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Sant Kabir Nagar News: नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं ने की मां कात्यायनी की पूजा
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समय माता मंदिर में दर्शन करते श्रद्धालु-संवाद
संतकबीरनगर। नवरात्र के छठे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने मां कात्यायनी की पूजा की। देवी मंदिरों में लोगों ने कपूर, अगरबत्ती जलाकर व नारियल चढ़ाकर माता से आशीर्वाद मांगा। शुक्रवार की भोर से मंदिरों में लोग पूजा-पाठ के लिए जुट गए। यह क्रम देर शाम तक चलता रहा। शाम के समय मंदिरों में आरती हुई। इसमें लोगों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।
नवरात्र पर्व हर दिन माता के नए रूपों का दर्शन हो रहा है। शहर के समय माता मंदिर, बरदहिया की दुर्गा मंदिर, उस्का की वन देवी मंदिर, मेंहदावल के नगरवाली माता समेत अन्य देवी मंदिरों में शुक्रवार की सुबह से दर्शन के लोग जुट गए। लोग माता की पूजा के बाद उन्हें कपूर, अगरबत्ती आदि जलाकर सुख समृद्धि की कामना की। इसके साथ ही नारियल और चुनरी चढ़ाई।
समय माता मंदिर के पुजारी चंदन बाबा ने बताया कि देवी कात्यायनी को ब्रजभूमि की आराध्य देवी माना जाता है। श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने इनकी पूजा की थी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महर्षि कात्यायन ने कठोर तपस्या कर देवी को पुत्री रूप में प्राप्त किया, इसलिए इन्हें ''''कात्यायनी'''' कहा जाता है।
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इनकी पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है, विशेष रूप से विवाह संबंधी बाधाओं का निवारण होता है। देवी भक्तों को शत्रु भय से मुक्त कर पराक्रम और आत्मबल प्रदान करती हैं। चंदन बाबा ने बताया कि मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं, इनका स्वरूप अत्यंत ही भव्य और दिव्य है। इनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला और भास्वर है।
शेर पर सवार मां की चार भुजाएं हैं, इनके बाएं हाथ में कमल और तलवार व दाएं हाथों में स्वास्तिक व आशीर्वाद की मुद्रा अंकित है।
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शहर में बने पंडालों में आई रौनक
नवरात्र पर शहर में जगह-जगह माता दुर्गा की पूजा के लिए पंडाल स्थापित किए गए हैं। मुखलिसपुर तिराहा, मुस्तफा मार्केट के पास, गोला बाजार, बैंक चौराहा, मोती चौराहा, मेंहदावल बाईपास, विधियानी, पुरानी सब्जी मंडी, बरदहिया बाजार आदि जगहों पंडाल आदि सज गए है। यहां पर देवी प्रतिमाएं स्थापित हो चुकी है। पंडालों की सजावट का कार्य अंतिम चरण में है। शनिवार को सप्तमी है इस वजह से उसी दिन माता के पट्ट खुलेंगे, जिसको लेकर आयोजक तैयारी में जुटे हैं।
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नवरात्र पर्व हर दिन माता के नए रूपों का दर्शन हो रहा है। शहर के समय माता मंदिर, बरदहिया की दुर्गा मंदिर, उस्का की वन देवी मंदिर, मेंहदावल के नगरवाली माता समेत अन्य देवी मंदिरों में शुक्रवार की सुबह से दर्शन के लोग जुट गए। लोग माता की पूजा के बाद उन्हें कपूर, अगरबत्ती आदि जलाकर सुख समृद्धि की कामना की। इसके साथ ही नारियल और चुनरी चढ़ाई।
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समय माता मंदिर के पुजारी चंदन बाबा ने बताया कि देवी कात्यायनी को ब्रजभूमि की आराध्य देवी माना जाता है। श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए गोपियों ने इनकी पूजा की थी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महर्षि कात्यायन ने कठोर तपस्या कर देवी को पुत्री रूप में प्राप्त किया, इसलिए इन्हें ''''कात्यायनी'''' कहा जाता है।
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इनकी पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है, विशेष रूप से विवाह संबंधी बाधाओं का निवारण होता है। देवी भक्तों को शत्रु भय से मुक्त कर पराक्रम और आत्मबल प्रदान करती हैं। चंदन बाबा ने बताया कि मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं, इनका स्वरूप अत्यंत ही भव्य और दिव्य है। इनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला और भास्वर है।
शेर पर सवार मां की चार भुजाएं हैं, इनके बाएं हाथ में कमल और तलवार व दाएं हाथों में स्वास्तिक व आशीर्वाद की मुद्रा अंकित है।
शहर में बने पंडालों में आई रौनक
नवरात्र पर शहर में जगह-जगह माता दुर्गा की पूजा के लिए पंडाल स्थापित किए गए हैं। मुखलिसपुर तिराहा, मुस्तफा मार्केट के पास, गोला बाजार, बैंक चौराहा, मोती चौराहा, मेंहदावल बाईपास, विधियानी, पुरानी सब्जी मंडी, बरदहिया बाजार आदि जगहों पंडाल आदि सज गए है। यहां पर देवी प्रतिमाएं स्थापित हो चुकी है। पंडालों की सजावट का कार्य अंतिम चरण में है। शनिवार को सप्तमी है इस वजह से उसी दिन माता के पट्ट खुलेंगे, जिसको लेकर आयोजक तैयारी में जुटे हैं।