UP: सपा के जियाउर्रहमान के सामने गुटबंदी होगी चुनौती, संभल में दादा से जुड़े वोट बैंक को साधने का भी इम्तिहान
सपा ने संभल लोकसभा सीट पर जियाउर्रहमान बर्क को उम्मीदवार बनाया है। उनको टिकट दादा डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के निधन के बाद दिया गया। जियाउर्रहमान के सामने दादा की विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती के साथ वोट बैंक को साधने का भी इम्तिहान रहेगा।
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सपा ने संभल से जियाउर्रहमान बर्क को प्रत्याशी बनाया है। वर्तमान में वह कुंदरकी से सपा के विधायक हैं और पूर्व सांसद स्वर्गीय शफीकुर्रहमान बर्क के पोते हैं। पहले शफीकुर्रहमान बर्क को ही सपा ने अपना प्रत्याशी घोषित किया था। टिकट की घोषणा के बाद ही उनका निधन हो गया था।
सपा ने संभल लोकसभा सीट से जियाउर्रहमान बर्क को टिकट देकर उनके दादा की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने का रास्ता खोल दिया है। जियाउर्रहमान के सामने अब खेमों में बंटे सपाइयों को एकजुट करने की चुनौती होगी। लोकसभा चुनाव को लेकर सपा ने प्रत्याशियों की जो पहली सूची जारी की थी उसमें संभल से डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क का नाम शामिल था।
बीमारी के चलते डॉ. बर्क का 27 फरवरी को निधन हो गया था। इसके बाद डॉ. बर्क की संभल सीट की विरासत संभालने का जिम्मा उनके विधायक पोते जियाउर्रहमान बर्क के कंधों पर आ गया था। ऐसे में उन्होंने संभल लोकसभा क्षेत्र से दावेदारी करते हुए टिकट की मांग की थी।
अखिलेश यादव जब संभल डॉ. बर्क के निधन पर शोक जताने के लिए आए थे तो उन्होंने पूरा भरोसा दिलाया था कि वह जियाउर्रहमान बर्क के साथ हैं। उस वादे को निभाते हुए अखिलेश यादव ने प्रत्याशी बनाया है। प्रत्याशी घोषित होने के साथ ही जियाउर्रहमान बर्क के समर्थकों ने मिठाई बांट कर खुशी मनाई।
वहीं दूसरी ओर संभल के सपा विधायक इकबाल महमूद ने कहा है कि वह चुनाव लड़ाने या नहीं लड़ाने पर अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे। उसके बाद ही अगला निर्णय लेंगे। जियाउर्रहमान बर्क के प्रत्याशी बनाए जाने के सवाल पर कहा कि यह पार्टी का निर्णय है। पार्टी ने जो निर्णय लिया है। वह सही ही होगा।
- वर्ष 2011 में बसपा ने संभल विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया था, बाद में टिकट काट दिया था।
- वर्ष 2017 में एआईएमआईएम के टिकट पर संभल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े थे, हार का सामना करना पड़ा था।
- वर्ष 2022 में सपा के टिकट पर कुंदरकी विधानसभा क्षेत्र से जीतकर विधायक बने।