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निजी स्कूलों में फीस नियंत्रित नहीं होने पर गरजे व्यापारी
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शाहजहांपुर। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड से संचालित निजी स्कूलों में अभिभावकों से मनमानी फीस लिए जाने पर प्रतिनिधि उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारी मंगलवार को सड़क पर उतरकर शासन-प्रशासन के खिलाफ गरजे। उन्होंने इस मुद्दे पर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया। बाद में संगठन के पदाधिकारी जिला अध्यक्ष मनीष गुप्ता के नेतृत्व में अतिरिक्त मजिस्ट्रेट सौरभ गंगवार से मिले और उन्हें मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया।
ज्ञापन मेें कहा गया है कि सीबीएसई, आईसीएसई और आईएससी बोर्ड से संचालित लगभग सभी स्कूलों ने शिक्षा को व्यापारिक रूप दे रखा है। इन स्कूलों में फीस इतनी ज्यादा है कि सामान्य वर्ग के लोगों की पहुंच से बाहर हैं। यदि इसी तरह स्कूलों की फीस बढ़ती गई तो बेटियां पढ़ाने का प्रधानमंत्री का सपना पूरा नहीं हो सका। सरकार के इस मिशन को इन स्कूलों द्वारा पलीता लगाया जा रहा है। इसलिए बेटियों को उच्च शिक्षित करने का सपना पूरा करने के लिए ऐसे स्कूलों की फीस नियंत्रित होनी चाहिए। प्रदर्शन में विनय अग्रवाल, रामकुमार गुप्ता, आलोक भारती, राजीव कुमार, राजू बग्गा, इरशाद, सचिन अग्रवाल, पप्पू राठौर आदि शामिल रहे।
मांटेसरी स्कूलों में महंगी फीस के कारण बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। विद्यालय प्रबंध तंत्र प्रतिवर्ष फीस बढ़ाकर अभिभावकों का बजट खराब कर देते हैं। मध्यम वर्ग महंगाई के कारण बेहद परेशान हैं जहां एक ओर फीस लगातार बढ़ रही है वहीं किताबों के दाम भी आसमान को छू रहे हैं। प्रशासन को अंकुश लगाना चाहिए।
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विमला गुप्ता, अभिभावक
स्कूलों की फीस लगातार बढ़ती जा रही है छोटे-छोटे बच्चों की फीस हजारों रुपये में पहुंच रही हैं कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है विद्यालय प्रबंध तंत्र मोटी कमाई कर रहे हैं इसके अलावा किताबों और ड्रेस में भी मुनाफा कमा रहे है। स्कूलों की जांच कराकर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरोज सिंह, अभिभावक
सरकार के अनुसार स्कूल संचालक नियमानुसार अधिकतम नौ प्रतिशत तक फीस बढ़ा सकते हैं, इसके बावजूद किसी स्कूल में पिछले दो-तीन वर्षों से शुल्क वृद्धि नहीं की गई है। इसकी सूचना डीआईओएस को प्रतिवर्ष दी जा रही है। लोगों को नेतागिरी चमकाने के लिए अनावश्यक आरोप लगाने की आदत पड़ गई है।
विपिन अग्रवाल, अध्यक्ष इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन
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ज्ञापन मेें कहा गया है कि सीबीएसई, आईसीएसई और आईएससी बोर्ड से संचालित लगभग सभी स्कूलों ने शिक्षा को व्यापारिक रूप दे रखा है। इन स्कूलों में फीस इतनी ज्यादा है कि सामान्य वर्ग के लोगों की पहुंच से बाहर हैं। यदि इसी तरह स्कूलों की फीस बढ़ती गई तो बेटियां पढ़ाने का प्रधानमंत्री का सपना पूरा नहीं हो सका। सरकार के इस मिशन को इन स्कूलों द्वारा पलीता लगाया जा रहा है। इसलिए बेटियों को उच्च शिक्षित करने का सपना पूरा करने के लिए ऐसे स्कूलों की फीस नियंत्रित होनी चाहिए। प्रदर्शन में विनय अग्रवाल, रामकुमार गुप्ता, आलोक भारती, राजीव कुमार, राजू बग्गा, इरशाद, सचिन अग्रवाल, पप्पू राठौर आदि शामिल रहे।
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मांटेसरी स्कूलों में महंगी फीस के कारण बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। विद्यालय प्रबंध तंत्र प्रतिवर्ष फीस बढ़ाकर अभिभावकों का बजट खराब कर देते हैं। मध्यम वर्ग महंगाई के कारण बेहद परेशान हैं जहां एक ओर फीस लगातार बढ़ रही है वहीं किताबों के दाम भी आसमान को छू रहे हैं। प्रशासन को अंकुश लगाना चाहिए।
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विमला गुप्ता, अभिभावक
स्कूलों की फीस लगातार बढ़ती जा रही है छोटे-छोटे बच्चों की फीस हजारों रुपये में पहुंच रही हैं कोई भी अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है विद्यालय प्रबंध तंत्र मोटी कमाई कर रहे हैं इसके अलावा किताबों और ड्रेस में भी मुनाफा कमा रहे है। स्कूलों की जांच कराकर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सरोज सिंह, अभिभावक
सरकार के अनुसार स्कूल संचालक नियमानुसार अधिकतम नौ प्रतिशत तक फीस बढ़ा सकते हैं, इसके बावजूद किसी स्कूल में पिछले दो-तीन वर्षों से शुल्क वृद्धि नहीं की गई है। इसकी सूचना डीआईओएस को प्रतिवर्ष दी जा रही है। लोगों को नेतागिरी चमकाने के लिए अनावश्यक आरोप लगाने की आदत पड़ गई है।
विपिन अग्रवाल, अध्यक्ष इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन