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दूसरे दिन भी गोताखोर नहीं लगा सके सुमित का सुराग
मकसूदापुर (बंडा)।
Updated Tue, 30 Jun 2015 11:43 PM IST
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सोमवार रात अनियंत्रित होकर शारदा नहर में गिरी कार को दूसरे दिन गोताखोरों की मदद से बाहर निकाल लिया गया, लेकिन गाड़ी चला रहे सुमित सिंह का कोई सुराग नहीं लग सका। मंगलवार को एसडीएम, सीओ, फायर बिग्रेड की टीम और पुलिस फोर्स मौजूद रही।
गांव लुकमानपुर बहेड़ा निवासी कुलदीप सिंह का 32 वर्षीय पुत्र सुमित सिंह उर्फ सुम्मी किसी काम से गांव अखत्यापुर की ओर गया था। रात लगभग साढ़े सात बजे वह वापस घर जा रहा था। अखत्यारपुर मोड़ के पास अचानक कार अनियंत्रित होकर शारदा नहर में जा गिरी। नहर पूरी तरह से भरी चल रही है। इस बीच बजाज पॉवर प्लांट से काम कर वापस जा रहे गांव नवदिया बंकी केे गुरमुख सिंह ने नहर के बीच से किसी के मदद को पुकारने की आवाज सुनी तो वह नहर के पास पहुंचे तो देखा कि कार की छत पर खड़ा एक युवक मदद की गुहार लगा रहा है।
गुरमुख सिंह ने सुमित के बताए फोन नंबर पर उनके घर सूचना दी। कुछ ही देर में मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। युवक ने बताया कि वह तैरना नहीं जानता है। भीड़ में शामिल कुछ गोताखोर तेज बहाव वाली नहर में बमुश्किल कार तक पहुंचे और सुमित को रस्से में बांध दिया। नहर के किनारे खड़े लोगों ने रस्से को खींचना शुरू कर दिया। थोड़ी दूर तक खिंचने के बाद अचानक रस्सा टूट गया और सुमित पानी में बह चले। नहर के किनारे खड़े कई वाहनों की लाइट में उन्हें लगभग सौ मीटर दूर तक बहते देखा गया। बाद में वह नहर में समा गए। रात में ही कई गोताखोरों ने सुमित की तलाश की, लेकिन नहर में पानी बहुत ज्यादा और तेज बहाव होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी।
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मंगलवार को खीरी जनपद के थाना पलिया के गांव श्रीनगर निवासी रामनक्षत्र, रामदयाल, विजयशंकर, पटवारी, दीनानाथ आदि गोताखोर मौके पर पहुंचे और नहर में सुमित की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका। गोताखोरों की मदद से गाड़ी को बमुश्किल बाहर निकाला जा सका। इस दौरान एसडीएम लालबहादुर, सीओ उमेश शर्मा, फायर बिग्रेड के महेंद्रपाल और एसओ बंडा राजीव मिश्रा फोर्स के साथ सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
नहर विभाग ही दे रहा है हादसों को दावत
सुखचैन सिंह
मकसूदापुर (बंडा)। शारदा नहर के पास सोमवार की शाम हुए हादसे पर गौर किया जाए तो नहर विभाग की लापरवाही सामने आती है। जिस मोड़ से सुमित सिंह की गाड़ी नहर में समाई है, उस मोड़ पर चार साल पहले भी ऐसे ही एक कार गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। तब दो लोगों को बमुश्किल बचाया जा सका था।
बता दें कि गांव अख्त्यारपुर से मकसूदापुर जाते समय रास्ते में एक मोड़ पड़ती है। इस मोड़ पर अख्त्यारपुर के सिख समाज के लोगों ने एक पुराने गुरूद्वारे की बीम डालकर सामने से रोक लगाने का प्रयास किया, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। आठ नवंबर 2011 में गांव अख्त्यारपुर के लखविंदर सिंह, सिमरजीत सिंह, हरदेव सिंह, बल्देव सिंह और गांव बरीबरा के बादाम सिंह कार से जाते समय इसी मोड़ पर नहर में घुस गए थे। हादसे में लखविंदर सिंह, सिमरजीत सिंह और बादाम सिंह की मौत हो गई थी। आसपास के लोगों ने हरदेव सिंह और बल्देव सिंह को बमुश्किल कार से बाहर निकाला था। उस समय बड़ा हादसा होने के बाद भी नहर विभाग ने इस मोड़ पर बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं किए। नतीजन सोमवार की शाम गांव अख्त्यारपुर का सुमित सिंह फिर से इसी मोड़ के फेर में फंसकर नहर में समा गया। मंगलवार को घटना स्थल पर इस बात की जोरों पर चर्चा रही और लोगों में नहर विभाग के अधिकारियों के प्रति रोष भी देखा गया।
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गांव लुकमानपुर बहेड़ा निवासी कुलदीप सिंह का 32 वर्षीय पुत्र सुमित सिंह उर्फ सुम्मी किसी काम से गांव अखत्यापुर की ओर गया था। रात लगभग साढ़े सात बजे वह वापस घर जा रहा था। अखत्यारपुर मोड़ के पास अचानक कार अनियंत्रित होकर शारदा नहर में जा गिरी। नहर पूरी तरह से भरी चल रही है। इस बीच बजाज पॉवर प्लांट से काम कर वापस जा रहे गांव नवदिया बंकी केे गुरमुख सिंह ने नहर के बीच से किसी के मदद को पुकारने की आवाज सुनी तो वह नहर के पास पहुंचे तो देखा कि कार की छत पर खड़ा एक युवक मदद की गुहार लगा रहा है।
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गुरमुख सिंह ने सुमित के बताए फोन नंबर पर उनके घर सूचना दी। कुछ ही देर में मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। युवक ने बताया कि वह तैरना नहीं जानता है। भीड़ में शामिल कुछ गोताखोर तेज बहाव वाली नहर में बमुश्किल कार तक पहुंचे और सुमित को रस्से में बांध दिया। नहर के किनारे खड़े लोगों ने रस्से को खींचना शुरू कर दिया। थोड़ी दूर तक खिंचने के बाद अचानक रस्सा टूट गया और सुमित पानी में बह चले। नहर के किनारे खड़े कई वाहनों की लाइट में उन्हें लगभग सौ मीटर दूर तक बहते देखा गया। बाद में वह नहर में समा गए। रात में ही कई गोताखोरों ने सुमित की तलाश की, लेकिन नहर में पानी बहुत ज्यादा और तेज बहाव होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी।
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मंगलवार को खीरी जनपद के थाना पलिया के गांव श्रीनगर निवासी रामनक्षत्र, रामदयाल, विजयशंकर, पटवारी, दीनानाथ आदि गोताखोर मौके पर पहुंचे और नहर में सुमित की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका। गोताखोरों की मदद से गाड़ी को बमुश्किल बाहर निकाला जा सका। इस दौरान एसडीएम लालबहादुर, सीओ उमेश शर्मा, फायर बिग्रेड के महेंद्रपाल और एसओ बंडा राजीव मिश्रा फोर्स के साथ सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
नहर विभाग ही दे रहा है हादसों को दावत
सुखचैन सिंह
मकसूदापुर (बंडा)। शारदा नहर के पास सोमवार की शाम हुए हादसे पर गौर किया जाए तो नहर विभाग की लापरवाही सामने आती है। जिस मोड़ से सुमित सिंह की गाड़ी नहर में समाई है, उस मोड़ पर चार साल पहले भी ऐसे ही एक कार गिरने से तीन लोगों की मौत हो गई थी। तब दो लोगों को बमुश्किल बचाया जा सका था।
बता दें कि गांव अख्त्यारपुर से मकसूदापुर जाते समय रास्ते में एक मोड़ पड़ती है। इस मोड़ पर अख्त्यारपुर के सिख समाज के लोगों ने एक पुराने गुरूद्वारे की बीम डालकर सामने से रोक लगाने का प्रयास किया, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। आठ नवंबर 2011 में गांव अख्त्यारपुर के लखविंदर सिंह, सिमरजीत सिंह, हरदेव सिंह, बल्देव सिंह और गांव बरीबरा के बादाम सिंह कार से जाते समय इसी मोड़ पर नहर में घुस गए थे। हादसे में लखविंदर सिंह, सिमरजीत सिंह और बादाम सिंह की मौत हो गई थी। आसपास के लोगों ने हरदेव सिंह और बल्देव सिंह को बमुश्किल कार से बाहर निकाला था। उस समय बड़ा हादसा होने के बाद भी नहर विभाग ने इस मोड़ पर बचाव के लिए कोई इंतजाम नहीं किए। नतीजन सोमवार की शाम गांव अख्त्यारपुर का सुमित सिंह फिर से इसी मोड़ के फेर में फंसकर नहर में समा गया। मंगलवार को घटना स्थल पर इस बात की जोरों पर चर्चा रही और लोगों में नहर विभाग के अधिकारियों के प्रति रोष भी देखा गया।