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पत्नी को खुदकुशी के लिए उकसाने पर पांच साल कैद
शाहजहांपुर।
Updated Mon, 21 Dec 2015 11:05 PM IST
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विवाहिता के संदिग्ध हालात में जहर खाकर मरने की 12 साल पुरानी घटना में अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम गोपाल उपाध्याय ने सोमवार को उसके पति को दोषी सिद्ध अभियुक्त पाया। उसे अपनी पत्नी को खुदकुशी के लिए उकसाने के जुर्म में पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना डाला है, जिसे अदा न करने की सूरत में छह माह अतिरिक्त कारावास की सजा काटनी होगी। इस मामले में आरोपी देवर लालाराम को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया, जबकि आरोपी सास-ससुर की सुनवाई की अवधि में मौत हो गई।
सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गांव कुरयां कला निवासी टीकाराम वर्मा ने नौ मई 2003 की रात करीब साढ़े 12 बजे खुटार थाने में तहरीर देकर बताया कि उसकी बहन गंगा देवी का विवाह चार साल पहले ग्राम महेशापुर में कृष्ण कुमार पुत्र टीकाराम से हुआ था। उस विवाह में इन लोगों ने अपनी बहन को क्षमता के अनुरूप दान-दहेज के साथ विदा किया था, लेकिन थोड़े ही दिनों बाद उसके पति, देवर, सास और ससुर ने दहेज में बाइक और टीवी न देने के आरोप में प्रताड़ित करने लगे। कई बार इसी मुद्दे पर उनकी बहन को मारा-पीटा गया। सूचना पाकर ये लोग बहन की ससुराल पहुंचे और बाइक की व्यवस्था करने का भरोसा देकर मसले को सुलझाया। करीब एक साल पहले उसकी बहन ने एक बेटे को जन्म दिया, लेकिन ससुराल वालों का रवैया उसके प्रति फिर भी नहीं सुधरा। आठ मई 2003 की शाम गंगा देवी के देवर लालाराम ने टेलीफोन पर उसके भाई को बताया कि उनकी बहन की तबीयत ज्यादा खराब है और वह उसेेउपचार के लिए शाहजहांपुर ले जा रहे हैं। यह सूचना पाकर मायके से शाहजहांपुर जाने को निकले, लेकिन खुटार पहुंचने पर पता चला कि बहन मर चुकी है। फिर वह लोग बहन की ससुराल पहुंचे, तो वहां उसकी लाश रखी हुई मिली। पड़ोसियों ने बताया कि बीते दो-तीन दिनों से गंगा देवी से मारपीट की जा रही थी और आठ मई 2003 को उसे कोई जहरीला पदार्थ खिला दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
टीकाराम की तहरीर के आधार पर खुटार थाने में उसी रात को मृतका के पति, देवर, सास और ससुर पर आईपीसी की धारा 304बी के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई।
सीओ पुवायां ने मामले की विवेचना की और आईपीसी की धारा 306 के तहत चार्जशीट दायर हुई। सरकारी वकील वंशीलाल ने कुल सात गवाह पेश किए। अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम ने सभी गवाहों, उभय पक्षों के वकीलों के तर्कों को सुनने एवं साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद सोमवार को उक्त फैसला सुनाया।
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सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गांव कुरयां कला निवासी टीकाराम वर्मा ने नौ मई 2003 की रात करीब साढ़े 12 बजे खुटार थाने में तहरीर देकर बताया कि उसकी बहन गंगा देवी का विवाह चार साल पहले ग्राम महेशापुर में कृष्ण कुमार पुत्र टीकाराम से हुआ था। उस विवाह में इन लोगों ने अपनी बहन को क्षमता के अनुरूप दान-दहेज के साथ विदा किया था, लेकिन थोड़े ही दिनों बाद उसके पति, देवर, सास और ससुर ने दहेज में बाइक और टीवी न देने के आरोप में प्रताड़ित करने लगे। कई बार इसी मुद्दे पर उनकी बहन को मारा-पीटा गया। सूचना पाकर ये लोग बहन की ससुराल पहुंचे और बाइक की व्यवस्था करने का भरोसा देकर मसले को सुलझाया। करीब एक साल पहले उसकी बहन ने एक बेटे को जन्म दिया, लेकिन ससुराल वालों का रवैया उसके प्रति फिर भी नहीं सुधरा। आठ मई 2003 की शाम गंगा देवी के देवर लालाराम ने टेलीफोन पर उसके भाई को बताया कि उनकी बहन की तबीयत ज्यादा खराब है और वह उसेेउपचार के लिए शाहजहांपुर ले जा रहे हैं। यह सूचना पाकर मायके से शाहजहांपुर जाने को निकले, लेकिन खुटार पहुंचने पर पता चला कि बहन मर चुकी है। फिर वह लोग बहन की ससुराल पहुंचे, तो वहां उसकी लाश रखी हुई मिली। पड़ोसियों ने बताया कि बीते दो-तीन दिनों से गंगा देवी से मारपीट की जा रही थी और आठ मई 2003 को उसे कोई जहरीला पदार्थ खिला दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
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टीकाराम की तहरीर के आधार पर खुटार थाने में उसी रात को मृतका के पति, देवर, सास और ससुर पर आईपीसी की धारा 304बी के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई।
सीओ पुवायां ने मामले की विवेचना की और आईपीसी की धारा 306 के तहत चार्जशीट दायर हुई। सरकारी वकील वंशीलाल ने कुल सात गवाह पेश किए। अपर सत्र न्यायाधीश अष्टम ने सभी गवाहों, उभय पक्षों के वकीलों के तर्कों को सुनने एवं साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद सोमवार को उक्त फैसला सुनाया।
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