{"_id":"1a1c5f212f2117d052877b1d2a347519","slug":"lawyers-on-strike-high-court-reprimand-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"वकीलों की हड़ताल पर हाईकोर्ट की फटकार","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
वकीलों की हड़ताल पर हाईकोर्ट की फटकार
शाहजहांपुर
Updated Wed, 20 May 2015 07:40 PM IST
विज्ञापन
वकीलों की हड़ताल पर सख्त रुख अपनाते हुए उच्च न्यायालय की सात जजों की बैंच ने इसे अवैध करार दिया है। आदेश में कहा है कि विरोध अन्य तरीकों से भी किया जा सकता है। वकीलों को हड़ताल का कोई अधिकार नहीं है। हड़ताल या बायकाट से कार्य प्रभावित होता है। कोर्ट ने अपराधी प्रवृत्ति के वकीलों का डाटा फीड करने और न्यायालय में प्रवेश के लिए कर्मचारियों तथा वकीलों के बायोमैट्रिक कार्ड बनाने पर भी जोर दिया।
पिछले महीनों में हुई हडतालों से कार्य प्रभावित होने पर उच्च न्यायालय ने जनहित में स्वत: संज्ञान लेकर कहा है कि वकीलों को हड़ताल या कार्य बहिष्कार का अधिकार नहीं है। यहां तक कि सांकेतिक हड़ताल भी नहीं। अपने आदेश में सुप्रीमकोर्ट का 17 दिसंबर 2002 में हरीश उप्पल बनाम भारत संघ के मामले में दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि जरूरत होने पर शांतिपूर्वक जुलूस, प्रेसनोट, ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और बाहों में पट्टी बांधकर विरोध किया जा सकता है, वह भी कोर्ट परिसर के बाहर। हड़ताल गैरकानूनी है। इससे वादकारियों और वकीलों दोनों का नुकसान होता है। केवल अति गंभीर स्थिति में हड़ताल हो सकती है, वह भी एक दिन से ज्यादा नहीं।
कोर्ट ने जारी किए ये भी निर्देश
वकीलों और कर्मचारियों के जजी परिसर में प्रवेश के लिए बायोमैट्रिक कार्ड जारी हों। वकीलों और क्लर्कों को काले कोट में ही प्रवेश दिया जाए। वादकारियों, कर्मचारियों और वकीलों को प्रवेश पत्र जारी हाें। वे कर्मचारी जिन्हें कोर्ट आना पड़ता है, उनके लिए मासिक पास जारी हों। यह पास डीएम, एसपी या जिला शासकीय वकील की परमीशन से जारी होंगे। परिसर की सुरक्षा में तैनात कर्मचारी के अलावा अन्य कोई भी व्यक्ति असलाह नहीं लाएगा। गेट पर मेटल डिटेक्टर और परिसर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। यह निर्देश जिला कोर्ट सहित सभी न्यायालय के लिए हैं।
विज्ञापन
हड़ताल और सेंट्रल बार
पश्चिमी बेंच की मांग को लेकर यहां 1986 से प्रत्येक शनिवार को हड़ताल रहती है। यहां तक कि इस मुद्दे पर पश्चिमी क्षेत्र में आंदोलन होते रहे हैं फिर भी विगत दिनों सेंट्रल बार ने हड़ताल पर लगाम लगाई है। पिछले दिनों संत रविदास जयंती और परशुराम जयंती जैसे अवसरों पर वकीलों ने कार्य किया है। हालांकि एक जनवरी 2015 से अब तक 21 दिन हड़ताल पांच दिन शोकावकाश तथा वर्ष 2014 में 30 दिन हड़ताल तथा 20 दिन शोकावकाश के कारण कार्य प्रभावित हुआ है। हड़ताल न करने के हाईकोर्ट के निर्णय को सभी वकीलों ने स्वागत किया है। इनमें विवेक सक्सेना, अनूप सक्सेना, पंकज गुप्ता, अजय वर्मा, प्रमोद यादव, दुर्गेश मिश्र, अनंत सिंह आदि शामिल हैं।
विज्ञापन
पिछले महीनों में हुई हडतालों से कार्य प्रभावित होने पर उच्च न्यायालय ने जनहित में स्वत: संज्ञान लेकर कहा है कि वकीलों को हड़ताल या कार्य बहिष्कार का अधिकार नहीं है। यहां तक कि सांकेतिक हड़ताल भी नहीं। अपने आदेश में सुप्रीमकोर्ट का 17 दिसंबर 2002 में हरीश उप्पल बनाम भारत संघ के मामले में दिए गए निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि जरूरत होने पर शांतिपूर्वक जुलूस, प्रेसनोट, ज्ञापन, धरना-प्रदर्शन और बाहों में पट्टी बांधकर विरोध किया जा सकता है, वह भी कोर्ट परिसर के बाहर। हड़ताल गैरकानूनी है। इससे वादकारियों और वकीलों दोनों का नुकसान होता है। केवल अति गंभीर स्थिति में हड़ताल हो सकती है, वह भी एक दिन से ज्यादा नहीं।
विज्ञापन
कोर्ट ने जारी किए ये भी निर्देश
वकीलों और कर्मचारियों के जजी परिसर में प्रवेश के लिए बायोमैट्रिक कार्ड जारी हों। वकीलों और क्लर्कों को काले कोट में ही प्रवेश दिया जाए। वादकारियों, कर्मचारियों और वकीलों को प्रवेश पत्र जारी हाें। वे कर्मचारी जिन्हें कोर्ट आना पड़ता है, उनके लिए मासिक पास जारी हों। यह पास डीएम, एसपी या जिला शासकीय वकील की परमीशन से जारी होंगे। परिसर की सुरक्षा में तैनात कर्मचारी के अलावा अन्य कोई भी व्यक्ति असलाह नहीं लाएगा। गेट पर मेटल डिटेक्टर और परिसर में सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। यह निर्देश जिला कोर्ट सहित सभी न्यायालय के लिए हैं।
विज्ञापन
हड़ताल और सेंट्रल बार
पश्चिमी बेंच की मांग को लेकर यहां 1986 से प्रत्येक शनिवार को हड़ताल रहती है। यहां तक कि इस मुद्दे पर पश्चिमी क्षेत्र में आंदोलन होते रहे हैं फिर भी विगत दिनों सेंट्रल बार ने हड़ताल पर लगाम लगाई है। पिछले दिनों संत रविदास जयंती और परशुराम जयंती जैसे अवसरों पर वकीलों ने कार्य किया है। हालांकि एक जनवरी 2015 से अब तक 21 दिन हड़ताल पांच दिन शोकावकाश तथा वर्ष 2014 में 30 दिन हड़ताल तथा 20 दिन शोकावकाश के कारण कार्य प्रभावित हुआ है। हड़ताल न करने के हाईकोर्ट के निर्णय को सभी वकीलों ने स्वागत किया है। इनमें विवेक सक्सेना, अनूप सक्सेना, पंकज गुप्ता, अजय वर्मा, प्रमोद यादव, दुर्गेश मिश्र, अनंत सिंह आदि शामिल हैं।