{"_id":"610d8d328ebc3e88cb4ba960","slug":"agricultural-shahjahanpur-news-bly455591451","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाढ़ का पानी खेतों में भरा होने से वैकल्पिक फसलों की बुआई बाधित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाढ़ का पानी खेतों में भरा होने से वैकल्पिक फसलों की बुआई बाधित
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शाहजहांपुर। गंगा-रामगंगा में पानी तो कम हो गया, लेकिन तटवर्ती गांवों के संपर्क मार्गों पर पानी अभी भरा है। उधर, बाढ़ के पानी में डूबने से खेतों में खड़ी सैकड़ों बीघा फसलें खराब हो गई हैं। इससे किसान परेशान हैं।
दो सप्ताह पहले उत्तराखंड से लेकर पश्चिमी उप्र में व्यापक वर्षा होने से बांधों और बैराजों को ओवरफ्लो होने से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने वहां से नदियों में पानी की निकासी बढ़ाई तो तिलहर तहसील में जैतीपुर से लेकर परौर क्षेत्र तक रामगंगा और ढाई घाट से लेकर मिर्जापुर तक गंगा के तटवर्ती गांवों में बाढ़ के हालात बनने लगे। पानी ज्यादा बढ़ने पर नदियां उफनाईं तो किनारे के खेत डूबने के साथ गंगा का पानी गांवों के संपर्क मार्गों को लांघकर मिर्जापुर क्षेत्र में आजादनगर और इस्लामनगर गांवों के घरों तक पहुंच गया। दो दिन तक बाढ़ के हालात विकट बने रहने के बाद पहले रामगंगा में उतार शुरू हुआ और अब बीते दो दिन से गंगा में पानी घट रहा है।
इससे गांवों के आबादी क्षेत्र को बाढ़ की विपदा टलने से थोड़ी राहत मिली, लेकिन किसानों पर दोहरी मार पडने से वह खासे परेशान हैं। जिन किसानों की जमीनें पूरी तरह कटकर रामगंगा में समा गईं, उनकी आजीविका का सहारा छिन गया और वह पूरी तरह शासन-प्रशासन के रहमोकरम पर निर्भर हैं। तमाम ऐसे किसान हैं, जिनकी जमीनें नदी में कटने से बच गई, लेकिन उनमें बोई गई फसलें दस दिन पानी में डूबी रहने से नष्ट हो गई हैं। यह किसान नए सिरे से वैकल्पिक फसलें बोना चाह रहे हैं, लेकिन खेतों में भरा पानी नहीं निकलने से वह बुआई नहीं कर पा रहे हैं।
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इधर, बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि शुक्रवार को दूसरे दिन भी भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर पांच सेमी कम हुआ है। नरौरा बैराज से गंगा में आज निकला 82930 क्यूसेक पानी बीते दिन की तुलना में पांच हजार क्यूसेक कम होने के कारण गंगा के जलस्तर में गिरावट आगे भी जारी रहेगी। सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुसार खो, हरेली, किच्छा, रामनगर आदि बैराजों से रामगंगा में 16113 क्यूसेक पानी निकल रहा है। पानी की यह मात्रा बीते दिन की तुलना में थोड़ी ज्यादा है, लेकिन रामगंगा आज 27 सेमी कम हुई और तेज बारिश नहीं होने पर उसमें पानी अभी और कम होगा।
गंगा के तटीय गांवों का एडीएम ने किया निरीक्षण
आपदा राहत प्रकोष्ठ प्रभारी/एडीएम फाइनेंस गिरिजेश कुमार चौधरी ने शुक्रवार को एसडीएम रमेश बाबू के साथ मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा की बाढ़ से प्रभावित ग्राम पंचायत पैलानी उत्तरी के मजरा आजादनगर और इस्लामनगर का निरीक्षण किया। उन्होंने आजादनगर के बाढ़ पीड़ितों की मांग पर उन्हें बाढ़ से सुरक्षित चौंरा-बसोला नगरा मार्ग पर ग्राम समाज की लगभग एक हेक्टेयर जमीन पर बसाने का प्रस्ताव तीन दिन में एसडीएम के माध्यम से भेजने के क्षेत्रीय लेखपाल प्रद्युमन प्रसाद को निर्देश दिए। इस दौरान ग्राम प्रधान मोईन बेगम के पति फारूक अली ने बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए ग्राम समाज की जमीन कम पड़ने पर अपनी एक एकड़ निजी कृषि भूमि भी निशुल्क देने का वायदा किया। समाजसेवी रिजवान अहमद ने अधिकारियों को बताया कि आजाद नगर में 24 परिवारों के सरकारी आवास बने हुए हैं। इन सरकारी आवासों की ईंट निकालकर नये स्थान पर बाढ़पीड़ितों के पुनर्वास के लिए लिंटर आदि में आने वाले खर्च में वह मदद करेंगे। बाढ़ पीड़ितों की मांग पर एसडीएम ने शीघ्र ही निशुल्क राशन वितरण कराने का आश्वासन दिया।
बाढ़ पीड़ित किसानों की बात
15 बीघा खेत में तिल की फसल लेने की तैयारी की थी, लेकिन बुआई के दूसरे दिन सैलाब आ जाने से खेत रामगंगा में डूब गया। बीते दिन जाकर देखा तो खेत की फसल खराब हो चुकी थी। - रामेश्वर दयाल प्रजापति, मोहनपुर (परौर)
रामगंगा के पार 40 बीघा खेत में तिल और बाजरा की फसल बोई थी। फसल होती तो पूरे साल घर की गाड़ी खिंच जाती, लेकिन बुआई के तीसरे दिन आई बाढ़ ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। - चुन्नी लाल, बिचपुरी (परौर)
हमने नदी के किनारे वाले खेत में सब्जी की खेती इस आस में की थी कि बिक्री से रोजाना नगदी मिलने पर गृहस्थी का खर्च चलेगा, लेकिन सब कुछ बाढ़ में बह गया। - धर्मजीत, नारायणनगर पश्चिमी (परौर)
फसलों की रखवाली के लिए कटरी के खेत में झोपड़ी डाली थी, लेकिन बाढ़ आने पर उधर जा नहीं सका। बीते दिन खेत जाने पर फसल बरबाद मिली। खेत में पानी होने से अगली फसलें लेना कठिन हो रहा है। - शिवपाल सिंह, मंझा (परौर)
बाढ़ से जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं, वह दस दिन बाद उर्द की बुआई नहीं कर पाएंगे क्योंकि तब तक उसकी बुआई का समय निकल जाएगा। खेत सूखने के बाद किसान मक्का, मूंग और तिलहन में शामिल राई-तोरिया की बुआई कर सकते हैं क्योंकि यह फसलें 60 से 70 दिन में परिपक्व होकर कटने लायक हो जाएंगी। - डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी
नदियों के तटवर्ती गांवों के जिन किसानों की फसलें बाढ़ में डूबने के कारण खराब अथवा नष्ट हो गई हैं या फिर भूमि कटान से जिनके खेत रामगंगा में समा गए, उनका राजस्व विभाग के कर्मचारियों की टीमों से सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे की प्रक्रिया अगस्त माह के अंत तक जारी रहेगी क्योंकि तब तक मानसून प्रभावी रहने के आसार हैं। बाद में नुकसान से प्रभावित किसानों को शासन से अनुमन्य उचित आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। - रमेश बाबू, एसडीएम कलान
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दो सप्ताह पहले उत्तराखंड से लेकर पश्चिमी उप्र में व्यापक वर्षा होने से बांधों और बैराजों को ओवरफ्लो होने से बचाने के लिए सिंचाई विभाग ने वहां से नदियों में पानी की निकासी बढ़ाई तो तिलहर तहसील में जैतीपुर से लेकर परौर क्षेत्र तक रामगंगा और ढाई घाट से लेकर मिर्जापुर तक गंगा के तटवर्ती गांवों में बाढ़ के हालात बनने लगे। पानी ज्यादा बढ़ने पर नदियां उफनाईं तो किनारे के खेत डूबने के साथ गंगा का पानी गांवों के संपर्क मार्गों को लांघकर मिर्जापुर क्षेत्र में आजादनगर और इस्लामनगर गांवों के घरों तक पहुंच गया। दो दिन तक बाढ़ के हालात विकट बने रहने के बाद पहले रामगंगा में उतार शुरू हुआ और अब बीते दो दिन से गंगा में पानी घट रहा है।
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इससे गांवों के आबादी क्षेत्र को बाढ़ की विपदा टलने से थोड़ी राहत मिली, लेकिन किसानों पर दोहरी मार पडने से वह खासे परेशान हैं। जिन किसानों की जमीनें पूरी तरह कटकर रामगंगा में समा गईं, उनकी आजीविका का सहारा छिन गया और वह पूरी तरह शासन-प्रशासन के रहमोकरम पर निर्भर हैं। तमाम ऐसे किसान हैं, जिनकी जमीनें नदी में कटने से बच गई, लेकिन उनमें बोई गई फसलें दस दिन पानी में डूबी रहने से नष्ट हो गई हैं। यह किसान नए सिरे से वैकल्पिक फसलें बोना चाह रहे हैं, लेकिन खेतों में भरा पानी नहीं निकलने से वह बुआई नहीं कर पा रहे हैं।
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इधर, बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि शुक्रवार को दूसरे दिन भी भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर पांच सेमी कम हुआ है। नरौरा बैराज से गंगा में आज निकला 82930 क्यूसेक पानी बीते दिन की तुलना में पांच हजार क्यूसेक कम होने के कारण गंगा के जलस्तर में गिरावट आगे भी जारी रहेगी। सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र के अनुसार खो, हरेली, किच्छा, रामनगर आदि बैराजों से रामगंगा में 16113 क्यूसेक पानी निकल रहा है। पानी की यह मात्रा बीते दिन की तुलना में थोड़ी ज्यादा है, लेकिन रामगंगा आज 27 सेमी कम हुई और तेज बारिश नहीं होने पर उसमें पानी अभी और कम होगा।
गंगा के तटीय गांवों का एडीएम ने किया निरीक्षण
आपदा राहत प्रकोष्ठ प्रभारी/एडीएम फाइनेंस गिरिजेश कुमार चौधरी ने शुक्रवार को एसडीएम रमेश बाबू के साथ मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा की बाढ़ से प्रभावित ग्राम पंचायत पैलानी उत्तरी के मजरा आजादनगर और इस्लामनगर का निरीक्षण किया। उन्होंने आजादनगर के बाढ़ पीड़ितों की मांग पर उन्हें बाढ़ से सुरक्षित चौंरा-बसोला नगरा मार्ग पर ग्राम समाज की लगभग एक हेक्टेयर जमीन पर बसाने का प्रस्ताव तीन दिन में एसडीएम के माध्यम से भेजने के क्षेत्रीय लेखपाल प्रद्युमन प्रसाद को निर्देश दिए। इस दौरान ग्राम प्रधान मोईन बेगम के पति फारूक अली ने बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए ग्राम समाज की जमीन कम पड़ने पर अपनी एक एकड़ निजी कृषि भूमि भी निशुल्क देने का वायदा किया। समाजसेवी रिजवान अहमद ने अधिकारियों को बताया कि आजाद नगर में 24 परिवारों के सरकारी आवास बने हुए हैं। इन सरकारी आवासों की ईंट निकालकर नये स्थान पर बाढ़पीड़ितों के पुनर्वास के लिए लिंटर आदि में आने वाले खर्च में वह मदद करेंगे। बाढ़ पीड़ितों की मांग पर एसडीएम ने शीघ्र ही निशुल्क राशन वितरण कराने का आश्वासन दिया।
बाढ़ पीड़ित किसानों की बात
15 बीघा खेत में तिल की फसल लेने की तैयारी की थी, लेकिन बुआई के दूसरे दिन सैलाब आ जाने से खेत रामगंगा में डूब गया। बीते दिन जाकर देखा तो खेत की फसल खराब हो चुकी थी। - रामेश्वर दयाल प्रजापति, मोहनपुर (परौर)
रामगंगा के पार 40 बीघा खेत में तिल और बाजरा की फसल बोई थी। फसल होती तो पूरे साल घर की गाड़ी खिंच जाती, लेकिन बुआई के तीसरे दिन आई बाढ़ ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। - चुन्नी लाल, बिचपुरी (परौर)
हमने नदी के किनारे वाले खेत में सब्जी की खेती इस आस में की थी कि बिक्री से रोजाना नगदी मिलने पर गृहस्थी का खर्च चलेगा, लेकिन सब कुछ बाढ़ में बह गया। - धर्मजीत, नारायणनगर पश्चिमी (परौर)
फसलों की रखवाली के लिए कटरी के खेत में झोपड़ी डाली थी, लेकिन बाढ़ आने पर उधर जा नहीं सका। बीते दिन खेत जाने पर फसल बरबाद मिली। खेत में पानी होने से अगली फसलें लेना कठिन हो रहा है। - शिवपाल सिंह, मंझा (परौर)
बाढ़ से जिन किसानों की फसलें खराब हुई हैं, वह दस दिन बाद उर्द की बुआई नहीं कर पाएंगे क्योंकि तब तक उसकी बुआई का समय निकल जाएगा। खेत सूखने के बाद किसान मक्का, मूंग और तिलहन में शामिल राई-तोरिया की बुआई कर सकते हैं क्योंकि यह फसलें 60 से 70 दिन में परिपक्व होकर कटने लायक हो जाएंगी। - डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी
नदियों के तटवर्ती गांवों के जिन किसानों की फसलें बाढ़ में डूबने के कारण खराब अथवा नष्ट हो गई हैं या फिर भूमि कटान से जिनके खेत रामगंगा में समा गए, उनका राजस्व विभाग के कर्मचारियों की टीमों से सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे की प्रक्रिया अगस्त माह के अंत तक जारी रहेगी क्योंकि तब तक मानसून प्रभावी रहने के आसार हैं। बाद में नुकसान से प्रभावित किसानों को शासन से अनुमन्य उचित आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी। - रमेश बाबू, एसडीएम कलान