फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   उद्यमियों और कारोबारियों की निगाह में योगी सरकार का बजट निराशाजनक

उद्यमियों और कारोबारियों की निगाह में योगी सरकार का बजट निराशाजनक

Sat, 17 Feb 2018 08:08 PM IST
Updated Sat, 17 Feb 2018 08:08 PM IST
विज्ञापन
उद्यमियों और कारोबारियों की निगाह में योगी सरकार का बजट निराशाजनक
योगी सरकार का बजट निराशाजनक
विज्ञापन

बजट पर उद्यमियों और कारोबारियों ने साफ किया अपना नजरिया
कहा- सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने का नहीं किया प्रावधान
खोखा पटरी दुकानदारों को कांप्लेक्स और मंडी शुल्क का कोई जिक्र नहीं
विरोधी दलों के मुताबिक बजट के लिहाज से खाली रही जिले की झोली
अमर उजाला ब्यूरो
शाहजहांपुर।
सूबे की योगी सरकार ने भी वार्षिक बजट बनाते वक्त केंद्र सरकार के अंतिम बजट की तरह उद्योग-व्यापार जगत को हाशिए पर रखा। न तो रोजगार के अधिकतम अवसर सृजित करने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम दर्जे के उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने की पहल की और न ही खोखा-पटरी दुकानदारों के लिए शॉपिंग कांप्लेक्स का कोई जिक्र किया। मंडी शुल्क खत्म करना तो दूर रहा, उसमें रियायत का भी बजट में कोई उल्लेख नहीं होने से उद्यमियों और व्यापारियों के मन में निराशा छाई है। प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता भी मानते हैं कि बजट से जुड़ी उम्मीदों के लिहाज से जनपद की झोली पूरी खाली रही और समाज के किसी भी वर्ग को कुछ खास हासिल नहीं हुआ।
न केवल जनपद बल्कि सूबे के अन्य जिलों के उद्यमी एमएसएमई सेक्टर को पनपने के लिए उचित माहौल दिए जाने की लंबे समय से मांग कर रहे हैं। इसी तरह प्रदेश के व्यापारी बिहार, मध्य प्रदेश आदि अन्य कई राज्यों की तरह यूपी में भी मंडी शुल्क समाप्त करने की मांग को लेकर कई बार मुख्यमंत्री और शासन स्तर पर अपने संगठनों के माध्यम से ज्ञापन दे चुके हैं। यही नहीं, जब से सूबे में अतिक्रमण हटाओ अभियान की शुरुआत हुई, फुटपाथों से विस्थापित होने वाले खोखा-पटरी दुकानदारों को कांप्लेक्स बनाकर छोटी-छोटी दुकानें न्यूनतम किराए पर आवंटित करने की मांग जोर पकड़ चुकी है।
विज्ञापन

इस संबंध में हाल ही में उद्योग व्यापार मंडल मिश्रा गुट के प्रांतीय नेतृत्व की ओर से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी दिया जा चुका है, लेकिन शुक्रवार को प्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल द्वारा पेश किए गए दूसरे वार्षिक बजट इन सभी मांगों से जुड़ी उम्मीदों को करारा झटका लगा है। चाहे उद्यमी हो अथवा कारोबारी या फिर सियासी धड़े, सभी योगी सरकार के बजट से मायूस दिखे। उनकी बातों से साफ जाहिर हुआ कि उनकी कसौटियों पर योगी राज की नीतियां खरी साबित नहीं हो रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन

0
..तो नहीं होगा सबका विकास
फोटो 32 में।
केंद्र सरकार के साथ सूबे की योगी सरकार एक सुर-एक ताल से काम कर रही है। दोनों सरकारें सबका साथ-सबका विकास की बात करती हैं, लेकिन बजट बनाते वक्तरोजगार के साथ कर राजस्व देने वाले उद्योग क्षेत्र की पूरी तरह उपेक्षा करती हैं। सही मायने में सूक्ष्म और लघु उद्योग देश की अर्थ व्यवस्था को दिशा देते हैं, लेकिन मोदी की तरह योगी सरकार ने भी बजट में उद्योगों के विकास का कोई जिक्र नहीं किया। ऐसे में सबका विकास होने से रहा।
-अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
---------------------------------------------
व्यापारियों की उम्मीदोें पर बजट ने फेर दिया पानी
फोटो 36 में।
बजट से व्यापारियों को पूरी उम्मीद थी कि सूबे में मंडी शुल्क खत्म भले ही न हो, उसमें छूट मिल सकती है। अगले साल लोकसभा के चुनाव को ध्यान में रखने इस उम्मीद को पंख लगे थे। संगठन की मांग पर सरकार ने वादा किया था अवैध कब्जे हटाने के नाम पर फुटपाथों से खदेड़े जा रहे खोखा-पटरी दुकानदारों को छह गुणा छह फुट की दुकानों वाले शॉपिंग कांप्लेक्स बनाने पर विचार किया जाएगा, लेकिन बजट में इसके लिए धनराशि का प्रावधान नहीं है।
-कुलदीप सिंह दुआ, जिला अध्यक्ष, उद्योग व्यापार मंडल मिश्रा गुट
--------------------------------------------
सरकार की निगाह मेें व्यापारी सिर्फ टैक्स देने के लिए
फोटो 37 में।
व्यापार जगत काफी समय से व्यापारी सुरक्षा आयोग के गठन, जिला मुख्यालयों पर व्यापार कांप्लेक्स के निर्माण और अन्य कई ऐसी सुविधाओं की मांग कर रहा है, जिनसे राजकोष पर ज्यादा भार नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद सरकार ने अपने स्तर के यह सारे नीतिगत मसले बेवजह लटका रखे है। मंडी शुल्क का बजट में जिक्र तक नहीं है। व्यापारी फिर ठन-ठन गोपाल बन गए। सरकार की निगाह में हम लोग सिर्फ टैक्स देने के लिए हैं।
-वेदप्रकाश गुप्ता, जिला अध्यक्ष, उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल कंछल गुट
----------------------------------------
किसानों और युवाओं के हाथ खाली
फोटो 33 में।
किसानों और युवाओं के लिए योगी सरकार के बजट का पूरी तरह खाली रहा। समाज के बड़े तबके में शामिल दोनों वर्ग पूरी तरह प्यासे रह गए। अखिलेश सरकार ने किसानों की दुर्घटना बीमा की रकम एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये की, योगी सरकार ने उसमें कोई बढ़ोत्तरी नहीं की। किसान फसलों का समर्थन मूल्य पाने को तरस रहे हैं। वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय भुगतान की मद में सिर्फ एक करोड़ रुपये देकर उनके साथ मजाक किया गया है।
-तनवीर खां, जिला अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी
----------------------------------------
भाजपा से भलाई की उम्मीद बेमतलब
फोटो 34 में।
भाजपा के लोगों से भलाई की उम्मीद करना बेकार है। मोदी राज के चार साल में आम आदमी को परेशानियों के सिवा कुछ नहीं मिला। यही बात योगी सरकार पर भी लागू होती है। बजट पर गौर करें तो फायदे की सारी योजनाएं केवल कारपोरेट सेक्टर को खुश करने के लिहाज से गढ़ी गई हैं। सरकार को आपदा राहत मद में कटौती की सूझ किसने दी, जांच का विषय है। पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को बजट कोई रोशनी नहीं दिखाता।

-कौशल मिश्रा, जिला अध्यक्ष, कांग्रेस
----------------------------------------
गरीबों और पिछड़े वर्ग को नहीं मिली कोई जगह
फोटो 35 में।
गरीबों और पिछड़े वर्ग को बजट में कोई जगह नहीं मिली। गरीबों के लिए कई तरह की पेंशन बंद कर दी गईं। केवल वृद्धावस्था और विकलांग पेंशन चलाई जा रही हैं। नौकरी के नाम पर एक बार फिर केवल आश्वासन दिया गया है। भरोसा इसलिए नहीं हो रहा कि भाजपा सरकारों ने अब तक अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया। समाज के किसी भी वर्ग के लिए बजट आशाजनक नहीं कहा जा सकता।
-खेमकरन लाल, जिला अध्यक्ष, बहुजन समाज पार्टी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed