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टिड्डियों के हमले से फसलें बचाने को कई विभाग हुए सक्रिय
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शाहजहांपुर। राजस्थान के रास्ते प्रदेश के कई उत्तर-पश्चिमी जनपदों में धावा बोल चुके टिड्डी दलों से फसलों को बचाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। डीएम के निर्देश पर सीडीओ महेंद्र सिंह तंवर की अध्यक्षता में कृषि, कृषि रक्षा और गन्ना विभागों के अधिकारियों की निगरानी कमेटी गठित की गई है। कमेटी में शामिल उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, जिला कृषि रक्षा अधिकारी और जिला गन्ना अधिकारी ने अन्य संबंधित विभागों के साथ मिलकर किसानों को सतर्क करना शुरू कर दिया है। राजस्व और पंचायत राज विभाग के ग्राम स्तरीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के जरिये किसानों को अलर्ट करने के साथ टिड्डी दल दिखने की सूचना तुरंत संबंधित एसडीएम और जिला स्तरीय अधिकारियों को देने के लिए कहा गया है।
हमले के बाद कीटनाशक छिड़काव के लिए स्प्रेयर चिह्नित
फसलों पर टिड्डियों का हमला होने पर प्रभावित क्षेत्र मेें कई कीटनाशकों के छिड़काव की जरूरत पड़ेगी। इसे देखते कृषि रक्षा विभाग ने ब्लॉक बार किसानों के ट्रैक्टर और माउंटेड स्प्रेयर मशीनेें चिह्नित कराकर उनकी सूची बना ली गई हैं। जिस क्षेत्र में टिड्डी दल डेरा जमाएगा, वहां के किसानों से उनके ट्रैक्टर व स्प्रे मशीनें से छिड़काव किया जाएगा। छिड़काव के लिए सभी विकास खंडों की कृषि रक्षा इकाइयों में आवश्यक रसायनों का पर्याप्त स्टॉक है और उसका सत्यापन भी करा लिया गया है। किसी क्षेत्र विशेष में ज्यादा कीटनाशक की जरूरत पड़ने पर उन्हें नजदीकी ब्लॉक की दूसरी कृषि रक्षा इकाई से मंगा लिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि टिड्डी उन्मूलन में अलग-अलग सांद्रता वाले मैलाथियान, क्लोरोपायरीफास, क्यूनालफास, लैमडासाइहैलोथिन, फिप्रोनिल आदि कृषि रक्षा रसायन इस्तेमाल होते हैं और यह सभी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
टिड्डियों के सफाए से ज्यादा जरूरी है सतर्कता
टिड्डियों का सफाया करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. एनपी गुप्ता ने किसानों के लिए विस्तृत गाइड लाइन जारी की है। उनके मुताबिक यदि किसान पहले से सावधानियां बरत लें तो टिड्डी उनके खेत नी डेरा नहीं जमा पाएंगी। उन्होंने बताया कि डेजर्ट हापर प्रजाति का भूरे रंग का यह कीट फूल, फल, पत्ती, बीज, अंकुर यहां तक कि पेड़ की छाल भी अपने वजन के बराबर चट कर जाता है। इनका एक झुंड दिन भर में 2500-3000 लोगों का भोजन खा लेता है। हरियाली इन्हें ज्यादा रास आती है। इनसे फसल को बचाने का सबसे बेहतर उपाय यही है कि 40 मिली नीम तेल में दस ग्राम कपड़े धोने का पाउडर मिलाकर 100 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें तो टिड्डियां ऐसी फसल नहीं खाएंगी और उपज पर कीटनाशकों का दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ेगा। यदि इनका हमला हो जाए तो सुबह होते ही पांच प्रतिशत तीव्रता का 25 किलो मैलाथियान अथवा इतनी ही मात्रा में 1.5 प्रतिशत तीव्रता वाले क्विनालफास का घोल बनाकर स्प्रे करें क्योंकि दिन में दस बजे तक टिड्डी दल अपने डेरे की जगह बदलने लगता है और तब उनका सफाया करना कठिन होगा।
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टिड्डियों को नष्ट कशरना असंभव नहीं, लेकिन कठिन जरूर है। इसलिए किसान भाई फसलों की देखभाल को लेकर थोड़ा सतर्क रहें। सबसे कारगर उपाय यही होगा कि खेत के आसपास इन कीटों को उड़ते देख वहां थाली, पीपे, बर्तन, नगाड़े, ढोल, लाउडस्पीकर, साउंड सिस्टम आदि तेज आवाज में बजाएं क्योंकि यह कीट तीव्र शोर सुनकर भागने लगता है। गनीमत है कि अभी जिले में इसका प्रकोप नहीं हुआ है, लेकिन इसका आशय यह नहीं कि यहां टिड्डियों का हमला नहीं होगा।
-डॉ. नरेंद्र प्रसाद, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
टिड्डी नियंत्रण को सभी विकास खंडों की कृषि रक्षा इकाइयों पर कंट्रोल रूम खोले जा चुके हैं। हालांकि, बीते 24 घंटे में मौसम मेें हुए बदलाव से हवा का रुख बदला है। इसका कारण टिड्डियों का दल हवा की दिशा में सोनभद्र और मिर्जापुर पहुंच गया है। इसके बावजूद किसानों को यह मानकर सचेत रहना होगा कि खतरा अभी टला नहीं है। इन दिनों मौसम बहुत जल्दी बदलता है। यदि हवा की दिशा बदली तो टिड्डियों का समूह वापस जनपद की ओर लौट सकता है। इसीलिए उनके नियंत्रण और सफाए पर ध्यान केंद्रित रखना होगा।
-शिवशंकर गौतम, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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हमले के बाद कीटनाशक छिड़काव के लिए स्प्रेयर चिह्नित
फसलों पर टिड्डियों का हमला होने पर प्रभावित क्षेत्र मेें कई कीटनाशकों के छिड़काव की जरूरत पड़ेगी। इसे देखते कृषि रक्षा विभाग ने ब्लॉक बार किसानों के ट्रैक्टर और माउंटेड स्प्रेयर मशीनेें चिह्नित कराकर उनकी सूची बना ली गई हैं। जिस क्षेत्र में टिड्डी दल डेरा जमाएगा, वहां के किसानों से उनके ट्रैक्टर व स्प्रे मशीनें से छिड़काव किया जाएगा। छिड़काव के लिए सभी विकास खंडों की कृषि रक्षा इकाइयों में आवश्यक रसायनों का पर्याप्त स्टॉक है और उसका सत्यापन भी करा लिया गया है। किसी क्षेत्र विशेष में ज्यादा कीटनाशक की जरूरत पड़ने पर उन्हें नजदीकी ब्लॉक की दूसरी कृषि रक्षा इकाई से मंगा लिया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि टिड्डी उन्मूलन में अलग-अलग सांद्रता वाले मैलाथियान, क्लोरोपायरीफास, क्यूनालफास, लैमडासाइहैलोथिन, फिप्रोनिल आदि कृषि रक्षा रसायन इस्तेमाल होते हैं और यह सभी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
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टिड्डियों के सफाए से ज्यादा जरूरी है सतर्कता
टिड्डियों का सफाया करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. एनपी गुप्ता ने किसानों के लिए विस्तृत गाइड लाइन जारी की है। उनके मुताबिक यदि किसान पहले से सावधानियां बरत लें तो टिड्डी उनके खेत नी डेरा नहीं जमा पाएंगी। उन्होंने बताया कि डेजर्ट हापर प्रजाति का भूरे रंग का यह कीट फूल, फल, पत्ती, बीज, अंकुर यहां तक कि पेड़ की छाल भी अपने वजन के बराबर चट कर जाता है। इनका एक झुंड दिन भर में 2500-3000 लोगों का भोजन खा लेता है। हरियाली इन्हें ज्यादा रास आती है। इनसे फसल को बचाने का सबसे बेहतर उपाय यही है कि 40 मिली नीम तेल में दस ग्राम कपड़े धोने का पाउडर मिलाकर 100 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें तो टिड्डियां ऐसी फसल नहीं खाएंगी और उपज पर कीटनाशकों का दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ेगा। यदि इनका हमला हो जाए तो सुबह होते ही पांच प्रतिशत तीव्रता का 25 किलो मैलाथियान अथवा इतनी ही मात्रा में 1.5 प्रतिशत तीव्रता वाले क्विनालफास का घोल बनाकर स्प्रे करें क्योंकि दिन में दस बजे तक टिड्डी दल अपने डेरे की जगह बदलने लगता है और तब उनका सफाया करना कठिन होगा।
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टिड्डियों को नष्ट कशरना असंभव नहीं, लेकिन कठिन जरूर है। इसलिए किसान भाई फसलों की देखभाल को लेकर थोड़ा सतर्क रहें। सबसे कारगर उपाय यही होगा कि खेत के आसपास इन कीटों को उड़ते देख वहां थाली, पीपे, बर्तन, नगाड़े, ढोल, लाउडस्पीकर, साउंड सिस्टम आदि तेज आवाज में बजाएं क्योंकि यह कीट तीव्र शोर सुनकर भागने लगता है। गनीमत है कि अभी जिले में इसका प्रकोप नहीं हुआ है, लेकिन इसका आशय यह नहीं कि यहां टिड्डियों का हमला नहीं होगा।
-डॉ. नरेंद्र प्रसाद, कृषि वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र
टिड्डी नियंत्रण को सभी विकास खंडों की कृषि रक्षा इकाइयों पर कंट्रोल रूम खोले जा चुके हैं। हालांकि, बीते 24 घंटे में मौसम मेें हुए बदलाव से हवा का रुख बदला है। इसका कारण टिड्डियों का दल हवा की दिशा में सोनभद्र और मिर्जापुर पहुंच गया है। इसके बावजूद किसानों को यह मानकर सचेत रहना होगा कि खतरा अभी टला नहीं है। इन दिनों मौसम बहुत जल्दी बदलता है। यदि हवा की दिशा बदली तो टिड्डियों का समूह वापस जनपद की ओर लौट सकता है। इसीलिए उनके नियंत्रण और सफाए पर ध्यान केंद्रित रखना होगा।
-शिवशंकर गौतम, जिला कृषि रक्षा अधिकारी