हेयर ड्रेसर का अजब जुनून: 90 देशों के नोट व सिक्कों को संजोया, महात्मा गांधी से जुड़ी चीजें भी संभालकर रखीं
शाहजहांपुर के हेयर ड्रेसर जमीर अहमद उर्फ बब्बू ने महात्मा गांधी की स्मृतियों के साथ 70 देशों के नोट व सिक्के व 90 देशों के डाक टिकट संभालकर रखे हैं। उनके पास उत्तर प्रदेश गांधी शताब्दी पर चला वर्ष 1969 का बुकरम का नोट भी है।
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शाहजहांपुर के हेयर ड्रेसर जमीर अहमद उर्फ बब्बू पर महात्मा गांधी की स्मृतियों और पुरानी वस्तुओं को सुरक्षित रखने का जुनून सवार है। बीस साल से बापू के आश्रम के पेड़ के पत्ते समेत बापू की तस्वीर वाले नोट सुरक्षित रखे हुए हैं। उनके पास 70 देशों की नोट और सिक्के और 90 देशों के डाक टिकट भी रखे हुए हैं।
बहादुरगंज में हेयर सैलून चलाने वाले जमीर अहमद की दुकान पर डबल स्टोरी के रहने वाले डीके खत्री आते थे। वह विदेशों के फोटो मंगाकर दिखाते थे। उन्हें देखकर जमीर को पुरानी चीजों को एकत्रित करने का जुनून सवार हो गया। जिनके पास पुराने सिक्के या नोट मिलते, वह उसे पाने की जुगत में लग जाते हैं।
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जमीर को महात्मा गांधी से असीम प्रेम है। उनके पास उत्तर प्रदेश गांधी शताब्दी पर चला वर्ष 1969 का बुकरम का नोट है। खादी ग्रामोद्योग मिशन के अंतर्गत चरखा जयंती पर खादी हुंडी का दो रुपये का नोट उपलब्ध है। उन्होंने 20 साल से महाराष्ट्र स्थित कस्तूरबा गांधी के कुटीर व वर्धा के सेवाग्राम में लगे पेड़ के पत्ते सुरक्षित रखे हैं। पत्तों को सुरक्षित रखने को उनका लेमिनेशन करा रखा है।
इसी तरह वर्ष 1961 की गांधी चरित मानस समेत कई पुरानी किताबें भी सहेजे हुए हैं। इसके अतिरिक्त गांधी जी की तस्वीर वाले नोट और सिक्कों का बड़ा कलेक्शन उनके पास हैं। बापू की स्मृतियों को सहेजने में जमीर ने अपनी पूरी जिंदगी लगा दी है। सऊदी अरब, दुबई, भूटान, नेपाल, कतर ओमान समेत 70 देशों के नोट को सुरक्षित रखा है।
देश-विदेश के नोट, वर्ष तलाशने को रखते हैं किताब
जमीर के पास देश-विदेश के नोट उपलब्ध हैं। नोट इतने पुराने हो गए, जिनके ऊपर वर्ष तक नजर नहीं आता है, पर राज्यपाल का नाम स्पष्ट दिख रहा। अंग्रेजों के जमाने के नोट व पोस्टकार्ड भी उनके पास हैं। ऐसे में जमीर ने किताब खरीद ली थी। किताब खोलकर कौन राज्यपाल उस समय था, वह देखकर तुरंत बता देते हैं। पांचवीं पास जमीर समय मिलने पर बापू की किताबों को अध्ययन भी करते हैं।
जमीर अहमद ने बताया कि बापू की स्मृतियों के साथ 70 देशों के नोट व सिक्के व 90 देशों के डाक टिकट हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बाद भी लोगों की मदद से दुर्लभ चीजों को सहेज रखा है। हमारा प्रयास है कि गिनीज या लिम्का बुक में नाम दर्ज हो जाए।