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आरा मशीनों पर पाबंदी से वुड कार्विंग उद्योग संकट में

Wed, 26 Apr 2017 12:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Wed, 26 Apr 2017 12:08 AM IST
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Wood carving industry in crisis due to ban on saw machines
निर्यात होने के इंतजार में पड़ा माल। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में बारीक नक्काशियों, आकर्षक कला और काल्पनिकता से तैयार होने वाले लकड़ी के सांचे और ढांचे अब नहीं बन पा रहे हैं। आरा मशीनों पर लगी पाबंदी के चलते सहारनपुर का वुड कार्विंग उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
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लकड़ियों की चिराई नहीं हो पाने से कच्चा माल तैयार नहीं हो रहा है। आरा मशीनों पर रोक के चलते करीब 100 करोड़ के कारोबार पर संकट है। एक्सपोर्टर्स से लेकर छोटे कारीगरों तक लकड़ी के छोटे टुकड़े नहीं पहुंच रहे हैं।
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ऐसे में वुड कार्विंग कारखानों में कामकाज ठप सा हो गया है। हालांकि कारोबारियों को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस समस्या से निजात के लिए नए कानून बनाएगी।
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 दरअसल, जंगलों की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट आरा मशीनों पर पाबंदी लगाते हुए वुड बेस इंडस्ट्री के लिए नई पालिसी बनाने का आदेश दिया है। इसमें आरा मशीन एक्ट से तीन हार्सपावर की मशीनों को शामिल करने से सहारनपुर के लकड़ी उद्योग में प्रयोग होने वाली छोटी मशीनें कार्रवाई की जद में आ रही हैं।

यही कारण है कि कारखानों में लगी मशीनें पूरी तरह से पाबंद कर दी गई हैं। ऐसे में यह पूरा कारोबार ही बुरी तरह प्रभावित होने लगा है। वन विभाग ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर आरा मशीनों का संचालन लगभग बंद करा दिया है।

आपको बता दें कि वुड कार्विंग इंडस्ट्री के लिए आरा मशीन एक बड़ा औजार है। बड़ी लकड़ी से लेकर छोटे-छोटे उत्पाद बनाने तक में आरा मशीन की उपयोगिता होती है।

इसकी पाबंदी के चलते विदेशों के मिले आर्डर अब प्रभावित होने लगे हैं। एक अनुमान के मुताबिक करीब 100 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट आर्डर या तो कैंसल होने की कगार पर है या लेट होने से मुनाफे में कटौती का प्रस्ताव है।

कुल मिलाकर पूरी इंडस्ट्री की निगाहें अब राज्य सरकार की गठित एडवाइजरी कमेट पर है। वैसे भी सहारनपुर की वुड कार्विंग उद्योग में हर कदम पर आरा मशीन की आवश्यकता है।

वन निगम से लकड़ी आने के बाद उसकी चिराई की जाती है। इसके बाद उसका ट्रीटमेंट करने के बाद कारखानों में तैयार होने वाले उत्पादों के लिहाज से उसे तैयार किया जाता है।

लकड़ी के उत्पादों के लिए ज्यादातर कारखानों में छोटी मशीनें लगाई गई थी। मगर, निर्देश के बाद वन विभाग ने उन पर रोक लगाई है।
सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को कुटीर उद्योगों के लिए अलग से नियमावली बनाने का निर्देश दिया है।

ऐसे में अब प्रदेश सरकार की ओर गठित एडवाइजरी कमेटी से वुड कार्विंग उद्योग को उम्मीद है। यदि 36 इंच तक की लकड़ी की चिराई की अनुमति वुड कार्विंग उद्योग को मिल जाए तो कारखानों लगने वाली आरा मशीनें आसानी से लग सकती है।  इससे कारखानों में आसानी से काम हो जाएगा। माना जा रहा है   कि प्रदेश सरकार की कमेटी  राहत देगी।

सहारनपुर वुड कार्विंग मैन्यूफैक्चर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परविंदर सिंह का कहना है कि इस वक्त लकड़ी भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इसके अलावा आरा मशीनें नहीं चलने से माल तैयार नहीं हो पा रहा है।

हमारे पास एक्सपोर्ट के आर्डर हैं और उन्हें समय से देने की पाबंदी होती हैं। मगर, इन समस्याओं के चलते उत्पाद तैयार नहीं हो पा रहे हैं। कई एक्सपोर्टर्स के आर्डर कैंसिल होने शुरू हो गए हैँ।

साथ ही कई ऐसे भी जो देरी के चलते अपने रेट कम कर रहे हैं। इसके चलते करीब 100 करोड़ रुपये के नुकसान का आंकलन है। एक्सपोर्टर गुलफाम अहमद का कहना है कि सहारनपुर में एमडीएफ का काम होता है।


आरा मशीनें नहीं चलने उसकी शीट भी नहीं कट पा रही हैं। भारतीय लकड़ियों के साथ ही आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की पाइन पर भी काम हो रहा है। मगर चिराई नहीं होने से कारखाने बंद पड़े हैं।

 
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