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ठेकेदारी प्रथा खत्म नहीं होने पर आंदोलन करेंगे सफाई कर्मचारी
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ठेकेदारी प्रथा खत्म नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे सफाई कर्मचारी
शाहजहांपुर। नगर निकायों में सफाई कर्मचारियों के रिक्त 55 हजार पदों पर भर्ती में गैर बिरादरी के लोगों को शामिल किए जाने और नियुक्ति में ठेकेदारी प्रथा खत्म नहीं किए जाने पर सफाई कर्मचारी आंदोलन करेंगे। खिरनीबाग के जीआईसी ग्राउंड पर रविवार को उत्तर प्रदेशीय सफाई कर्मचारी संघ के सम्मेलन में प्रांतीय पदाधिकारियों ने शासन स्तर पर लंबित 11 सूत्री मांगपत्र को लेकर कर्मचारियों में जोश भरा और उन्हें सरकार की हठधर्मिता के खिलाफ लड़ाई को तैयार रहने का संकल्प कराया।
अध्यक्षता करते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष एनआर वाल्मीकि ने इस बात पर क्षोभ व्यक्त किया कि गत 13 अप्रेल को डॉ. भीमराव आंबेडकर के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित विचार गोष्ठी मेें मुख्यमंत्री ने मांग पत्र में निहित समस्याओं का निस्तारण करने के लिए पदाधिकारियों और शासन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता कराने का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष फरवरी तक सरकार ने इस दिशा मेें सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो प्रांतीय नेतृत्व आंदोलन की अगली रणनीति तय करने को मजबूर हो जाएगा।
प्रदेश महासचिव प्रेम प्रकाश वाल्मीकि ने कहा कि निकायों में सफाई कर्मचारियों के रिक्त पदों पर अन्य जातियों के लोगों का चयन किए जाने से स्वच्छकार समाज के लोगों को न तो पुनर्वास के उचित अवसर मिल रहे हैं और न ही उनका आर्थिक स्तर ऊंचा उठ रहा है। सम्मेलन के संयोजक एवं संघ के प्रदेश सचिव प्रदीप वाल्मीकि ने कहा कि अपना हक पाने के लिए सफाई कर्मचारी सरकार से हर स्तर पर टकराने को तैयार हैं। प्रदेश कोषाध्यक्ष बृजेश चौधरी ने कहा कि निकायों में ठेकेदारी प्रथा का उन्मूलन होने तक सफाई कर्मचारियों को न्याय नहीं मिलेगा।
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प्रारंभ में प्रांतीय पदाधिकारियों का यहां पहुंचने पर संघ के जिला अध्यक्ष विनोद कुमार वाल्मीकि के नेतृत्व में सफाई कर्मचारियों ने फूलमालाओं से स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए। प्रदीप वाल्मीकि के संचालन में हुए कार्यक्रम में लखनऊ से आए सुनील धानुक, बरेली के पंकज कुमार, संघ के जिला महामंत्री मुकेश कुमार, रामकुमार आदि ने विचार व्यक्त किए।
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शाहजहांपुर। नगर निकायों में सफाई कर्मचारियों के रिक्त 55 हजार पदों पर भर्ती में गैर बिरादरी के लोगों को शामिल किए जाने और नियुक्ति में ठेकेदारी प्रथा खत्म नहीं किए जाने पर सफाई कर्मचारी आंदोलन करेंगे। खिरनीबाग के जीआईसी ग्राउंड पर रविवार को उत्तर प्रदेशीय सफाई कर्मचारी संघ के सम्मेलन में प्रांतीय पदाधिकारियों ने शासन स्तर पर लंबित 11 सूत्री मांगपत्र को लेकर कर्मचारियों में जोश भरा और उन्हें सरकार की हठधर्मिता के खिलाफ लड़ाई को तैयार रहने का संकल्प कराया।
अध्यक्षता करते हुए संघ के प्रदेश अध्यक्ष एनआर वाल्मीकि ने इस बात पर क्षोभ व्यक्त किया कि गत 13 अप्रेल को डॉ. भीमराव आंबेडकर के जन्मदिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित विचार गोष्ठी मेें मुख्यमंत्री ने मांग पत्र में निहित समस्याओं का निस्तारण करने के लिए पदाधिकारियों और शासन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता कराने का आश्वासन दिया, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष फरवरी तक सरकार ने इस दिशा मेें सकारात्मक कदम नहीं उठाए तो प्रांतीय नेतृत्व आंदोलन की अगली रणनीति तय करने को मजबूर हो जाएगा।
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प्रदेश महासचिव प्रेम प्रकाश वाल्मीकि ने कहा कि निकायों में सफाई कर्मचारियों के रिक्त पदों पर अन्य जातियों के लोगों का चयन किए जाने से स्वच्छकार समाज के लोगों को न तो पुनर्वास के उचित अवसर मिल रहे हैं और न ही उनका आर्थिक स्तर ऊंचा उठ रहा है। सम्मेलन के संयोजक एवं संघ के प्रदेश सचिव प्रदीप वाल्मीकि ने कहा कि अपना हक पाने के लिए सफाई कर्मचारी सरकार से हर स्तर पर टकराने को तैयार हैं। प्रदेश कोषाध्यक्ष बृजेश चौधरी ने कहा कि निकायों में ठेकेदारी प्रथा का उन्मूलन होने तक सफाई कर्मचारियों को न्याय नहीं मिलेगा।
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प्रारंभ में प्रांतीय पदाधिकारियों का यहां पहुंचने पर संघ के जिला अध्यक्ष विनोद कुमार वाल्मीकि के नेतृत्व में सफाई कर्मचारियों ने फूलमालाओं से स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए। प्रदीप वाल्मीकि के संचालन में हुए कार्यक्रम में लखनऊ से आए सुनील धानुक, बरेली के पंकज कुमार, संघ के जिला महामंत्री मुकेश कुमार, रामकुमार आदि ने विचार व्यक्त किए।