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सवा महीने में 32 लोगों को निशाना बना चुका है हैकर्स गैंग
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 May 2018 11:30 PM IST
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email, hackers
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संतकबीरनगर। पुलिस के हत्थे चढ़े हैकर्स गैंग के चारों सदस्यों के कारनामे तो चौकाने वाले है। यह गैंग फर्जी बैंक अधिकारी बनकर न तो किसी का एटीएम कार्ड का गुप्त कोड पूछता है और न ही पिन कोड। रेंडम में ही फर्जी आईडी और पासवर्ड के सहारे कंप्यूटर सिस्टम से लोगों के डिटेल पता कर रीलोड ऐप के वालेट पर 1000 से कम रकम ट्रांसफर करके मोबाइल चार्ज करके पैसे ऐंठ लेता है।
ऐसा मामला जिले में पहली दफा प्रकाश में आया है। एसपी शैलेश कुमार पांडेय के मुताबिक पूछताछ में हैकर्स गैंग का सरगना अनूप अग्रहरि बताया कि डेढ़ महीने पहले की उसने यह काम शुरू किया है। अनूप रेंडम फर्जी आईडी पासवर्ड डाल कर एटीएम कार्ड का डिटेल जुटाता था। अमूनन लोग अपने जन्म तिथि या फिर कार्ड के आगे-पीछे के चार नंबर से पासवर्ड बनाते है।
उन्हीं के एटीएम कार्ड,पिन कोड व बैंक डिटेल हैंक कर लेता था। अलग-अलग आईडी व पासवर्ड बनाकर रीलोड ऐप के वालेट पर एक दिन में 1000 रुपये तक डालता था। प्रतिदिन 1000 रुपये की निकासी तक ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ती है।
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उसके बाद आशीष पाठक को धंधे से जोड़ा और उसे रीलोड कंपनी का डिस्टीब्यूटर बना कर विशाल कसौधन व पिंटू श्रीवास्तव को आईडी पासवर्ड ,जिसमें हैंक कर पैसे डाले गए होते थे,उपलब्ध कराते थे। विशाल श्रीवास्तव व पिंटू श्रीवास्तव विभिन्न मोबाइल उपभोक्ताओं के मोबाइल रिचार्ज करके पैसे प्राप्त करके आशीष पाठक को उपलब्ध कराते थे।
इस कार्य के लिए विशाल व पिंटू को 6-6 प्रतिशत कमीशन के रूप में मिलता था। आशीष पाठक को नौ प्रतिशत और अनूप मद्घेशिया को 85 प्रतिशत धनराशि मिलता था। पैसे का लेन-देन रजत पांडेय के खाते से करते थे। रजत पांडेय आशीष पाठक का रिश्तेदार है।
उसने अपना निजी एटीएम कार्ड आशीष पाठक को रखने के लिए दिया था,लेकिन बिना उसके संज्ञान में लाए आशीष पाठक के जरिए अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए एटीएम का प्रयोग किया जा रहा था। अनूप पहले गैंग के लोगों को अपना राहुल नाम बताया था। अब तक अनूप 32 लोगों के एटीएम व अन्य डिटेल हैंक कर चुका है।
पहले तो बैंक अधिकारी बन कर लोग एटीएम का कोड पूछते थे और फिर ऑन लाइन ठगी कर लेते थे,लेकिन यह पहला मामला प्रकाश में आया कि बिना कुछ पूछे ही रेंडम ही कंप्यूटर सिस्टम से हैंक करके लोगों को डिटेल हासिल कर ठगी बनाया जा रहा है। ऐसे में लोगों ने गोपनीय पासवर्ड बनाने की जरूरत है। वैसे अनूप अग्रहरि पूर्व में सिद्धार्थनगर जिले से फर्जी वोटर आईडी बनाने के मामले में जेल जा चुका है।
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ऐसा मामला जिले में पहली दफा प्रकाश में आया है। एसपी शैलेश कुमार पांडेय के मुताबिक पूछताछ में हैकर्स गैंग का सरगना अनूप अग्रहरि बताया कि डेढ़ महीने पहले की उसने यह काम शुरू किया है। अनूप रेंडम फर्जी आईडी पासवर्ड डाल कर एटीएम कार्ड का डिटेल जुटाता था। अमूनन लोग अपने जन्म तिथि या फिर कार्ड के आगे-पीछे के चार नंबर से पासवर्ड बनाते है।
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उन्हीं के एटीएम कार्ड,पिन कोड व बैंक डिटेल हैंक कर लेता था। अलग-अलग आईडी व पासवर्ड बनाकर रीलोड ऐप के वालेट पर एक दिन में 1000 रुपये तक डालता था। प्रतिदिन 1000 रुपये की निकासी तक ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ती है।
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उसके बाद आशीष पाठक को धंधे से जोड़ा और उसे रीलोड कंपनी का डिस्टीब्यूटर बना कर विशाल कसौधन व पिंटू श्रीवास्तव को आईडी पासवर्ड ,जिसमें हैंक कर पैसे डाले गए होते थे,उपलब्ध कराते थे। विशाल श्रीवास्तव व पिंटू श्रीवास्तव विभिन्न मोबाइल उपभोक्ताओं के मोबाइल रिचार्ज करके पैसे प्राप्त करके आशीष पाठक को उपलब्ध कराते थे।
इस कार्य के लिए विशाल व पिंटू को 6-6 प्रतिशत कमीशन के रूप में मिलता था। आशीष पाठक को नौ प्रतिशत और अनूप मद्घेशिया को 85 प्रतिशत धनराशि मिलता था। पैसे का लेन-देन रजत पांडेय के खाते से करते थे। रजत पांडेय आशीष पाठक का रिश्तेदार है।
उसने अपना निजी एटीएम कार्ड आशीष पाठक को रखने के लिए दिया था,लेकिन बिना उसके संज्ञान में लाए आशीष पाठक के जरिए अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए एटीएम का प्रयोग किया जा रहा था। अनूप पहले गैंग के लोगों को अपना राहुल नाम बताया था। अब तक अनूप 32 लोगों के एटीएम व अन्य डिटेल हैंक कर चुका है।
पहले तो बैंक अधिकारी बन कर लोग एटीएम का कोड पूछते थे और फिर ऑन लाइन ठगी कर लेते थे,लेकिन यह पहला मामला प्रकाश में आया कि बिना कुछ पूछे ही रेंडम ही कंप्यूटर सिस्टम से हैंक करके लोगों को डिटेल हासिल कर ठगी बनाया जा रहा है। ऐसे में लोगों ने गोपनीय पासवर्ड बनाने की जरूरत है। वैसे अनूप अग्रहरि पूर्व में सिद्धार्थनगर जिले से फर्जी वोटर आईडी बनाने के मामले में जेल जा चुका है।