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Shahjahanpur News: 182 में 38 हैंडपंप नहीं मिले रीबोर
Fri, 07 Jun 2024 03:29 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 07 Jun 2024 03:29 AM IST
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जैतीपुर। ब्लॉक क्षेत्र में हैंडपंप रीबोर की जांच रिपोर्ट में आ गई है। इसमें बड़े घोटाले की पुष्टि हुई है। 182 में 38 हैंडपंप स्थलीय निरीक्षण में रीबोर नहीं मिले। इसके अलावा भी कई खामियां मिली हैं।
बंडा के रामप्रवेश शुक्ला ने 25 सितंबर को जैतीपुर क्षेत्र में कराए गए रीबोर हैंडपंपों के मामले में घोटाले की शिकायत लोकायुक्त से की थी। डीएम ने जांच के लिए 10 जनवरी को डिप्टी कलक्टर दुर्गेश यादव के नेतृत्व में जल निगम निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता कपिल एम सिंह और वरिष्ठ कोषाधिकारी की टीम गठित कर दी थी।
जांच टीम के सदस्य अधिशासी अभियंता ने जैतीपुर के बीडीओ को 12 जनवरी को पत्र भेजकर रीबोर कराए हैंडपंपों की सूची मांगी थी, जो उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद 29 जनवरी काे फिर सूची की मांग की गई। बीडीओ की ओर से 464 हैंडपंप रीबोर के सापेक्ष केवल 182 की सूची उपलब्ध कराई गई थी।
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जांच में अधिकांश हैंडपंप के रीबोर होने की पुष्टि नहीं हुई। यानी हैंडपंप रीबोर से पूर्व किस स्थल पर लगा था, इसके प्रमाणिक साक्ष्य नहीं मिल सके। केवल स्थानीय निवासियों के बयान के आधार पर हैंडपंप रीबोर माना गया है। टीम के मुताबिक, सात हैंडपंप का रीबोर बंद पाया गया। तीन हैंडपंप घर के अंदर लगे मिले। तीन हैंडपंपों में सबमर्सिबल लगा था। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट दुर्गेश यादव ने जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। डीएम के निर्देश पर आगे की कार्रवाई होगी।
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ये गड़बड़ियां भी मिलीं
माप पुस्तिकाओं में मापन किए गए बोरिंग व लोरिंग तथा सामग्री खपत में भिन्नता है। कहीं पर बोरिंग से ज्यादा सामग्री की खपत दिखा दी गई। बोरिंग की गहराई और पाइप की मात्रा में अंतर पाया गया। कुछ महीने पहले ही रीबोर कराए गए हैंडपंपों के पैडस्टल, वाटरटैंक, हेड में जंक लगा था। प्लेटफार्म का आकार और माप मानक से भिन्न व खराब पाए गए। जीआई पाइप और कनेक्टिंग रॉड बुरी तरह खराब पाई गई। ग्रामीण इलाकों में नियमानुसार दो हैंडपंपों की दूरी न्यूनतम 150 मीटर होनी चाहिए लेकिन हैंडपंप काफी पास-पास लगे मिले। कई हैंडपंप निजी स्थलों पर या मकान के अंदर लगे मिले।
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बंडा के रामप्रवेश शुक्ला ने 25 सितंबर को जैतीपुर क्षेत्र में कराए गए रीबोर हैंडपंपों के मामले में घोटाले की शिकायत लोकायुक्त से की थी। डीएम ने जांच के लिए 10 जनवरी को डिप्टी कलक्टर दुर्गेश यादव के नेतृत्व में जल निगम निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता कपिल एम सिंह और वरिष्ठ कोषाधिकारी की टीम गठित कर दी थी।
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जांच टीम के सदस्य अधिशासी अभियंता ने जैतीपुर के बीडीओ को 12 जनवरी को पत्र भेजकर रीबोर कराए हैंडपंपों की सूची मांगी थी, जो उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद 29 जनवरी काे फिर सूची की मांग की गई। बीडीओ की ओर से 464 हैंडपंप रीबोर के सापेक्ष केवल 182 की सूची उपलब्ध कराई गई थी।
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जांच में अधिकांश हैंडपंप के रीबोर होने की पुष्टि नहीं हुई। यानी हैंडपंप रीबोर से पूर्व किस स्थल पर लगा था, इसके प्रमाणिक साक्ष्य नहीं मिल सके। केवल स्थानीय निवासियों के बयान के आधार पर हैंडपंप रीबोर माना गया है। टीम के मुताबिक, सात हैंडपंप का रीबोर बंद पाया गया। तीन हैंडपंप घर के अंदर लगे मिले। तीन हैंडपंपों में सबमर्सिबल लगा था। अतिरिक्त मजिस्ट्रेट दुर्गेश यादव ने जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। डीएम के निर्देश पर आगे की कार्रवाई होगी।
ये गड़बड़ियां भी मिलीं
माप पुस्तिकाओं में मापन किए गए बोरिंग व लोरिंग तथा सामग्री खपत में भिन्नता है। कहीं पर बोरिंग से ज्यादा सामग्री की खपत दिखा दी गई। बोरिंग की गहराई और पाइप की मात्रा में अंतर पाया गया। कुछ महीने पहले ही रीबोर कराए गए हैंडपंपों के पैडस्टल, वाटरटैंक, हेड में जंक लगा था। प्लेटफार्म का आकार और माप मानक से भिन्न व खराब पाए गए। जीआई पाइप और कनेक्टिंग रॉड बुरी तरह खराब पाई गई। ग्रामीण इलाकों में नियमानुसार दो हैंडपंपों की दूरी न्यूनतम 150 मीटर होनी चाहिए लेकिन हैंडपंप काफी पास-पास लगे मिले। कई हैंडपंप निजी स्थलों पर या मकान के अंदर लगे मिले।