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गन्ना किसानों की जेब खाली... कैसे मनेगी दिवाली
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शाहजहांपुर। दिवाली के त्योहार के अब कुछ दिन शेष बचे हैं, लेकिन जनपद की चीनी मिलों पर किसानों का गत पेराई सत्र का 1.26 अरब रुपये गन्ना मूल्य अभी तक बकाया है। किसानों की त्योहार के उल्लास से जुड़ी सभी उम्मीदें अब चीनी मिलों से बकाया भुगतान मिलने पर टिकी हैं। उनका कहना है कि गन्ने का भुगतान जल्द नहीं मिलने पर न सिर्फ त्योहार की खुशियां फीकी पड़ेंगी, रबी फसलों की बुआई के लिए खाद, बीज, कीटनाशक आदि की व्यवस्था करना भी कठिन हो जाएगा।
सबसे ज्यादा प्रभावित मकसूदापुर मिल से जुड़े किसान हैं, क्योंकि उनका सर्वाधिक 83 करोड़ रुपये इसी मिल पर बकाया है। डालमिया ग्रुप की निगोही मिल और बिरला ग्रुप की अवध शुगर वर्क्स (रोजा चीनी मिल) संपूर्ण गन्ना भुगतान कर चुकी हैं, लेकिन सहकारी क्षेत्र की तिलहर व पुवायां मिल पर किसानों की 43 करोड़ रुपये की देनदारी शेष है। बकाया की यह स्थिति तब है, जब अगले सप्ताह मिलों में पेराई सत्र की उल्टी गिनती शुरू होनी है। भुगतान में तेजी लाने के लिए शासन ने मिलों के चीनी स्टॉक में किसानों की हिस्सेदारी 85 से बढ़ाकर 90 फीसदी कर दी, लेकिन इस व्यवस्था के कारगर नतीजे सामने नहीं आए हैं।
मिल वार गन्ना देयता, भुगतान और बकाया राशि (लाख रुपये)
चीनी मिल गन्ना मूल्य भुगतान अवशेष
निगोही मिल 41876.78 41876.78 शून्य
मकसूदापुर मिल 21283.06 12982.48 8300.58
रोजा मिल 23493.90 23493.90 शून्य
तिलहर मिल 11120.85 8420.25 2700.60
पुवायां मिल 8542.04 6941.17 1600.87
(भुगतान की यह स्थिति 28 अक्तूबर, 2021 तक)
किसानों की बात
चीनी मिल तिलहर द्वारा गन्ना किसानों का लंबित भुगतान न दिए जाने से किसान बहुत परेशान है। अभी हाल में हुइ बारिश से किसान वैसे भी तबाह हो गया है ऊपर से त्योहार में खर्चा होने और पैसा न होने से किसान दुखी है। तत्काल भुगतान किया जाना चाहिए। -चंद्र मोहन गंगवार, ग्राम प्रधान, बिलहरी (तिलहर)
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किसान बदहाली में अपना जीवन काट रहा है उसके पास पैसे नहीं है ऊपर से चीनी मिल पर किसान का गन्ने का पैसा बाकी है और चीनी मिल भुगतान नहीं कर रही है। मिल प्रशासन को तत्काल किसान के गन्ने का भुगतान कर देना चाहिए। -रवींद्र गुप्ता, बरैंचा (तिलहर)
दीपावली और सहालगी सीजन शुरू हो गया है, लेकिन किसान एक-एक पैसे को मोहताज हैं। चीनी मिल गन्ना किसानों का लाखों रुपया बकाया है कई बार भुगतान कराने को लेकर किसान यूनियन आंदोलन पर चुकी है, लेकिन प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा। -पुष्पराज सिंह यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान यूनियन
तिलहर मिल से गन्ने का भुगतान मिलना बाकी है, जबकि नया पेराई सीजन शुरू होने वाला है। इससे किसान परेशान है। मिल प्रशासन को तत्काल किसानों का पिछला बकाया भुगतान कर देना चाहिए।
-प्रद्युमन यादव, किसान नेता, तिलहर
मेरा किसान सहकारी चीनी मिल करनापुर पर लगभग 15 हजार रुपया बकाया है। तमाम बार मांग करने के बाद भी चीनी मिल भुगतान नहीं कर रही है। किसान कर्ज लेकर फसल तैयार करता है और बाद में फसल बेचने पर भुगतान नहीं होता है। 14 दिन में भुगतान के निर्देश हैं, लेकिन पालन नहीं होता है।
अंकुर शर्मा, जेबां पुवायां
मेरा बजाज चीनी मिल मकसूदापुर पर दो लाख रुपया बकाया है। इस वर्ष चीनी मिले पेराई के लिए तैयार हैं, लेकिन पिछले वर्ष खरीदे गए गन्ने का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। धान बिक नहीं रहा है। गेहूं बुवाई के लिए रुपये नहीं हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और सख्ती से भुगतान कराना चाहिए।
जसपाल सिंह, कुइयां महोलिया बंडा
बजाज ग्रुप की गोला गोकर्णनाथ, पलिया, ऐरा आदि अन्य मिलों की तुलना में मकसूदापुर मिल की भुगतान स्थिति बेहतर है। इस मिल का गोदाम प्रशासन की निगरानी में है, जिसमें पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। शासन से विशेष अनुमति लेकर इस चीनी की बिक्री से प्राप्त 90 प्रतिशत धनराशि से किसानों को भुगतान कराया जा रहा है। नए पेराई सत्र में मिलों की वित्तीय हालत सुधरने की उम्मीद है। -डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी
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सबसे ज्यादा प्रभावित मकसूदापुर मिल से जुड़े किसान हैं, क्योंकि उनका सर्वाधिक 83 करोड़ रुपये इसी मिल पर बकाया है। डालमिया ग्रुप की निगोही मिल और बिरला ग्रुप की अवध शुगर वर्क्स (रोजा चीनी मिल) संपूर्ण गन्ना भुगतान कर चुकी हैं, लेकिन सहकारी क्षेत्र की तिलहर व पुवायां मिल पर किसानों की 43 करोड़ रुपये की देनदारी शेष है। बकाया की यह स्थिति तब है, जब अगले सप्ताह मिलों में पेराई सत्र की उल्टी गिनती शुरू होनी है। भुगतान में तेजी लाने के लिए शासन ने मिलों के चीनी स्टॉक में किसानों की हिस्सेदारी 85 से बढ़ाकर 90 फीसदी कर दी, लेकिन इस व्यवस्था के कारगर नतीजे सामने नहीं आए हैं।
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मिल वार गन्ना देयता, भुगतान और बकाया राशि (लाख रुपये)
चीनी मिल गन्ना मूल्य भुगतान अवशेष
निगोही मिल 41876.78 41876.78 शून्य
मकसूदापुर मिल 21283.06 12982.48 8300.58
रोजा मिल 23493.90 23493.90 शून्य
तिलहर मिल 11120.85 8420.25 2700.60
पुवायां मिल 8542.04 6941.17 1600.87
(भुगतान की यह स्थिति 28 अक्तूबर, 2021 तक)
किसानों की बात
चीनी मिल तिलहर द्वारा गन्ना किसानों का लंबित भुगतान न दिए जाने से किसान बहुत परेशान है। अभी हाल में हुइ बारिश से किसान वैसे भी तबाह हो गया है ऊपर से त्योहार में खर्चा होने और पैसा न होने से किसान दुखी है। तत्काल भुगतान किया जाना चाहिए। -चंद्र मोहन गंगवार, ग्राम प्रधान, बिलहरी (तिलहर)
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किसान बदहाली में अपना जीवन काट रहा है उसके पास पैसे नहीं है ऊपर से चीनी मिल पर किसान का गन्ने का पैसा बाकी है और चीनी मिल भुगतान नहीं कर रही है। मिल प्रशासन को तत्काल किसान के गन्ने का भुगतान कर देना चाहिए। -रवींद्र गुप्ता, बरैंचा (तिलहर)
दीपावली और सहालगी सीजन शुरू हो गया है, लेकिन किसान एक-एक पैसे को मोहताज हैं। चीनी मिल गन्ना किसानों का लाखों रुपया बकाया है कई बार भुगतान कराने को लेकर किसान यूनियन आंदोलन पर चुकी है, लेकिन प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा। -पुष्पराज सिंह यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, किसान यूनियन
तिलहर मिल से गन्ने का भुगतान मिलना बाकी है, जबकि नया पेराई सीजन शुरू होने वाला है। इससे किसान परेशान है। मिल प्रशासन को तत्काल किसानों का पिछला बकाया भुगतान कर देना चाहिए।
-प्रद्युमन यादव, किसान नेता, तिलहर
मेरा किसान सहकारी चीनी मिल करनापुर पर लगभग 15 हजार रुपया बकाया है। तमाम बार मांग करने के बाद भी चीनी मिल भुगतान नहीं कर रही है। किसान कर्ज लेकर फसल तैयार करता है और बाद में फसल बेचने पर भुगतान नहीं होता है। 14 दिन में भुगतान के निर्देश हैं, लेकिन पालन नहीं होता है।
अंकुर शर्मा, जेबां पुवायां
मेरा बजाज चीनी मिल मकसूदापुर पर दो लाख रुपया बकाया है। इस वर्ष चीनी मिले पेराई के लिए तैयार हैं, लेकिन पिछले वर्ष खरीदे गए गन्ने का भुगतान अभी तक नहीं हो सका है। धान बिक नहीं रहा है। गेहूं बुवाई के लिए रुपये नहीं हैं। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और सख्ती से भुगतान कराना चाहिए।
जसपाल सिंह, कुइयां महोलिया बंडा
बजाज ग्रुप की गोला गोकर्णनाथ, पलिया, ऐरा आदि अन्य मिलों की तुलना में मकसूदापुर मिल की भुगतान स्थिति बेहतर है। इस मिल का गोदाम प्रशासन की निगरानी में है, जिसमें पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। शासन से विशेष अनुमति लेकर इस चीनी की बिक्री से प्राप्त 90 प्रतिशत धनराशि से किसानों को भुगतान कराया जा रहा है। नए पेराई सत्र में मिलों की वित्तीय हालत सुधरने की उम्मीद है। -डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी