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Sambhal News: पिता के घर सती को नहीं मिला सम्मान तो त्याग दिए थे प्राण
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चंदौसी। श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए महामंडलेश्वर शिवानंद महाराज ने कहा कि पिता के घर सती को सम्मान नहीं मिला तो उन्होंने प्राण त्याग दिए थे।
प्रसंग के अनुसार ब्रह्मा जी के पुत्र दक्ष प्रजापति की पुत्री सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था। दक्ष प्रजापति भगवान शिव को अपने समान योग्य नहीं मानते थे और उनके प्रति मन में अहंकार एवं द्वेष रखते थे। कथा व्यास ने कहा- एक बार दक्ष प्रजापति ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवताओं, ऋषियों और गणमान्यों को आमंत्रित किया गया, किंतु भगवान शिव और माता सती को आमंत्रण नहीं भेजा गया। यज्ञ की सूचना मिलने पर माता सती अपने पिता के घर जाने की इच्छा प्रकट करती हैं। भगवान शिव बिना निमंत्रण जाने को उचित नहीं बताते, फिर भी सती पिता के घर पहुंच जाती हैं।
यज्ञ स्थल पर माता सती को सम्मान नहीं मिला तथा दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान किया। अपने आराध्य पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण माता सती ने यज्ञ अग्नि में योगबल से अपने प्राण त्याग दिए। यह कथा अहंकार के विनाश, भगवान शिव की महिमा, पति-पत्नी के आदर्श संबंध तथा ईश्वर के प्रति श्रद्धा और सम्मान का संदेश देती है।
गोशाला रोड स्थित अनुष्का उत्सव हॉल में कथा के दौरान कुमोदिनी शर्मा, उमा श्रीवास्तव, नीता पाठक, दुर्गा टंडन, सीमा शर्मा, पूनम तिवारी, पूर्व चेयरमैन इंदु रानी, हरीश कुमार शर्मा, संजय मिश्रा, अक्षी अग्रवाल, अजय जैन, सुशील शर्मा, संजय बंसल, निपुण शर्मा, जतिन शर्मा मिंकू, अमित पाठक, अभिषेक गुप्ता आदि उपस्थित रहे!
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प्रसंग के अनुसार ब्रह्मा जी के पुत्र दक्ष प्रजापति की पुत्री सती का विवाह भगवान शिव से हुआ था। दक्ष प्रजापति भगवान शिव को अपने समान योग्य नहीं मानते थे और उनके प्रति मन में अहंकार एवं द्वेष रखते थे। कथा व्यास ने कहा- एक बार दक्ष प्रजापति ने विशाल यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवताओं, ऋषियों और गणमान्यों को आमंत्रित किया गया, किंतु भगवान शिव और माता सती को आमंत्रण नहीं भेजा गया। यज्ञ की सूचना मिलने पर माता सती अपने पिता के घर जाने की इच्छा प्रकट करती हैं। भगवान शिव बिना निमंत्रण जाने को उचित नहीं बताते, फिर भी सती पिता के घर पहुंच जाती हैं।
यज्ञ स्थल पर माता सती को सम्मान नहीं मिला तथा दक्ष प्रजापति ने भगवान शिव का अपमान किया। अपने आराध्य पति का अपमान सहन न कर पाने के कारण माता सती ने यज्ञ अग्नि में योगबल से अपने प्राण त्याग दिए। यह कथा अहंकार के विनाश, भगवान शिव की महिमा, पति-पत्नी के आदर्श संबंध तथा ईश्वर के प्रति श्रद्धा और सम्मान का संदेश देती है।
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गोशाला रोड स्थित अनुष्का उत्सव हॉल में कथा के दौरान कुमोदिनी शर्मा, उमा श्रीवास्तव, नीता पाठक, दुर्गा टंडन, सीमा शर्मा, पूनम तिवारी, पूर्व चेयरमैन इंदु रानी, हरीश कुमार शर्मा, संजय मिश्रा, अक्षी अग्रवाल, अजय जैन, सुशील शर्मा, संजय बंसल, निपुण शर्मा, जतिन शर्मा मिंकू, अमित पाठक, अभिषेक गुप्ता आदि उपस्थित रहे!
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