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शाहजहांपुर और लोधीपुर में घुसा बाढ़ का पानी
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शाहजहांपुर के लोधीपुर क्षेत्र के एक मकान में भरा खन्नौत नदी की बाढ़ का पानी। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। शहर के निकट से होकर बहने वाली गर्रा और खन्नौत नदी उफनाने से सुभाषनगर और लोधीपुर में बाढ़ का पानी भर गया है, जिससे दर्जनों घर टापू बन गए हैं।गर्रा नदी में आई बाढ़ के साथ अजीजगंज में निर्माणाधीन पुल के पास डाम रोड की एक लेन कटान होने से कारण धंस गई। बाढ़ के प्रकोप को देखते हुए गर्रा के राजघाट पर पुलिस तैनाती करने के साथ मोटर बोट मंगा ली गई है।
उधर, गंगा और रामगंगा के उफनाने से कलान, मिर्जापुर और परौर क्षेत्र कई गांवों तक पानी पहुंच गया है। पिछले 24 घंटे के दौरान सभी नदियों का जलस्तर बढ़ा है। सिंचाई विभाग के अभियंता का कहना है कि नरौरा से 2.04 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर बढ़ेगा, लेकिन दूसरी नदियों में शुक्रवार से पानी कम होने के आसार हैं।
अजीजगंज में सिंचाई विभाग की पंप कैनाल तक गर्रा नदी के पश्चिमी तट पर करीब दो दशक पहले मिट्टी का कच्चा बांध बनाया गया था। इसी डाम पर अभी तक सिंगल लेन की रोड बनाई गई जो राईखेड़ा गांव होकर कपसेड़ा से पहले लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग से मिलती है। इसी मार्ग से ककरा में नगर निगम के निर्माणाधीन नए कार्यालय, इलेक्ट्रिक बसों के चार्जिंग स्टेशन, ईको पार्क आदि को जोड़ने के लिए गर्रा पर नया पुल बनाया जा रहा है। पुल बनने पर यातायात बढ़ने के मद्देनजर डाम रोड को चौड़ा कर डबल लेन बनाया गया है।
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गर्रा नदी निर्माणाधीन पुल के ठीक सामने सड़क का कटान करने लगी है। बृहस्पतिवार सुबह डाम रोड पर नदी की ओर वाली एक लेन का करीब 50 मीटर हिस्सा धंस गया। बाढ़ के कारण पुल निर्माण का काम बृहस्पतिवार को बंद रहा। नगर निगम के कर्मचारियों ने रोड पर आड़ी तिरछी बल्लियां लगाकर लोगों का आवागमन रोक दिया है। गर्रा नदी उफनाने पर बाढ़ का पानी सुभाषनगर मोहल्ले में घुस गया, जिससे कई घर पानी से घिर गए हैं।
राजघाट के पुराने गर्रा पुल के पास बाढ़ को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। एसपी के निर्देश पर वहां पुलिस तैनात कर दी गई है। उधर, खन्नौत नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी के तटीय इलाके लोधीपुर में कई मकान बाढ़ से चौतरफा घिरकर टापू बन गए हैं। इन घरों के लोग ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। इंदिरानगर कालोनी के पूर्वी हिस्से, बिसरात घाट से आगे प्रताप एन्क्लेव और दलेलगंज के आबादी क्षेत्रों के खन्नौत बिल्कुल करीब पहुंच गई है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक देहात में कलान के भैंसार बांध पर गंगा बुधवार की तुलना में 23 सेमी बढ़कर 142.40 मीटर पर बह रही है, जबकि रामगंगा 63 सेमी बढ़कर 160.88 मीटर पर पहुंच गई है। शहर के समीप गर्रा के जलस्तर में 20 और खन्नौत में 70 सेमी पानी बढ़ा है। दोनों नदियां क्रमश: 147.65 मीटर और 144.85 मीटर पर बह रही हैं। उधर, मिर्जापुर क्षेत्र में प्रशासन गंगा में बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। गंगा के खादर में बसी ग्राम पंचायत पैलानी उत्तर के मजरा आजादनगर निवासी इशहाक के अनुसार गंगा का बढ़ता जलस्तर डरा रहा है। इस्लामनगर के हाफिज मासूम अली ने का कहना है कि गंगा इसी तरह बढ़ती रही तो शुक्रवार सुबह तक बाढ़ का पानी गांव में आ जाएगा। जलालाबाद-ढाईघाट रोड पर स्थित गांव चौंरा निवासी कश्मीर सिंह का कहना है कि इसी तरह गंगा बढ़ती रही तो ढाईघाट मार्ग से बाढ़ का पानी गांव में आ जाएगा।
खन्नौत में डूबीं धान और तिलहनी फसलें
सिंधौली। खन्नौत नदी का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में नदी किनारे खेतों में खड़ीं धान और तिलहन की फसलें डूब गई हैं। दो दिन पहले हुई बारिश से खन्नौत का जलस्तर बढ़ रहा है। इसलिए नदी का पानी किनारे के खेतों में पहुंच गया है। फसल डूबने से किसान मायूस हैं। गांव बारापुर निवासी राजेश ने बताया कि खन्नौत नदी पुल के पास खेत में धान की फसल कटी पड़ी थी, लेकिन उसे उठाने से पहले ही रात में नदी का जल स्तर बढ़ने से खेत तक पानी पहुंच गया, जिस से धान की फसल डूब गई है। ओमपाल ने बताया कि बाढ़ का पानी उसके खेत की ओर बढ़ रहा है।
परौर में रामताल की ओर बढ़ी रामगंगा
परौर। उफनाई रामगंगा की एक धारा कस्बे के पुराने रामताल की ओर बढ़ रही है। रामताल से बाढ़ का पानी टकराया तो परौर और आसपास के कई गांवों का वजूद खतरे में पड़ जाएगा। सितंबर में आई बाढ़ में भूमि कटान और फसली नुकसान से तबाह हो चुके किसान दोबारा रामगंगा का रौद्र रूप देखकर अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। हाल में हुई बरसात में किसानों की धान, बाजरा, उर्द, तिल आदि खरीफ फसलें खराब हो गईं थीं। बृहस्पतिवार को कलान एसडीएम सौरभ भट्ट ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर निचले स्थानों पर रह रहे लोगों को सुरक्षित सथानों पर जाने के लिए आगाह किया। एसडीएम ने बताया कि पानी अधिक बढ़ने की दशा में प्रभावित परिवारों के स्कूल, ब्रह्मदेव परिसर में बने आवासों, पंचायत घर और अस्पताल के खाली पड़े भवनों में रहने की व्यवस्था की गई है।
परौर क्षेत्र में रामगंगा की धारा ने रामताल की ओर मुड़कर नाली बना दी है, उसमें रेत की बोरियां भरवाकर लगवाई जा रही हैं, ताकि पानी आबादी क्षेत्र की ओर न बढ़े। बाढ़ की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है, और उसे रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके लिए काफी संख्या में श्रमिक तैयार कर लिए गए हैं। - अनूप कुमार, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग
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उधर, गंगा और रामगंगा के उफनाने से कलान, मिर्जापुर और परौर क्षेत्र कई गांवों तक पानी पहुंच गया है। पिछले 24 घंटे के दौरान सभी नदियों का जलस्तर बढ़ा है। सिंचाई विभाग के अभियंता का कहना है कि नरौरा से 2.04 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा का जलस्तर बढ़ेगा, लेकिन दूसरी नदियों में शुक्रवार से पानी कम होने के आसार हैं।
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अजीजगंज में सिंचाई विभाग की पंप कैनाल तक गर्रा नदी के पश्चिमी तट पर करीब दो दशक पहले मिट्टी का कच्चा बांध बनाया गया था। इसी डाम पर अभी तक सिंगल लेन की रोड बनाई गई जो राईखेड़ा गांव होकर कपसेड़ा से पहले लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग से मिलती है। इसी मार्ग से ककरा में नगर निगम के निर्माणाधीन नए कार्यालय, इलेक्ट्रिक बसों के चार्जिंग स्टेशन, ईको पार्क आदि को जोड़ने के लिए गर्रा पर नया पुल बनाया जा रहा है। पुल बनने पर यातायात बढ़ने के मद्देनजर डाम रोड को चौड़ा कर डबल लेन बनाया गया है।
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गर्रा नदी निर्माणाधीन पुल के ठीक सामने सड़क का कटान करने लगी है। बृहस्पतिवार सुबह डाम रोड पर नदी की ओर वाली एक लेन का करीब 50 मीटर हिस्सा धंस गया। बाढ़ के कारण पुल निर्माण का काम बृहस्पतिवार को बंद रहा। नगर निगम के कर्मचारियों ने रोड पर आड़ी तिरछी बल्लियां लगाकर लोगों का आवागमन रोक दिया है। गर्रा नदी उफनाने पर बाढ़ का पानी सुभाषनगर मोहल्ले में घुस गया, जिससे कई घर पानी से घिर गए हैं।
राजघाट के पुराने गर्रा पुल के पास बाढ़ को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। एसपी के निर्देश पर वहां पुलिस तैनात कर दी गई है। उधर, खन्नौत नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी के तटीय इलाके लोधीपुर में कई मकान बाढ़ से चौतरफा घिरकर टापू बन गए हैं। इन घरों के लोग ताला लगाकर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। इंदिरानगर कालोनी के पूर्वी हिस्से, बिसरात घाट से आगे प्रताप एन्क्लेव और दलेलगंज के आबादी क्षेत्रों के खन्नौत बिल्कुल करीब पहुंच गई है।
बाढ़ नियंत्रण कक्ष के मुताबिक देहात में कलान के भैंसार बांध पर गंगा बुधवार की तुलना में 23 सेमी बढ़कर 142.40 मीटर पर बह रही है, जबकि रामगंगा 63 सेमी बढ़कर 160.88 मीटर पर पहुंच गई है। शहर के समीप गर्रा के जलस्तर में 20 और खन्नौत में 70 सेमी पानी बढ़ा है। दोनों नदियां क्रमश: 147.65 मीटर और 144.85 मीटर पर बह रही हैं। उधर, मिर्जापुर क्षेत्र में प्रशासन गंगा में बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। गंगा के खादर में बसी ग्राम पंचायत पैलानी उत्तर के मजरा आजादनगर निवासी इशहाक के अनुसार गंगा का बढ़ता जलस्तर डरा रहा है। इस्लामनगर के हाफिज मासूम अली ने का कहना है कि गंगा इसी तरह बढ़ती रही तो शुक्रवार सुबह तक बाढ़ का पानी गांव में आ जाएगा। जलालाबाद-ढाईघाट रोड पर स्थित गांव चौंरा निवासी कश्मीर सिंह का कहना है कि इसी तरह गंगा बढ़ती रही तो ढाईघाट मार्ग से बाढ़ का पानी गांव में आ जाएगा।
खन्नौत में डूबीं धान और तिलहनी फसलें
सिंधौली। खन्नौत नदी का जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में नदी किनारे खेतों में खड़ीं धान और तिलहन की फसलें डूब गई हैं। दो दिन पहले हुई बारिश से खन्नौत का जलस्तर बढ़ रहा है। इसलिए नदी का पानी किनारे के खेतों में पहुंच गया है। फसल डूबने से किसान मायूस हैं। गांव बारापुर निवासी राजेश ने बताया कि खन्नौत नदी पुल के पास खेत में धान की फसल कटी पड़ी थी, लेकिन उसे उठाने से पहले ही रात में नदी का जल स्तर बढ़ने से खेत तक पानी पहुंच गया, जिस से धान की फसल डूब गई है। ओमपाल ने बताया कि बाढ़ का पानी उसके खेत की ओर बढ़ रहा है।
परौर में रामताल की ओर बढ़ी रामगंगा
परौर। उफनाई रामगंगा की एक धारा कस्बे के पुराने रामताल की ओर बढ़ रही है। रामताल से बाढ़ का पानी टकराया तो परौर और आसपास के कई गांवों का वजूद खतरे में पड़ जाएगा। सितंबर में आई बाढ़ में भूमि कटान और फसली नुकसान से तबाह हो चुके किसान दोबारा रामगंगा का रौद्र रूप देखकर अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। हाल में हुई बरसात में किसानों की धान, बाजरा, उर्द, तिल आदि खरीफ फसलें खराब हो गईं थीं। बृहस्पतिवार को कलान एसडीएम सौरभ भट्ट ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण कर निचले स्थानों पर रह रहे लोगों को सुरक्षित सथानों पर जाने के लिए आगाह किया। एसडीएम ने बताया कि पानी अधिक बढ़ने की दशा में प्रभावित परिवारों के स्कूल, ब्रह्मदेव परिसर में बने आवासों, पंचायत घर और अस्पताल के खाली पड़े भवनों में रहने की व्यवस्था की गई है।
परौर क्षेत्र में रामगंगा की धारा ने रामताल की ओर मुड़कर नाली बना दी है, उसमें रेत की बोरियां भरवाकर लगवाई जा रही हैं, ताकि पानी आबादी क्षेत्र की ओर न बढ़े। बाढ़ की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है, और उसे रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके लिए काफी संख्या में श्रमिक तैयार कर लिए गए हैं। - अनूप कुमार, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग