटों की साफ सफाई का काम शीघ्र कराया जाएगा। वहां पशुओं की घुसपैठ रोकने को भी कारगर प्रबंध कराए जाएंगे।
-उत्सव आनंद, एसडीएम, जलालाबाद