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घाघरा की बाढ़ से बेसहारा हुए मांझावासी
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:44 PM IST
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बांध पर शरण लेने वालों के सामने भोजन का संकट
बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंची नहीं राहत
फोटो है
इंद्रेश यादव
हैंसर। घाघरा की बाढ़ से घिरे 16 गांवों से चार गांव गायघाट, सियरकला, ढोलबजा व गुनवतिया के लोगों ने एमबीडी बांध पर शरण ले रखी है। सोमवार की रात में बांध पर पहुंचे इन लोगों तक अब तक प्रशासनिक मदद नहीं पहुंची। किसी तरह जान बचाने के लिए बाहर निकले इन लोगों के सामने भोजन व छाया का गंभीर संकट है। प्रशासन ने भी अब तक कोई खास इंतजाम नहीं किया है। इसके चलते बाढ़ पीड़ितों में प्रशासन के विरुद्घ गहरा आक्रोश है।
धनघटा तहसील क्षेत्र के गांव गायघाट, चकदहां, गुनवतिया, भौवापार, कटहा, खैरगाढ़, सियरकला, सुअरहां, सरैया, खरैया, सियराम अधीन सिंह, दौलतपुर, धमठिया, कंचनपुर, करनपुर, ढोलबजा आदि एक पखवारे से बाढ़ से घिरे हैं। घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चले जाने के कारण इन गांवों में पानी भर गया है। इनमें से चार गांव गायघाट, सियरकला, ढोलबजा और गुनवतिया के लोगों ने एमबीडी बांध पर शरण ले रखी है। बांध पर पहुंचे बाढ़ पीड़ितों की हालत दयनीय हो गई है। खराब मौसम में भी ये लोग बांध पर बिना भोजन-पानी के वक्त काट रहे हैं। सबसे खराब हालत बच्चों व बुजुर्गों की है।
बांध पर शरण लेने वाले लोगों के अनुसार प्रशासन ने अब तक कोई मदद नहीं की है। कोई जनप्रतिनिधि भी उनका हाल जानने नहीं पहुंचा। उनके सामने भोजन का संकट गहरा गया है। बांध पर रह रहे लोगों के लिए जमीन बिस्तर तो आसमान छत का काम कर रहा है।
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अभी तक एक माचिस तक नहीं मिला
बांध पर शरण ले रखी गीता कहतीं हैं कि घर में पानी भर जाने के कारण चार साल और दो साल के दो बच्चों के साथ पांच दिनों से बांध पर हूं। लेकिन अभी तक एक माचिस तक प्रशासन ने नहीं दी है। राशन समाप्त हो गया, अब क्या खाएं और बच्चों को क्या खिलाएं समझ में नही आ रहा है। किसमती का कहना है कि सियर कला के 20 परिवार एमबीडी बांध पर शरण लिए हैं। वहीं गुनवतिया, चकदहा, ढोलबजा के 100 से अधिक परिवार के लोग गांव के पास बने रिंग बांध पर जीवन गुजार रहे हैं।
श्यामरति कहती हैं कि बड़े लोग तो किसी तरह पानी पीकर दिन काट ले रहे हैं लेकिन बच्चों को क्या खिलाएं समझ में नही आ रहा है। बांध पर ही शरण लिए गुलाब, हरीशचंद्र, जंगीलाल, डब्लू, सूर्यबली आदि का कहना है कि तिघरा कुटी के पास तक अधिकारी-कर्मचारी आते हैं और वहीं से लौट जाते हैं। सियरकला गांव के सामने बंधे पर रह रहे और ढोलबजा के पास रिंग बांध पर शरण लिए लोगों का हाल जानने कोई नहीं आ रहा है।
000000जल्दी ही राहत सामग्री भेजेंगे
बुधवार को बाढ़ व पीड़ितों का हाल जानने पहुंचे एसडीएम बाबूराम ने कहा कि जल्दी ही लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध करा दी जाएगी।
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बाढ़ पीड़ितों तक नहीं पहुंची नहीं राहत
फोटो है
इंद्रेश यादव
हैंसर। घाघरा की बाढ़ से घिरे 16 गांवों से चार गांव गायघाट, सियरकला, ढोलबजा व गुनवतिया के लोगों ने एमबीडी बांध पर शरण ले रखी है। सोमवार की रात में बांध पर पहुंचे इन लोगों तक अब तक प्रशासनिक मदद नहीं पहुंची। किसी तरह जान बचाने के लिए बाहर निकले इन लोगों के सामने भोजन व छाया का गंभीर संकट है। प्रशासन ने भी अब तक कोई खास इंतजाम नहीं किया है। इसके चलते बाढ़ पीड़ितों में प्रशासन के विरुद्घ गहरा आक्रोश है।
धनघटा तहसील क्षेत्र के गांव गायघाट, चकदहां, गुनवतिया, भौवापार, कटहा, खैरगाढ़, सियरकला, सुअरहां, सरैया, खरैया, सियराम अधीन सिंह, दौलतपुर, धमठिया, कंचनपुर, करनपुर, ढोलबजा आदि एक पखवारे से बाढ़ से घिरे हैं। घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चले जाने के कारण इन गांवों में पानी भर गया है। इनमें से चार गांव गायघाट, सियरकला, ढोलबजा और गुनवतिया के लोगों ने एमबीडी बांध पर शरण ले रखी है। बांध पर पहुंचे बाढ़ पीड़ितों की हालत दयनीय हो गई है। खराब मौसम में भी ये लोग बांध पर बिना भोजन-पानी के वक्त काट रहे हैं। सबसे खराब हालत बच्चों व बुजुर्गों की है।
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बांध पर शरण लेने वाले लोगों के अनुसार प्रशासन ने अब तक कोई मदद नहीं की है। कोई जनप्रतिनिधि भी उनका हाल जानने नहीं पहुंचा। उनके सामने भोजन का संकट गहरा गया है। बांध पर रह रहे लोगों के लिए जमीन बिस्तर तो आसमान छत का काम कर रहा है।
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अभी तक एक माचिस तक नहीं मिला
बांध पर शरण ले रखी गीता कहतीं हैं कि घर में पानी भर जाने के कारण चार साल और दो साल के दो बच्चों के साथ पांच दिनों से बांध पर हूं। लेकिन अभी तक एक माचिस तक प्रशासन ने नहीं दी है। राशन समाप्त हो गया, अब क्या खाएं और बच्चों को क्या खिलाएं समझ में नही आ रहा है। किसमती का कहना है कि सियर कला के 20 परिवार एमबीडी बांध पर शरण लिए हैं। वहीं गुनवतिया, चकदहा, ढोलबजा के 100 से अधिक परिवार के लोग गांव के पास बने रिंग बांध पर जीवन गुजार रहे हैं।
श्यामरति कहती हैं कि बड़े लोग तो किसी तरह पानी पीकर दिन काट ले रहे हैं लेकिन बच्चों को क्या खिलाएं समझ में नही आ रहा है। बांध पर ही शरण लिए गुलाब, हरीशचंद्र, जंगीलाल, डब्लू, सूर्यबली आदि का कहना है कि तिघरा कुटी के पास तक अधिकारी-कर्मचारी आते हैं और वहीं से लौट जाते हैं। सियरकला गांव के सामने बंधे पर रह रहे और ढोलबजा के पास रिंग बांध पर शरण लिए लोगों का हाल जानने कोई नहीं आ रहा है।
000000जल्दी ही राहत सामग्री भेजेंगे
बुधवार को बाढ़ व पीड़ितों का हाल जानने पहुंचे एसडीएम बाबूराम ने कहा कि जल्दी ही लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध करा दी जाएगी।