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प्रवासी पक्षियों की आवक के साथ शिकार भी बढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 06 Nov 2017 11:49 PM IST
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बखिरा झील में विचरण करते पक्षी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूूराो
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बखिरा। ठंड बढ़ने के साथ ही बखिरा झील में प्रवासी पक्षियों की आवक बढ़ रही है। लेकिन, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने से शिकार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। आलम यह है कि झील के किनारे शिकारियों ने डेरा डाल दिया है।
29 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैले बखिरा पक्षी विहार की खूबसूरती जाड़े के महीनों में देखते ही बनती है। झील के पानी कि सतह पर पक्षियों की अठखेलियां आकर्षण का केंद्र होती है। इस मोहक दृश्य के लिए लोग ठंड के इस मौसम का बेसब्री से इंतजार करते है, जबकि वही दूसरी तरफ शिकारियों को इनका इंतजार शिकार के लिए रहता है।
इसके बावजूद पक्षियों सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं है। क्षेत्र के कुंवरजीत सिंह, रमेश तिवारी, आद्या प्रसाद, रामदेव, रामनिधि तिवारी, हरिशंकर, रामप्रसाद, लालचंद, कैलाशनाथ का आरोप है कि प्रवासी पक्षियों का शिकार इस साल जोरों पर है। शिकार पक्षी विहार स्थापित होने के बाद से ही बेखौफ शिकार करते रहे हैं।
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ग्रामीणों ने कहा कि शिकार इतनी बहुतायत में हो रहा है कि विगत सालों की अपेक्षा इनका मूल्य भी कम है। शिकायत के बाद भी वनकर्मी लापरवाह बने हुए है। बताया कि बड़गो, नवासे, महला, झुंगिया, ढोढया, कानपार, सई बुजुर्ग समेत झील किनारे बसे गांवों के आसपास शिकार धड़ल्ले से हो रहा है।
सूत्रों का कहना है कि शिकारी टिकिया, कैमा प्रजाति की पक्षी को 100 से 150 रुपये में बेचते हैं, जबकि अन्य प्रजाति की चिड़िया इससे भी कम दामों पर आसानी से मिल रही हैं। जबकि विगत साल इन चिड़ियों का मूल्य 200 से 300 रुपये के बीच था। लालसर प्रजाति की चिड़ियों को डेढ़ से दो हजार के बीच बिक्री हुई थी। क्षेत्रीय वनाधिकारी सुरेशराम ने बताया कि पक्षियों का शिकार रोकने का पूरा प्रयास हो रहा है। वनकर्मी लगातार गश्त करते है। यदि कोई शिकार पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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29 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैले बखिरा पक्षी विहार की खूबसूरती जाड़े के महीनों में देखते ही बनती है। झील के पानी कि सतह पर पक्षियों की अठखेलियां आकर्षण का केंद्र होती है। इस मोहक दृश्य के लिए लोग ठंड के इस मौसम का बेसब्री से इंतजार करते है, जबकि वही दूसरी तरफ शिकारियों को इनका इंतजार शिकार के लिए रहता है।
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इसके बावजूद पक्षियों सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम नहीं है। क्षेत्र के कुंवरजीत सिंह, रमेश तिवारी, आद्या प्रसाद, रामदेव, रामनिधि तिवारी, हरिशंकर, रामप्रसाद, लालचंद, कैलाशनाथ का आरोप है कि प्रवासी पक्षियों का शिकार इस साल जोरों पर है। शिकार पक्षी विहार स्थापित होने के बाद से ही बेखौफ शिकार करते रहे हैं।
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ग्रामीणों ने कहा कि शिकार इतनी बहुतायत में हो रहा है कि विगत सालों की अपेक्षा इनका मूल्य भी कम है। शिकायत के बाद भी वनकर्मी लापरवाह बने हुए है। बताया कि बड़गो, नवासे, महला, झुंगिया, ढोढया, कानपार, सई बुजुर्ग समेत झील किनारे बसे गांवों के आसपास शिकार धड़ल्ले से हो रहा है।
सूत्रों का कहना है कि शिकारी टिकिया, कैमा प्रजाति की पक्षी को 100 से 150 रुपये में बेचते हैं, जबकि अन्य प्रजाति की चिड़िया इससे भी कम दामों पर आसानी से मिल रही हैं। जबकि विगत साल इन चिड़ियों का मूल्य 200 से 300 रुपये के बीच था। लालसर प्रजाति की चिड़ियों को डेढ़ से दो हजार के बीच बिक्री हुई थी। क्षेत्रीय वनाधिकारी सुरेशराम ने बताया कि पक्षियों का शिकार रोकने का पूरा प्रयास हो रहा है। वनकर्मी लगातार गश्त करते है। यदि कोई शिकार पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।