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कोलाघाट : एक वर्ष बाद भी नहीं हुआ पक्के पुल का लोड टेस्ट
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कोलाघाट पुल
जलालाबाद। कोलाघाट के पक्के पुल से चौपहिया वाहनों का संचालन शुरू कराने के लिए पुल का लोड टेस्ट कराने की दिशा में एक साल बीतने पर भी कोई प्रगति नहीं हो सकी है। इस कारण जलालाबाद और कलान तहसील की कटरी में बसे करीब 22 गांवों के हजारों ग्रामीणों को बरसात में पैंटून पुल हट जाने से आवागमन की दिक्कत से जूझना पड़ रहा है।
बता दें कि करीब पौने तीन साल पहले एक पिलर धंसने से कोलाघाट पुल तीन भागों में बंटने के साथ लगभग दो सौ मीटर हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। प्रदेश के तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद ने आवागमन को शीघ्र बहाल कराने के प्रयास के तहत उस क्षतिग्रस्त हिस्से काे निर्मित करा दिया, लेकिन केंद्र सरकार की जांच एजेंसी सीआरआरआई की रिपोर्ट के आधार पर पुल से यातायात पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया और क्षतिग्रस्त हिस्से के निर्माण पर खर्च हुए साढ़े पांच करोड़ रुपये व्यर्थ हो गए।
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पुल चालू कराने के लिए आज से होगा आंदोलन
गत वर्ष पक्के पुल से दोपहिया और पैंटून पुल से चार पहिया वाहनों का संचालन शुरू कराया गया। बरसात में पैंटून पुल के हटते ही पक्के पुल से छोटे चार पहिया वाहनों का संचालन शुरू कराने की मांग जोर पकड़ने लगी। बीते साल क्षेत्रवासियों ने आंदोलन शुरू किया, लेकिन अधिकारियों ने पुल की लोड टेस्टिंग कराकर निर्णय लेने का आश्वासन देकर आंदोलन खत्म करा दिया। इस मांग को लेकर कोलाघाट पुल संघर्ष समिति के कार्यकर्ता कल 22 जुलाई से क्रमिक अनशन और 25 से आमरण अनशन शुरू करने की तैयारी में हैं।
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पुल चालू होने से बचेगा समय और धन
फिलहाल चारपहिया वाहन चालकों को जिला मुख्यालय तक जाने के लिए फर्रुखाबाद जनपद के राजेपुर से होकर लंबा फेर लगाना पड़ रहा है। इसमें समय के साथ अतिरिक्त खर्च भी वहन करना पड़ता है। इस अव्यवस्था से व्यापारी व किसान वर्ग खासे प्रभावित हैं। क्षेत्र में सक्रिय बाइक टैक्सी वाले मनमाना किराया लेकर पुल पार करा रहे हैं। ऐसे में पक्के पुल से चार पहिया वाहन निकलने से लोगों के समय और धन की काफी बचत हो जाएगी।
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बता दें कि करीब पौने तीन साल पहले एक पिलर धंसने से कोलाघाट पुल तीन भागों में बंटने के साथ लगभग दो सौ मीटर हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। प्रदेश के तत्कालीन लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद ने आवागमन को शीघ्र बहाल कराने के प्रयास के तहत उस क्षतिग्रस्त हिस्से काे निर्मित करा दिया, लेकिन केंद्र सरकार की जांच एजेंसी सीआरआरआई की रिपोर्ट के आधार पर पुल से यातायात पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया और क्षतिग्रस्त हिस्से के निर्माण पर खर्च हुए साढ़े पांच करोड़ रुपये व्यर्थ हो गए।
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पुल चालू कराने के लिए आज से होगा आंदोलन
गत वर्ष पक्के पुल से दोपहिया और पैंटून पुल से चार पहिया वाहनों का संचालन शुरू कराया गया। बरसात में पैंटून पुल के हटते ही पक्के पुल से छोटे चार पहिया वाहनों का संचालन शुरू कराने की मांग जोर पकड़ने लगी। बीते साल क्षेत्रवासियों ने आंदोलन शुरू किया, लेकिन अधिकारियों ने पुल की लोड टेस्टिंग कराकर निर्णय लेने का आश्वासन देकर आंदोलन खत्म करा दिया। इस मांग को लेकर कोलाघाट पुल संघर्ष समिति के कार्यकर्ता कल 22 जुलाई से क्रमिक अनशन और 25 से आमरण अनशन शुरू करने की तैयारी में हैं।
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पुल चालू होने से बचेगा समय और धन
फिलहाल चारपहिया वाहन चालकों को जिला मुख्यालय तक जाने के लिए फर्रुखाबाद जनपद के राजेपुर से होकर लंबा फेर लगाना पड़ रहा है। इसमें समय के साथ अतिरिक्त खर्च भी वहन करना पड़ता है। इस अव्यवस्था से व्यापारी व किसान वर्ग खासे प्रभावित हैं। क्षेत्र में सक्रिय बाइक टैक्सी वाले मनमाना किराया लेकर पुल पार करा रहे हैं। ऐसे में पक्के पुल से चार पहिया वाहन निकलने से लोगों के समय और धन की काफी बचत हो जाएगी।