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इस ईद पर दूर से देंगे मुबारक बाद , भाईचारा नहीं होगा कम
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संभल। मुकद्दस रमजान के बाद खुशियों का त्योहार ईद उल फितर मनाया जाता है। इस दिन गरीब और अमीर एक दूसरे से गले मिलते हैं और मिठाई व सेंवई खिलाते हैं। कहते हैं कि ईद पर गले मिलने वाले अपनी बरसों पुरानी दुश्मनी भुला देते हैं। इस दिन को मोहब्बत और आपसी भाईचारे के लिए सबसे अच्छा दिन माना जाता है, लेकिन ऐसा शायद पहली बार होगा जब खुशियों के इस मौके पर गले मिलने से परहेज रहेगा। एक दूसरे से एक मीटर की दूरी रखी जाएगी। दूर से ही एक दूसरे को मुबारकबाद पेश की जाएगी। बुजुर्ग बताते हैं कि उनकी याद में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है।
दरअसल कोरोना का संक्रमण दुनिया भर में फैला है। इस गंभीर बीमारी से बचाव के लिए पूरी दुनिया में सामाजिक दूरी का पालन कराया जा रहा है ताकि यह संक्रमण न फैल सके। इस संक्रमण से बचाव के लिए सामाजिक दूरी ही एकमात्र उपाय है।
यदि दूरी नहीं बनाई गई तो संक्रमण सामुदायिक हो जाएगा जिससे परिणाम गंभीर उभरकर आएंगे। इसीलिए लोग सतर्क हैं। ईद के मुबारक मौके पर करीब आएंगे पर एक दूसरे के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी रहेगी और मास्क भी लगाएंगे। ईद के मुबारक मौके पर भी खुशियां गले मिलकर नहीं मनाई जाएंगी। फिलहाल ज्यादातर लोग तो सोशल मीडिया के माध्यम से ही ईद की मुबारकबाद देने की बात कह रहे हैं।
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1450 वर्ष से ज्यादा समय में एक भी ईद बिना गले मिले नहीं गुजरी
इस्लाम अमन शांति का पैगाम देता है। ईद अल्लाह की तरफ से दी हुई खुशी है। ईद हकीकत में उसी की है जिसने पूरे महीने के रोजे रखे। नमाज की और अल्लाह की रजा को हासिल किया। गुनाहों से दूर रहा। 1450 वर्षों से ज्यादा समय में एक बार भी ऐसा नहीं हुआ है कि ईद की नमाज पढ़ने के बाद लोगों ने गले मिलकर मुबारकबाद न दी हो। कोरोना का संक्रमण काफी बढ़ा हुआ है। ईदगाह और मस्जिदों में इतने ही लोग नमाज अदा करें जितने लोगों को प्रशासन अनुमति देता है।
मुफ्ती आलम रजा खां नूरी, सिरसी।
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दरअसल कोरोना का संक्रमण दुनिया भर में फैला है। इस गंभीर बीमारी से बचाव के लिए पूरी दुनिया में सामाजिक दूरी का पालन कराया जा रहा है ताकि यह संक्रमण न फैल सके। इस संक्रमण से बचाव के लिए सामाजिक दूरी ही एकमात्र उपाय है।
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यदि दूरी नहीं बनाई गई तो संक्रमण सामुदायिक हो जाएगा जिससे परिणाम गंभीर उभरकर आएंगे। इसीलिए लोग सतर्क हैं। ईद के मुबारक मौके पर करीब आएंगे पर एक दूसरे के बीच कम से कम एक मीटर की दूरी रहेगी और मास्क भी लगाएंगे। ईद के मुबारक मौके पर भी खुशियां गले मिलकर नहीं मनाई जाएंगी। फिलहाल ज्यादातर लोग तो सोशल मीडिया के माध्यम से ही ईद की मुबारकबाद देने की बात कह रहे हैं।
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1450 वर्ष से ज्यादा समय में एक भी ईद बिना गले मिले नहीं गुजरी
इस्लाम अमन शांति का पैगाम देता है। ईद अल्लाह की तरफ से दी हुई खुशी है। ईद हकीकत में उसी की है जिसने पूरे महीने के रोजे रखे। नमाज की और अल्लाह की रजा को हासिल किया। गुनाहों से दूर रहा। 1450 वर्षों से ज्यादा समय में एक बार भी ऐसा नहीं हुआ है कि ईद की नमाज पढ़ने के बाद लोगों ने गले मिलकर मुबारकबाद न दी हो। कोरोना का संक्रमण काफी बढ़ा हुआ है। ईदगाह और मस्जिदों में इतने ही लोग नमाज अदा करें जितने लोगों को प्रशासन अनुमति देता है।
मुफ्ती आलम रजा खां नूरी, सिरसी।