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बहुराष्ट्रीय कंपनी की नौकरी छोड़ उन्नत खेती के ‘सिकंदर’ बने हैदर
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कांट के रावतपुर निवासी हैदर अली अपने पिता के साथ
- फोटो : SHAHJAHANPUR
आले नबी
शाहजहांपुर। नोएडा में बहुराष्ट्रीय कंपनी की नौकरी छोड़कर कांट के रावतपुर निवासी हैदर अली परंपरागत खेती से इतर अभिनव प्रयोग कर रहे हैं। केला, अमरूद, तरबूज, खरबूजा की खेती करने के बाद अब हैदर जिले का पहला शरीफे का बाग लगा रहे हैं। नौकरी के लिए खेती-किसानी छोड़कर बड़े शहरों का रुख करने वाले युवाओं के लिए हैदर उन्नत खेती के माध्यम से प्रेरणास्रोत बने हैं।
रावतपुर निवासी प्रगतिशील किसान कैसर अली के बेटे हैदर अली ने नैनीताल के अमतुल पब्लिक स्कूल से कक्षा 12 की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी से स्नातक और इंटरनेशनल बिजनेस में परास्नातक किया। 2018 में उन्होंने नोएडा की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव मैनेजर के तौर पर नौकरी शुरू की। सब कुछ ठीक चल रहा था। इस बीच कुछ दिक्कतों के कारण नौकरी छोड़कर घर चले आए। घर में रहने के दौरान उन्होंने अपने खेतों में जाना शुरू किया। पहले खेती-किसानी से दूर रहने वाले हैदर ने पिता की प्रेरणा से अपनी कृषि योग्य जमीन पर कुछ बेहतर करने की ठान ली।
धीरे-धीरे उनके अंदर रुचि बढ़ती गई। गेहूं और गन्ने की परंपरागत खेती से इतर आधुनिक तरीका अपनाया। हैदर के पास पहले से ही आम और अमरूद के बाग थे। ऐसे में उन्होंने सरकारी लाभ लेने के लिए उद्यान विभाग में आवेदन किया। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद गेहूं और गन्ना बोने के बजाय तेलंगाना से ताइवान पिंक अमरूद की पौध मंगाकर 50 बीघा जमीन में लगा दी। ताइवान पिंक अमरूद की आपूर्ति बरेली और दिल्ली तक की जा रही है। बाग से आपूर्तिकर्ता अमरूद खरीदकर ले जाते हैं। संवाद
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केले की खेती में फायदे ही फायदे
हैदर अली ने करीब 40 बीघा में केले की फसल है। केले की खेती में काफी फायदे होने के बाद इसका विस्तार करने की योजना बाई है। हैदर बताते हैं कि इस बार वह 80 से 90 बीघा में केले की फसल को लगाने की तैयारी में हैं। केले का पौधा भी जल्द ही तैयार हो जाता है।
12 से 15 बीघा में शरीफे की खेती का खाका तैयार
आधुनिक तरीके से खेती करने वाले हैदर अली एक नया प्रयोग करने जा रहे हैं। जनपद में जल्द ही शरीफा का बाग देखने को मिल जाएगा। हैदर अली ने 12 से 15 बीघा में शरीफे की खेती का खाका तैयार किया। इसके लिए पुणे के सोलापुर से एनएनके वन गोल्डन पौध भी आ गई है। शरीफे की खेती अभी महाराष्ट्र में होती थी।
नदी किनारे नहीं, खेत में उगाया खरबूजा और तरबूज
आमतौर पर नदी किनारे रेतीली जमीन में ही खरबूज और तरबूज की खेती होती है। लेकिन हैदर अली ने खरबूजा और तरबूज अपने खेत में उगाया है। हैदर अली ने 30 बीघा भूमि पर ताइवानी तरबूज और खरबूजा को उगा रखा है। इसकी सप्लाई स्थानीय मार्केट के अलावा पड़ोसी जनपद में भी की जाती है।
टपक सिंचाई पद्धति का सहारा
हैदर अली ने पानी की बचत करने के लिए टपक सिंचाई पद्धति का सहारा लिया। पहले जहां ट्यूबवेल के जरिये खेतों की सिंचाई की जाती थी, वहीं अब बूंद-बूंद पानी से फसल को सींचा जाता है। अब वह पूरे 300 बीघा में इसी तरह सिंचाई अपनाने को तैयार हैं।
उन्नत खेती अपनाकर आगे बढ़ रहे
पढ़ाई के बाद करीब एक साल तक नौकरी की। कुछ दिक्कतों के कारण वापस आना पड़ा। कभी खेती के प्रति दिलचस्पी नहीं रही, लेकिन फिर उन्नत तरीके से खेती करने की योजना बनाई। चूंकि, खेती का प्रशिक्षण नहीं था। इसलिए पापा ने साथ दिया। उन्होंने जानकारी दी और हमने उसे उन्नत तरीके से आगे बढ़ाने का काम किया। -हैदर अली
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शाहजहांपुर। नोएडा में बहुराष्ट्रीय कंपनी की नौकरी छोड़कर कांट के रावतपुर निवासी हैदर अली परंपरागत खेती से इतर अभिनव प्रयोग कर रहे हैं। केला, अमरूद, तरबूज, खरबूजा की खेती करने के बाद अब हैदर जिले का पहला शरीफे का बाग लगा रहे हैं। नौकरी के लिए खेती-किसानी छोड़कर बड़े शहरों का रुख करने वाले युवाओं के लिए हैदर उन्नत खेती के माध्यम से प्रेरणास्रोत बने हैं।
रावतपुर निवासी प्रगतिशील किसान कैसर अली के बेटे हैदर अली ने नैनीताल के अमतुल पब्लिक स्कूल से कक्षा 12 की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी से स्नातक और इंटरनेशनल बिजनेस में परास्नातक किया। 2018 में उन्होंने नोएडा की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव मैनेजर के तौर पर नौकरी शुरू की। सब कुछ ठीक चल रहा था। इस बीच कुछ दिक्कतों के कारण नौकरी छोड़कर घर चले आए। घर में रहने के दौरान उन्होंने अपने खेतों में जाना शुरू किया। पहले खेती-किसानी से दूर रहने वाले हैदर ने पिता की प्रेरणा से अपनी कृषि योग्य जमीन पर कुछ बेहतर करने की ठान ली।
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धीरे-धीरे उनके अंदर रुचि बढ़ती गई। गेहूं और गन्ने की परंपरागत खेती से इतर आधुनिक तरीका अपनाया। हैदर के पास पहले से ही आम और अमरूद के बाग थे। ऐसे में उन्होंने सरकारी लाभ लेने के लिए उद्यान विभाग में आवेदन किया। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद गेहूं और गन्ना बोने के बजाय तेलंगाना से ताइवान पिंक अमरूद की पौध मंगाकर 50 बीघा जमीन में लगा दी। ताइवान पिंक अमरूद की आपूर्ति बरेली और दिल्ली तक की जा रही है। बाग से आपूर्तिकर्ता अमरूद खरीदकर ले जाते हैं। संवाद
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केले की खेती में फायदे ही फायदे
हैदर अली ने करीब 40 बीघा में केले की फसल है। केले की खेती में काफी फायदे होने के बाद इसका विस्तार करने की योजना बाई है। हैदर बताते हैं कि इस बार वह 80 से 90 बीघा में केले की फसल को लगाने की तैयारी में हैं। केले का पौधा भी जल्द ही तैयार हो जाता है।
12 से 15 बीघा में शरीफे की खेती का खाका तैयार
आधुनिक तरीके से खेती करने वाले हैदर अली एक नया प्रयोग करने जा रहे हैं। जनपद में जल्द ही शरीफा का बाग देखने को मिल जाएगा। हैदर अली ने 12 से 15 बीघा में शरीफे की खेती का खाका तैयार किया। इसके लिए पुणे के सोलापुर से एनएनके वन गोल्डन पौध भी आ गई है। शरीफे की खेती अभी महाराष्ट्र में होती थी।
नदी किनारे नहीं, खेत में उगाया खरबूजा और तरबूज
आमतौर पर नदी किनारे रेतीली जमीन में ही खरबूज और तरबूज की खेती होती है। लेकिन हैदर अली ने खरबूजा और तरबूज अपने खेत में उगाया है। हैदर अली ने 30 बीघा भूमि पर ताइवानी तरबूज और खरबूजा को उगा रखा है। इसकी सप्लाई स्थानीय मार्केट के अलावा पड़ोसी जनपद में भी की जाती है।
टपक सिंचाई पद्धति का सहारा
हैदर अली ने पानी की बचत करने के लिए टपक सिंचाई पद्धति का सहारा लिया। पहले जहां ट्यूबवेल के जरिये खेतों की सिंचाई की जाती थी, वहीं अब बूंद-बूंद पानी से फसल को सींचा जाता है। अब वह पूरे 300 बीघा में इसी तरह सिंचाई अपनाने को तैयार हैं।
उन्नत खेती अपनाकर आगे बढ़ रहे
पढ़ाई के बाद करीब एक साल तक नौकरी की। कुछ दिक्कतों के कारण वापस आना पड़ा। कभी खेती के प्रति दिलचस्पी नहीं रही, लेकिन फिर उन्नत तरीके से खेती करने की योजना बनाई। चूंकि, खेती का प्रशिक्षण नहीं था। इसलिए पापा ने साथ दिया। उन्होंने जानकारी दी और हमने उसे उन्नत तरीके से आगे बढ़ाने का काम किया। -हैदर अली