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प्रमोशन पार्टी में भिड़े नरमू कार्यकर्ता
ब्यूरो /शाहजहांपुर
Updated Sun, 02 Oct 2016 01:00 AM IST
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रेलवे में रोजा के एनआरएमयू कार्यालय में शुक्रवार रात आयोजित प्रमोशन पार्टी में यूनियन के दो रसूखदार कार्यकर्ताओं के बीच टकराव हुआ फिर जमकर गाली गलौज व मारपीट हुई। मामला बढ़ने पर पुलिस ने दो यूनियन पदाधिकारियों सहित एक अन्य का मेडिकल कराया है। एक पखवाड़े के भीतर यूनियन पदाधिकारियों का यह दूसरा मामला थाने तक पहुंचा है।
जानकारी के अनुसार रेल की सत्ता में काबिज एनआरएमयू के रोजा कार्यालय में एक सहचालक की ओर से प्रमोशन पार्टी का आयोजन किया गया था। रात दस बजे तक सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। शराब का दौर शुरू हुआ और सुरूर चढ़ने पर कमीशन से आए सहचालक संदीप यादव और यूनियन के अध्यक्ष जय कुमार त्रिवेदी के बीच किसी बात को लेकर नोकझोंक होने लगी।
प्रत्यक्षदर्शी बताते है कि पहले तो दोनों के बीच बातचीत हुई फिर गाली गलौज हुई। बात इतनी बढ़ गयी कि दोनो के बीच जूतम पैजार और उठा पटक होने लगी। मौके पर जो यूनियन कार्यालय में थे, उसमें कई मदहोश थे। लिहाजा किसी तरह दोनों को अलग किया और मामले को वहां से टाला गया। सहचालक संदीप यादव के पिता पुलिस विभाग में निरीक्षक के पद पर गैर जनपद में तैनात हैं, उन्होंने सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस पर दबाव बनाया तो जय कुमार त्रिवेदी की ओर से सियासी नेताओं की सिफारिशों का दौर शुरू हो गया। पुलिस ने संदीप, जय कुमार और एक अन्य को अपनी हिरासत मे ले लिया जिनका मेडिकल कराया गया। पुलिस ने पकड़े गये तीनों के खिलाफ पुलिस एक्ट की धारा 34 के खिलाफ कार्यवाही की।
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शनिवार की सुबह जब दोनो नेताओं का नशा हवा हुआ तो प्रभारी निरीक्षक ने तलब किया। दोनों पक्ष आपसी समझौते पर राजी हो गये। बाद में पुलिस ने पकड़े गये तीनों आरोपियों को जमानत पर रिहा किया है। बता दें कि एक पखवाड़ा पूर्व भी यहां के पदाधिकरियों और उरकू नेताओं के बीच विवाद हुआ था जिसे पुलिस ने किसी तरह से सुलटाया था। चर्चा है कि पांच दशक से नरमू का जो परचम यहां फहरा रहा था। उसमें कुछ शरारती तत्वों के आ जाने से जुझारू रेल कर्मियों ने किनारा कर लिया है। पिछले चार सालों में यूनियन का ग्राफ यहां कम हो रहा है जिसके लिये यूनियन के मंडल पदाधिकारियों को सोचने की फुर्सत नहीं है।
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जानकारी के अनुसार रेल की सत्ता में काबिज एनआरएमयू के रोजा कार्यालय में एक सहचालक की ओर से प्रमोशन पार्टी का आयोजन किया गया था। रात दस बजे तक सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था। शराब का दौर शुरू हुआ और सुरूर चढ़ने पर कमीशन से आए सहचालक संदीप यादव और यूनियन के अध्यक्ष जय कुमार त्रिवेदी के बीच किसी बात को लेकर नोकझोंक होने लगी।
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प्रत्यक्षदर्शी बताते है कि पहले तो दोनों के बीच बातचीत हुई फिर गाली गलौज हुई। बात इतनी बढ़ गयी कि दोनो के बीच जूतम पैजार और उठा पटक होने लगी। मौके पर जो यूनियन कार्यालय में थे, उसमें कई मदहोश थे। लिहाजा किसी तरह दोनों को अलग किया और मामले को वहां से टाला गया। सहचालक संदीप यादव के पिता पुलिस विभाग में निरीक्षक के पद पर गैर जनपद में तैनात हैं, उन्होंने सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस पर दबाव बनाया तो जय कुमार त्रिवेदी की ओर से सियासी नेताओं की सिफारिशों का दौर शुरू हो गया। पुलिस ने संदीप, जय कुमार और एक अन्य को अपनी हिरासत मे ले लिया जिनका मेडिकल कराया गया। पुलिस ने पकड़े गये तीनों के खिलाफ पुलिस एक्ट की धारा 34 के खिलाफ कार्यवाही की।
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शनिवार की सुबह जब दोनो नेताओं का नशा हवा हुआ तो प्रभारी निरीक्षक ने तलब किया। दोनों पक्ष आपसी समझौते पर राजी हो गये। बाद में पुलिस ने पकड़े गये तीनों आरोपियों को जमानत पर रिहा किया है। बता दें कि एक पखवाड़ा पूर्व भी यहां के पदाधिकरियों और उरकू नेताओं के बीच विवाद हुआ था जिसे पुलिस ने किसी तरह से सुलटाया था। चर्चा है कि पांच दशक से नरमू का जो परचम यहां फहरा रहा था। उसमें कुछ शरारती तत्वों के आ जाने से जुझारू रेल कर्मियों ने किनारा कर लिया है। पिछले चार सालों में यूनियन का ग्राफ यहां कम हो रहा है जिसके लिये यूनियन के मंडल पदाधिकारियों को सोचने की फुर्सत नहीं है।